कैसे लौटता है मानसून, किस रास्ते से लेता है विदा?
मानसून अब विदा ले रहा है. इस विदाई के साथ-साथ देश के कई हिस्सों में बारिश भी शुरू हो गई है, लेकिन क्या आपने सोचा है कि मानसून किस रास्ते से विदा होता है और इसका रूट क्या है?

भारत में जून के महीने में जिस मानसून का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं, सितंबर आते-आते उसके जाने का वक्त हो जाता है. जब मानसून आता है तो झमाझम बारिश से चारों तरफ खुशहाली छा जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह मानसून देश से विदा कैसे लेता है? मानसून का आना जितना धमाकेदार होता है, उसकी वापसी उतनी ही शांत और धीमी होती है. आइए जानते हैं कि लौटता हुआ मानसून क्या है और यह किस रास्ते से अपने घर वापस जाता है.
मानसून की वापसी कहां से शुरू होती है?
मानसून की वापसी की शुरुआत हमेशा देश के सबसे उत्तर-पश्चिमी हिस्से से होती है. सबसे पहले पश्चिमी राजस्थान और कच्छ के इलाकों से मानसून विदा लेना शुरू करता है. मौसम विभाग के नियमों के मुताबिक, देश के किसी भी हिस्से से मानसून की वापसी एक सितंबर से पहले नहीं होती. इसके बाद अगर किसी इलाके में लगातार पांच दिनों तक बारिश नहीं होती, हवा का दबाव बदलने लगता है और हवा में नमी की मात्रा घटने लगती है तो मौसम विभाग यह मान लेता है कि उस इलाके से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है.
किस रास्ते से लौटता है मानसून?
राजस्थान और कच्छ से विदा लेने के बाद मानसून धीरे-धीरे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात के बाकी हिस्सों से पीछे हटता है. इसके बाद यह मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से विदा लेता है. फिर झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों से मानसून पीछे हटने लगता है.
सबसे आखिर में मानसून दक्षिण भारत यानी महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल से विदा होता है. यानी मानसून जिस रास्ते से आता है, लगभग उसी के उल्टे रास्ते पर चलते हुए यह देश छोड़ता है, बस थोड़ा अलग क्रम में. पूरे देश से मानसून की पूरी तरह वापसी में आमतौर पर करीब एक महीने से ज्यादा का समय लग जाता है.
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वापसी के दौरान क्यों होती है बारिश?
एक बात जो अक्सर लोगों को हैरान करती है, वह यह है कि मानसून की वापसी के दौरान भी कई राज्यों में तेज बारिश देखने को मिलती है. दरअसल, जब मानसून पीछे हटता है तो हवा की दिशा बदलती है और नमी वाली हवाएं कई बार दोबारा किसी इलाके की तरफ मुड़ जाती हैं, जिससे अचानक भारी बारिश हो जाती है. दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों, खासकर तमिलनाडु में मानसून की वापसी के बाद उत्तर-पूर्वी मानसून यानी लौटता मानसून सक्रिय हो जाता है, जिससे वहां अक्टूबर से दिसंबर के बीच भी अच्छी बारिश होती है.
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