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Ship Navigation: खुले समंदर में लोकेशन का पता कैसे लगाते हैं शिप, क्या पानी में भी काम करता है जीपीएस?

Ship Navigation: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर जहाज को समुद्र में कैसे पता चलता है कि वह कहां पर है. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

Ship Navigation: जब भी कोई जहाज हजारों किलोमीटर पानी से घिरा होता है और दूर-दूर तक कोई जमीन नहीं दिखाई देती तब एक सवाल उठता है कि उसे ठीक-ठाक कैसे पता चलता है कि वह कहां है? आज के आधुनिक जहाज नेविगेशन की एडवांस तकनीक पर निर्भर करते हैं. इस प्रणाली में जीपीएस समुद्री नेविगेशन के लिए सबसे जरूरी साधन बन गया है. 

क्या जीपीएस पानी पर काम करता है? 

जीपीएस पानी की सतह पर काफी अच्छे तरीके से काम करता है. असल में आधुनिक जहाज खास समुद्री जीपीएस रिसीवर से लैस होते हैं जो पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे नेविगेशन उपग्रह के साथ लगातार संपर्क बनाए रखते हैं. यह उपग्रह कुछ ऐसे संकेत भेजते हैं जिनकी मदद से जहाज की नेविगेशन प्रणाली वास्तविक समय में उसका सटीक लैटीट्यूड, लोंगिट्यूड, रफ्तार और दिशा की गणना कर पाती है. चाहे कोई जहाज तट रेखा के पास हो या फिर प्रशांत या हिंद महासागर की गहराई में जीपीएस उसकी हलचल को सटीक रूप से ट्रैक कर सकता है. 

जीपीएस पानी के अंदर काम क्यों नहीं करता? 

जीपीएस संकेत रेडियो तरंगों के जरिए से यात्रा करते हैं. रेडियो तरंगे गहरे पानी में प्रभावी ढंग से प्रवेश नहीं कर पाती. इस सीमा की वजह से पनडुब्बी और पानी के अंदर गोता लगाने वाले लोग पानी में डूबे रहने के दौरान जीपीएस पर निर्भर नहीं रह सकते. इसके बजाय पनडुब्बी सोनार प्रणाली और आधुनिक नेविगेशन  तकनीक का इस्तेमाल करती हैं. यह उपग्रह संकेतों के बजाय  ध्वनि तरंगों पर निर्भर करती हैं. यही वजह है कि अगर पनडुब्बी को सीधे जीपीएस संकेत प्राप्त करने हो तो उन्हें अक्सर थोड़ी देर के लिए सतह पर आना पड़ता है.

जीपीएस और जीएनएसएस

आधुनिक जहाज मुख्य रूप से नेविगेशन के लिए जीपीएस और ग्लोबल नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं. यह प्रणाली एक ही समय में कई उपग्रहों से जुड़ती है और स्थिति की काफी ज्यादा सटीक जानकारी देती है. जहाज पर मौजूद नेविगेशन उपकरण हर सेकंड जहाज की स्थिति को लगातार अपडेट करते रहते हैं. इससे कप्तानों को समुद्रों के पार अपने तय रास्ते का सुरक्षित रूप से पालन करने में मदद मिलती है.

डिजिटल नेवीगेशन मैप्स 

ज्यादातर बड़े जहाज अब एक ऐसी प्रणाली का इस्तेमाल करते हैं जिसे इलेक्ट्रॉनिक चार्ट डिस्प्ले एंड इनफॉरमेशन सिस्टम के नाम से जाना जाता है. यह जहाज के लिए एक डिजिटल मैप के रूप में काम करता है. यह सिस्टम जीपीएस डेटा को इलेक्ट्रॉनिक नेविगेशन चार्ट के साथ मिलाकर जहाज की एकदम सही और रियल टाइम लोकेशन स्क्रीन पर दिखाता है. 

रडार का फायदा 

जीपीएस जहाज को बताता है कि वह दुनिया में कहां है लेकिन रडार उन्हें यह समझाने में मदद करता है कि उनके आस-पास क्या है. आधुनिक समुद्री रडार सिस्टम अपने आस-पास के जहाज, द्वीप, चट्टान, तट रेखा और रूकावटों का पता अंधेरे, तूफान या फिर घने कोहरे में भी लगा सकते हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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