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वैज्ञानिकों का नहीं था हाथ, फिर कैसे बना सोडा वॉटर? नहीं जानते होंगे दारू के पक्के साथी का राज

Invention Of Carbonated Water: आज बाजार में मिलने वाले सोडा और कोल्ड ड्रिंक्स के बुलबुले सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि इतिहास भी समेटे हुए हैं. आइए जानें कि शराब के साथी सोडा वॉटर की खोज किसने की.

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  • पादरी जोसेफ प्रिस्टली ने 1767 में बनाया आर्टिफिशियल सोडा.
  • उन्होंने सल्फ्यूरिक एसिड से निकली गैस पानी में घोली.
  • यह खोज 1772 में किताब से दुनिया तक पहुंची.
  • सोडा से शराब का स्वाद बेहतर लगने लगा.

आज जब भी कोई शराब पीता है तो उसके साथ सोडा वॉटर लगभग तय होता है. ठंडे गिलास में उठते छोटे-छोटे बुलबुले पीने का मजा दोगुना कर देते हैं, लेकिन जिस सोडा को लोग आम समझते हैं, उसकी शुरुआत किसी बड़े वैज्ञानिक प्रयोगशाला में नहीं हुई थी. इसकी कहानी एक ऐसे इंसान से जुड़ी है जो पेशे से पादरी था, लेकिन उसकी जिज्ञासा ने दुनिया को कार्बोनेटेड पानी का तोहफा दे दिया.

दारू का परफेक्ट साथी कैसे बना सोडा?

आज शराब पीने वालों के लिए सोडा वॉटर सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि एक आदत बन चुका है. व्हिस्की, रम या जिन हर ड्रिंक के साथ सोडा का इस्तेमाल आम है. इसकी वजह है इसका हल्का स्वाद और उसमें मौजूद गैस, जो शराब के असर को थोड़ा स्मूद बना देती है. लेकिन यह जानकर हैरानी होती है कि इस जरूरी मिक्सर की शुरुआत किसी शराब कंपनी ने नहीं, बल्कि एक जिज्ञासु दिमाग ने की थी.

पादरी ने बदली पीने वालों की दुनिया

सोडा वॉटर का असली श्रेय जोसेफ प्रिस्टली को जाता है, जो पेशे से पादरी और दार्शनिक थे. वह कोई प्रोफेशनल वैज्ञानिक नहीं थे, लेकिन उनके प्रयोगों ने इतिहास बदल दिया. उस दौर में लोग पानी को ज्यादा आकर्षक बनाने के तरीके खोज रहे थे, और यहीं से प्रिस्टली की दिलचस्पी शुरू हुई. उन्होंने सोचा कि क्या पानी में गैस मिलाकर उसे अलग बनाया जा सकता है.

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1767 का वो प्रयोग जिसने सब बदल दिया

साल 1767 में प्रिस्टली ने एक अनोखा प्रयोग किया. उन्होंने चॉक पर सल्फ्यूरिक एसिड डाला, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकली. फिर इस गैस को उन्होंने सादे पानी में घोल दिया. यह दुनिया का पहला आर्टिफिशियल कार्बोनेटेड वॉटर था. जब इसे चखा गया, तो यह हल्का चुभने वाला और ताजगी भरा लगा यही आगे चलकर सोडा वॉटर बना.

किताब से दुनिया तक पहुंचा सोडा

प्रिस्टली ने अपनी खोज को सिर्फ अपने तक सीमित नहीं रखा. साल 1772 में उन्होंने एक किताब के जरिए इस तकनीक को दुनिया के सामने रखा. इस कदम ने सोडा वॉटर को आम लोगों तक पहुंचाने का रास्ता खोल दिया. धीरे-धीरे यह पेय लोकप्रिय हुआ और बाद में सॉफ्ट ड्रिंक्स इंडस्ट्री की नींव भी इसी पर पड़ी.

दारू और सोडा का कनेक्शन

समय के साथ लोगों ने पाया कि सोडा वॉटर शराब के साथ मिलाने पर उसका स्वाद बेहतर कर देता है. इससे शराब ज्यादा स्ट्रॉन्ग नहीं लगती और पीने में हल्की लगती है. यही कारण है कि आज हर बार, पार्टी या घर की महफिल में सोडा एक जरूरी हिस्सा बन गया है. यह सिर्फ एक मिक्सर नहीं, बल्कि पीने के अनुभव को बदलने वाला तत्व बन चुका है.

खोजकर्ता को सम्मान और पहचान भी मिली

प्रिस्टली की इस खोज को नजरअंदाज नहीं किया गया. उन्हें रॉयल सोसाइटी द्वारा ‘कोपले मेडल’ से सम्मानित किया गया, जो उस समय का बड़ा वैज्ञानिक सम्मान था. यह साबित करता है कि भले ही वे पेशेवर वैज्ञानिक नहीं थे, लेकिन उनका काम विज्ञान और समाज दोनों के लिए बेहद अहम था.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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