Gold Origin: कैसे हुई थी सोने की उत्पत्ति, जानें वक्त के साथ कैसे हुई यह धातु मूल्यवान?
Gold Origin: सोने की कीमत में वक्त के साथ काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है. आइए जानते हैं कि इसकी उत्पत्ति कैसे हुई थी और आखिर यह धातु इतनी मूल्यवान क्यों है.

Gold Origin: सोने को अक्सर धन और शक्ति के प्रतीक के रूप में माना जाता है. लेकिन आपको बता दें कि इसकी यात्रा मानव सभ्यता से भी काफी पहले शुरू हो गई थी और यहां तक की पृथ्वी के अस्तित्व में आने से भी पहले. सोने का इतना स्थायी मूल्य होने की वजह ना सिर्फ मानव इतिहास में है बल्कि ब्रह्मांडीय घटनाओं और दुर्लभ प्राकृतिक गुणों में भी है.
कहां पैदा हुआ सोना?
आधुनिक खगोल भौतिकी के मुताबिक सोने की उत्पत्ति पृथ्वी पर नहीं हुई थी. यह जानकर काफी अजीब लग सकता है कि सोना अरबों साल पहले न्यूट्रॉन तारे की टक्कर और सुपरनोवा विस्फोट जैसी चरम ब्रह्मांडीय घटनाओं के दौरान बना था. यह दुर्लभ घटनाएं इतने ज्यादा तापमान और दबाव को पैदा करती हैं कि सोना, प्लैटिनम और यूरेनियम जैसे भारी तत्व बन सकते हैं. साधारण तारें सोना नहीं बना सकते सिर्फ यह विनाशकारी ब्रह्मांडीय टक्कर ही सोना बना सकती हैं.
सोना पृथ्वी तक कैसे पहुंचा?
लगभग चार अरब साल पहले जब पृथ्वी एक पिंगली हुई विकासशील ग्रह थी अंतरिक्ष से उल्का पिंडों की बमबारी को झेल रही थी. ये उल्का पिंड सोना और बाकी भारी तत्व लेकर आए थे. शुरुआत में इस सोने का ज्यादातर हिस्सा अपने वजन की वजह से पृथ्वी के कोर की तरफ डूब गया. हालांकि लाखों सालों में बार-बार उल्का पिंडों के टकराने और ज्वालामुखी गतिविधि की वजह से इस सोने का कुछ हिस्सा पृथ्वी की पपड़ी में वापस आ गया.
प्रारंभिक मानव सभ्यताओं में सोना
लगभग 3000 ईसा पूर्व प्राचीन मिस्त्र वासी सोने को देवताओं का मांस मानते थे. इसकी चमक और दुर्लभता ने इस दिव्यता, अमरता और शाही अधिकार का एक प्रतीक बना दिया. मंदिर, मुकुट और दफन मास्क को सोने से सजाया जाता था.
समय के साथ सोने के मूल्यवान बनने में सबसे बड़ी वजह में से एक इसकी काफी ज्यादा दुर्लभता है. सोना ब्रह्मांड और पृथ्वी दोनों जगह काफी दुर्लभ है. वैज्ञानिकों का ऐसा अनुमान है कि मानव इतिहास में अब तक खनन किया गया सारा सोना सिर्फ दो ओलंपिक आकर के स्विमिंग पूल में समा जाएगा.
सोने के गुण
सोना हजारों वर्षों के बाद भी जंग नहीं खाता, खराब नहीं होता या धूमिल नहीं होता. यह काफी लचीला होता है जिसका मतलब है कि इसे बिना टूटे आसानी से आकर दिया जा सकता है. साथ ही इसमें एक प्राकृतिक चमक होती है जो फीकी नहीं पड़ती.
लगभग 700 बीसी में लिडिया के राज्य ने पहले सोने के सिक्के पेश किए थे. सोने की एक जैसी कीमत, टिकाऊपन और आसानी से पहचान की वजह से यह व्यापार के लिए एकदम सही था. सदियों से सोना वैल्यू का एक यूनिवर्सल जरिया बन गया. आज भी सेंट्रल बैंक और निवेशक महंगाई, करेंसी गिरने और आर्थिक अनिश्चितता से बचने के लिए सोने पर भरोसा करते हैं.
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