नया ग्लोबल ऑर्डर तैयार कर रहा चाइना, यहां देखें ड्रैगन की मिलिट्री और इकोनॉमिक पॉवर
चीन अपनी बेमिसाल सैन्य और आर्थिक ताकत के दम पर दुनिया का नया ढांचा तैयार कर रहा है. वह पश्चिमी देशों के दबदबे को खत्म कर एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था बनाने में जुटा है.

- क्रय शक्ति में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, मजबूत सैन्य ताकत.
वैश्विक राजनीति का रुख अब तेजी से बदल रहा है. लंबे समय से दुनिया पर राज करने वाली अमेरिकी व्यवस्था को अब चीन से सीधी टक्कर मिल रही है. बीजिंग अपनी बढ़ती ताकत के बल पर एक नया ग्लोबल ऑर्डर तैयार करने में लगा है. विकासशील देशों को साथ लेकर और अपनी सेना को आधुनिक बनाकर चीन खुद को सुपरपावर के रूप में स्थापित कर रहा है. डॉलर की बादशाहत को चुनौती देने से लेकर समुद्री सीमाओं पर दबदबा बनाने तक, ड्रैगन की यह रणनीति बेहद आक्रामक है. आइए गहराई से समझते हैं कि चीन की आर्थिक और सैन्य ताकत का असली सच क्या है.
पश्चिमी दबदबे को सीधी चुनौती और नया नेटवर्क
चीन ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के एकाधिकार को तोड़ने की पूरी तैयारी कर ली है. इसके लिए वह 'ग्लोबल साउथ' यानी दुनिया के विकासशील देशों को एकजुट कर रहा है. ब्रिक्स (BRICS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों का विस्तार करने में चीन की मुख्य भूमिका रही है. इन संगठनों के जरिए चीन एक ऐसी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है, जहां केवल पश्चिमी देशों की मर्जी न चले और वैश्विक फैसलों में उसकी बात को सबसे ज्यादा अहमियत मिले.
बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से कर्ज का जाल
दुनिया भर में अपना रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने के लिए चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) नाम की बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है. इस प्रोजेक्ट के तहत चीन दुनिया के करीब 150 देशों के बुनियादी ढांचे में अरबों डॉलर का भारी-भरकम निवेश कर रहा है. सड़कों, बंदरगाहों और रेल नेटवर्क के विकास के नाम पर किए जा रहे इस निवेश से कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देश चीन के कर्जजाल में फंसते जा रहे हैं, जिससे चीन का उन पर आर्थिक नियंत्रण मजबूत होता जा रहा है.
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अमेरिकी डॉलर की बादशाहत पर सीधी चोट
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को खत्म करने के लिए चीन लंबे समय से 'डी-डॉलरलाइजेशन' की नीति पर काम कर रहा है. वह वैश्विक स्तर पर अपनी मुद्रा युआन (रैन्मिन्बी) में व्यापार करने के लिए विभिन्न देशों को लगातार प्रोत्साहित कर रहा है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण ईरान से तेल की सीधी खरीद है, जहां चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह न करते हुए सीधे अपनी मुद्रा में व्यापार किया और अमेरिकी वित्तीय दबाव को पूरी तरह से खारिज कर दिया.
ग्लोबल गवर्नेंस और शांतिदूत बनने का मुखौटा
चीन ने खुद को वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार और निष्पक्ष महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए 'ग्लोबल गवर्नेंस इनिशिएटिव' की शुरुआत की है. इस नीति के जरिए वह दुनिया के सामने खुद को एक शांतिदूत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है. चीन का असली मकसद संयुक्त राष्ट्र (UN) के वर्तमान ढांचे के भीतर अपनी पकड़ को इस हद तक मजबूत करना है, जिससे वैश्विक सुरक्षा और विकास से जुड़े बड़े फैसलों को वह अपनी शर्तों पर तय कर सके.
क्रय शक्ति में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
चीन की आर्थिक ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नाममात्र जीडीपी के मामले में वह अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर है. वहीं, अगर क्रय शक्ति समता (PPP) की बात करें, तो चीन आज दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बन चुका है. वह पूरी दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और ग्लोबल 'मैन्युफैक्चरिंग हब' है. दुनिया भर की सप्लाई चेन पर चीन का ऐसा नियंत्रण है कि उसके बिना वैश्विक बाजार का चलना नामुमकिन है.
रक्षा बजट पर पानी की तरह पैसा बहाना
आर्थिक मोर्चे के साथ-साथ चीन अपनी सैन्य क्षमता को आधुनिक बनाने पर भी रिकॉर्ड तोड़ खर्च कर रहा है. अमेरिका के बाद चीन का रक्षा बजट दुनिया में सबसे ज्यादा है, जो लगभग 336 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है. इस भारी-भरकम बजट का इस्तेमाल चीनी सेना (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) को सबसे उन्नत हथियारों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए किया जा रहा है, ताकि युद्ध की स्थिति में वह किसी भी देश को पछाड़ सके.
संख्या बल में बीस लाख सैनिकों की फौज
सैनिकों की संख्या के मामले में चीनी सेना दुनिया की सबसे बड़ी और ताकतवर ताकतों में से एक मानी जाती है. चीन के पास इस समय लगभग 20 लाख सक्रिय सैनिक हैं, जो किसी भी चुनौती से निपटने के लिए हर वक्त मुस्तैद रहते हैं. केवल संख्या बल ही नहीं, बल्कि इन सैनिकों को बेहद कड़े और आधुनिक माहौल में प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे जमीनी युद्ध के मामले में चीन की स्थिति बेहद मजबूत और आक्रामक हो जाती है.
दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना का समंदर में खौफ
समुद्री ताकत की बात करें तो जहाजों और पनडुब्बियों की कुल संख्या के लिहाज से चीन के पास आज दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना मौजूद है. चीन अपनी इस मैरीटाइम स्ट्रेंथ को लगातार बढ़ा रहा है, जिससे वह दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर जैसे रणनीतिक इलाकों में अपना दबदबा कायम कर सके. समंदर में चीनी युद्धपोतों और पनडुब्बियों की बढ़ती मौजूदगी ने अमेरिका सहित दुनिया के कई बड़े देशों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है.
खतरनाक मिसाइलें और परमाणु हथियारों का जखीरा
चीन अपनी सेना को हाई-टेक बनाने की रेस में सबसे आगे निकल रहा है. वह हाइपरसोनिक मिसाइलों, पांचवीं पीढ़ी के उन्नत लड़ाकू जेट विमानों और अत्याधुनिक परमाणु पनडुब्बियों के निर्माण में दुनिया के शीर्ष देशों की कतार में शामिल है. इसके अलावा चीन अपने परमाणु जखीरे को भी तेजी से बढ़ा रहा है. यह आधुनिक और घातक परमाणु तकनीक ही चीन को वैश्विक मंच पर एक बेहद खतरनाक और अजेय सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करती है.
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Source: IOCL


























