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भारत में E-20 पर बवाल, जानें थाईलैंड का E-85 मॉडल कैसे रहा सुपरहिट?

भारत में शुद्ध पेट्रोल की अनुपलब्धता और E-20 के चलते माइलेज व इंजन की समस्याओं पर भारी बवाल है, जबकि थाईलैंड ने आकर्षक कीमतों और बेहतर विकल्पों के जरिए E-85 मॉडल को सुपरहिट बनाया था.

भारत में इन दिनों पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन को लेकर वाहन मालिकों के बीच भारी असंतोष और असमंजस का माहौल बना है. सरकार बिना किसी ठोस विकल्प के पारंपरिक शुद्ध पेट्रोल को लगभग गायब करते हुए उसकी जगह पर E-20 ईंधन अनिवार्य कर दिया है. इससे गाड़ियों के इंजन की सेहत, माइलेज और जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को लेकर जनता में असंतोष देखने को मिल रहा है. वहीं दूसरी तरफ थाईलैंड में एथेनॉल के क्षेत्र में E-85 जैसे बड़े स्तर तक का सफर बेहद सफलतापूर्वक तय किया है. चलिए जानें कि थाईलैंड का यह मॉडल सुपरहिट क्यों रहा.

भारत में E-20 ईंधन को लेकर क्यों भड़के वाहन मालिक

देश के पेट्रोल पंपों से शुद्ध पेट्रोल का अचानक गायब हो जाना आम जनता के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है. सरकार ने पर्यावरण और विदेशी मुद्रा को बचाने के नाम पर पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने का नियम तो लागू कर दिया है, लेकिन इसका खामियाजा सीधे तौर पर वाहन मालिकों को भुगतना पड़ रहा है. लोगों को शिकायत है कि इस ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ियों का मायलेज काफी कम हो गया है और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब होने लगे हैं, जिससे गाड़ियों की मरम्मत का खर्चा काफी बढ़ गया है. सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात पर है कि एथेनॉल मिलाने के बाद भी लोगों को पेट्रोल की कीमतों में कोई राहत नहीं है. 

क्या होता है E-20 और E-85 एथेनॉल का गणित?

इस पूरे विवाद को गहराई से समझने के लिए एथेनॉल के गणित को समझना बेहद जरूरी है. E-20 का सीधा सा मतलब बै कि ऐसा ईंधन जिसमें 80 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है. वहीं E-85 में ईंधन में एथेनॉल की मात्रा 85 प्रतिशत तक पहुंच जाती है और उसमें पेट्रोल की हिस्सेदारी सिर्फ 15 प्रतिशत की रह जाती है. एथेनॉल असल में गन्ने के शीरे, मक्का, टूटे चावल और कृषि अवशेषों से तैयार किया जाने वाला एक जैविक एल्कोहल ईंधन है. इसे सामान्य गाड़ियों के इंजनों में सीधे इस्तेमाल नहीं किया जाता है, बल्कि इसके लिए खास तकनीक वाले फ्लेक्स-फ्यूल इंजनों की जरूरत होती है.

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थाईलैंड ने कैसे हासिल की थी E-85 में महारत?

भारत के मुकाबले थाईलैंड जैसे छोटे से एशियाई देश ने एथेनॉल के क्षेत्र में बहुत पहले ही बड़ी क्रांति कर दी थी. थाईलैंड का मुख्य उद्देश्य महंगे कच्चे तेल के आयात को कम करना और अपने देश के किसानों को मजबूत करना था. थाईलैंड की सरकार ने स्थानीय स्तर पर गन्ना और कसावा जैसी फसलों से बड़े पैमाने पर एथेनॉल का उत्पादन शुरू करवाया. इससे न केवल ग्रामीण इलाकों में रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा हुए, बल्कि देश की विदेशी तेल पर निर्भरता भी काफी हद तक कम हो गई. थाईलैंड ने बहुत ही योजनाबद्ध तरीके से अपने पूरे देश में एथेनॉल के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया था.

ग्राहकों को खींचने के लिए थाईलैंड की रणनीति

थाईलैंड की सफलता का सबसे बड़ा राज यह रहा कि उसने अपने नागरिकों पर कोई भी नियम जबरन नहीं थोपा. वहां की सरकार ने E-85 ईंधन की कीमतों को सामान्य पेट्रोल के मुकाबले बेहद सस्ता रखा. चूंकि एथेनॉल युक्त ईंधन से गाड़ियों का माइलेज थोड़ा कम हो जाता है, इसलिए सरकार ने दाम इतने कम कर दिए कि प्रति किलोमीटर चलने का खर्चा ग्राहकों को बेहद किफायती लगे. इसके अलावा थाईलैंड के पेट्रोल पंपों पर हमेशा अलग-अलग विकल्प जैसे E-10, E-20 और E-85 एक साथ मौजूद रहे, जिससे वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी के इंजन के हिसाब से सही ईंधन चुनने की पूरी आजादी मिली. हालांकि एक लंबे वक्त के बाद आखिर थाईलैंड फिर से E-20 को प्राथमिकता देने लगा है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

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