अक्टूबर में सबसे ज्यादा गर्मी कब पड़ी थी, उस साल कब आई थी गुलाबी ठंड?
मौसम के बदलते मिजाज के बीच अक्टूबर महीने में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और ठंड की शुरुआत को लेकर लोग हैरान हैं, जानें इतिहास में किस साल अक्टूबर ने सबसे ज्यादा तपाया था और कब हुई थी ठंड की एंट्री.

देशभर में आमतौर पर अक्टूबर का महीना त्योहारों की खुशियों और मौसम में आने वाले सुखद बदलाव के लिए जाना जाता है. इस महीने से उमस भरी गर्मी से राहत मिलने लगती है और हल्की गुलाबी ठंडक लोगों को सुहाने मौसम का अहसास कराती है. हालांकि, हाल के वर्षों में मौसम के मिजाज ने वैज्ञानिकों और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है.
भारतीय मौसम विभाग के ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2024 में अक्टूबर के महीने ने गर्मी के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. मौसम विभाग के अनुसार, साल 1901 के बाद यानी पिछले 123 वर्षों में देश का सबसे गर्म अक्टूबर साल 2024 में दर्ज किया गया था, जिसने मौसम के सामान्य चक्र को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया था.
इतिहास में कब पड़ी थी सबसे ज्यादा गर्मी?
मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, अगर किसी एक साल में अक्टूबर के महीने के औसत अधिकतम तापमान की बात करें, तो भारत के इतिहास में साल 1951 का अक्टूबर सबसे ज्यादा तपने वाला रहा था. उस साल दिल्ली के सफदरजंग मौसम केंद्र पर औसत अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था, जो सामान्य से बहुत अधिक था.
इसके बाद हाल ही में साल 2024 का अक्टूबर महीना देश में सबसे गर्म महीना साबित हुआ, जिसने 1951 के रिकॉर्ड को चुनौती दी और देश का औसत माध्य तापमान 26.92 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया. इसके अलावा, साल 1941 में औसत तापमान 35.8 डिग्री और 1907 में 35.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो इतिहास के सबसे गर्म अक्टूबर महीनों में गिने जाते हैं.
उस ऐतिहासिक साल में कब आई थी गुलाबी ठंड?
ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिस साल अक्टूबर में इतनी भीषण गर्मी पड़ी, उस साल गुलाबी ठंड ने कब दस्तक दी थी? मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, साल 1951 और साल 2024 जैसे रिकॉर्ड तोड़ गर्म वर्षों में अक्टूबर का पूरा महीना बिना किसी शुरुआती ठंडक के ही बीत गया था.
आमतौर पर 15 अक्टूबर के बाद से रातों में हल्की गुलाबी ठंड शुरू हो जाती है, लेकिन इन अत्यधिक गर्म सालों में अक्टूबर के आखिर तक लोगों को AC और पंखे चलाने पड़े थे. इन वर्षों में नवंबर के दूसरे सप्ताह में जाकर पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाओं के कारण मौसम में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई थी और तब जाकर लोगों को हल्की गुलाबी ठंड का अहसास होना शुरू हुआ था.
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अक्टूबर में इतनी ज्यादा गर्मी पड़ने की क्या थी वजह?
मौसम विभाग के अनुसार, सबसे बड़ी वजह उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ Western Disturbances का पूरी तरह से अनुपस्थित होना है. जब पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी या बारिश नहीं होती, तो मैदानी इलाकों में ठंडी हवाएं नहीं पहुंच पातीं.
इसके साथ ही, बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्रों के कारण हवा में नमी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे मानसून की वापसी के बाद भी आसमान साफ नहीं हो पाता और उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान करने लगती है.
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