भारत में किस चीज पर सबसे ज्यादा टैक्स, कितने लोग करते हैं इस्तेमाल?
Highest Tax in India: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर भारत में सबसे ज्यादा टैक्स किन चीजों पर लगता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब?

- भारत में लक्जरी उत्पादों पर 40% उच्चतम GST दर लागू है।
- तंबाकू, कोल्ड ड्रिंक, ऑनलाइन गेमिंग पर 40% GST, लाखों उपभोक्ता।
- शराब, पेट्रोल GST से बाहर, राज्य कर से व्यापक प्रभाव।
- उच्चतम कर दरों वाले उत्पाद कई लोगों पर आर्थिक बोझ डालते हैं।
Highest Tax in India: भारत का टैक्सेशन सिस्टम स्वास्थ्य या फिर समाज के लिए हानिकारक माने जाने वाले कुछ लग्जरी उत्पादों और वस्तुओं पर ज्यादा टैक्स लगाता है. वर्तमान में सबसे ज्यादा जीएसटी स्लैब 40% है जो कई लग्जरी और सिन गुड्स श्रेणियों पर लागू होता है.
इसके अलावा शराब और पेट्रोलियम उत्पाद जीएसटी ढांचे से बाहर हैं और केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्य स्तरीय टैक्स के अधीन हैं. आइए जानते हैं कि किन उत्पादों पर सबसे ज्यादा टैक्स लगता है और कितने भारतीय उनका इस्तेमाल करते हैं.
तंबाकू, सिगरेट और पान मसाला
तंबाकू उत्पाद, सिगरेट और पान मसाला भारी टैक्स वाले उत्पादों में आते हैं. उन पर दूसरे लागू शुल्कों और लेवी के साथ 40% उच्चतम जीएसटी दर लगती है. हाई टैक्सेशन के बावजूद भारत में तंबाकू की खपत काफी ज्यादा है. ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे और दूसरी रिपोर्ट के आधार पर दी गई जानकारी के मुताबिक लगभग 28% से 30% भारतीय वयस्क जो लगभग 27-37 करोड लोगों के बराबर है, किसी न किसी रूप में तंबाकू या फिर धूम्रपान उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं.

ठंडे पेय और कार्बोनेटेड पेय पदार्थ
कोल्ड ड्रिंक, सोडा और एनर्जी ड्रिंक एक और श्रेणी है जिस पर काफी ज्यादा टैक्स स्लैब के तहत 40% जीएसटी लगता है. भारत में कार्बोनेटेड और शर्करा युक्त ड्रिंक का एक बड़ा बाजार है. खासकर शहरी और अर्ध शहरी क्षेत्र में. लगभग 60% से 70% परिवार और युवा लगातार या फिर उत्सव और सामाजिक अवसरों के दौरान ऐसी ड्रिंक का सेवन करते हैं. उनकी खपत का मतलब है कि उच्च टैक्स की दर कई लग्जरी वस्तुओं की तुलना में काफी बड़ी आबादी द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली उत्पाद श्रेणी पर लागू होती है.
लग्जरी गाड़ियां और उच्च इंजन क्षमता वाली मोटरसाइकिल
बड़ी एसयूवी, लग्जरी गाड़ियां और 350 सीसी से ज्यादा इंजन क्षमता वाली कुछ प्रीमियम मोटरसाइकिल भी 40% जीएसटी के अधीन हैं. हालांकि उनका उपभोक्ता आधार तुलनात्मक रूप से छोटा है. यह वाहन मुख्य रूप से उच्च इनकम वाले उपभोक्ताओं द्वारा ही खरीदे जाते हैं. ऐसे प्रीमियम वाहनों का इस्तेमाल करने वाले भारत की आबादी का लगभग 1% से 2% हैं.
ऑनलाइन गेमिंग, कैसीनो और सट्टेबाजी
ऑनलाइन मनी गेमिंग, हॉर्स रेसिंग और कैसीनो भी 40% जीएसटी के अंदर आते हैं. भारत में 400 मिलियन से ज्यादा सक्रिय गेमर्स के साथ तेजी से विस्तारित गेमिंग उद्योग है. इनमें से लगभग 9 से 10 करोड़ लोग रियल मनी ऑनलाइन गेमिंग एप्लीकेशन का इस्तेमाल करते हैं.
यह ऑनलाइन गेमिंग को उच्चतम जीएसटी स्लैब के संपर्क में आने वाले उपयोगकर्ताओं की संख्या के संदर्भ में एक बड़ी श्रेणी बनाता है.

शराब और पेट्रोल डीजल
शराब और पेट्रोलियम उत्पाद अलग-अलग हैं क्योंकि वे जीएसटी प्रणाली से बाहर हैं. इसके बजाय उन पर केंद्रीय और राज्य स्तरीय शुल्कों के संयोजन के जरिए से टैक्स लगाया जाता है.
शराब पर टैक्स घटक राज्य और उत्पाद के आधार पर लगभग 50% से 70% तक हो सकता है. पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्य वैट लगता है. इसके परिणामस्वरूप लगभग 45% से 50% का संयुक्त टैक्स बोझ पड़ता है.
भारत की लगभग 14% से 15% वयस्क आबादी या फिर लगभग 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं. पेट्रोल और डीजल की पहुंच और भी ज्यादा व्यापक है. भारत की 80 प्रतिशत से ज्यादा आबादी निजी वाहन, सार्वजनिक परिवहन और माल की आवाजाही से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन इंधनों का इस्तेमाल करती है.
कौन से उत्पाद सबसे ज्यादा लोगों को प्रभावित करते हैं?
उच्चतम जीएसटी दर कई श्रेणियों पर लागू होती है लेकिन उपभोक्ताओं की संख्या में काफी भिन्नता है. लग्जरी गाड़ियों का उपयोगकर्ता आधार काफी छोटा है जबकि तंबाकू, शराब और पेट्रोलियम उत्पाद आबादी के बड़े हिस्से को प्रभावित करते हैं.
इस वजह से उच्चतम टैक्स दर वाला उत्पाद जरूरी रूप से उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा बोझ पैदा करने वाला उत्पाद नहीं है. टैक्स की दर, उत्पाद की कीमत, उपभोग की फ्रीक्वेंसी और उपभोक्ता आधार का आकार सभी भारत में टैक्सेशन के प्रभाव को कंट्रोल करते हैं.
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