Heart Aerospace X1 Electric Aircraft: अमेरिका में उड़ा दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक हवाई जहाज, जानें खासियत
Heart Aerospace X1 Electric Aircraft: हार्ट एयरोस्पेस के X1 इलेक्ट्रिक विमान को FAA से टेस्ट फ्लाइट की मंजूरी मिल गई है. यह विमान पूरी तरह इलेक्ट्रिक तकनीक पर आधारित है.

Heart Aerospace X1 Electric Aircraft: अमेरिका की कंपनी हार्ट एयरोस्पेस ने अपने इलेक्ट्रिक हवाई जहाज X1 के लिए एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. 23 जुलाई 2026 को अमेरिका की Fedral Aviation Administration (FAA) ने कंपनी को स्पेशल एयरवर्दीनेस Certificate दे दिया है, यानी कंपनी अब X1 की उड़ान की टेस्टिंग शुरू कर सकती है. यह टेस्टिंग न्यूयॉर्क में Plattsburgh International Airport पर होगी. बता दें कि यह प्लेन 106 फीट यानी करीब 32 मीटर के पंखों के साथ, 76 फीट लंबा है जो इसको अब तक का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक हवाई जहाज बनता है और इसका टेकऑफ वजन लगभग 11,340 किलोग्राम से भी ज्यादा है.
कैसे काम करता है यह प्लेन?
X1 असल में एक टेस्ट प्लेन है, जिसे "डेमोंस्ट्रेटर" कहा जाता है. X1 पूरी तरह से इलेक्ट्रिक है और इसमें 400 किलोवाट का चार मोटरें लगी हुई हैं. इसमें कोई टर्बोप्रॉप इंजन नहीं है. यानी X1 सिर्फ बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर की मदद से उड़ता है. बताया जा रहा है कि इसका असली कमर्शियल प्लेन ES-30 थोड़ा अलग होगा. ES-30 में 1,600 किलोवाट पावर की दो बड़ी इलेक्ट्रिक मोटरें लगेंगी साथ ही दो टर्बोप्रॉप इंजन भी लगे होंगे. यानी ES-30 पूरी तरह इलेक्ट्रिक नहीं बल्कि हाइब्रिड होगा, ताकि यह ज्यादा दूरी तक उड़ सकेगा.
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सिटिंग कैपेसिटी, खर्च और आगे की योजना
अगर बैत करें सिटिंग कैपेसिटी और खर्च की तो ES-30 हवाई जहाज एक हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक रीजनल एयरलाइनर होगा. इसमें आम तौर पर 30 यात्रियों के बैठने की जगह होगी. बता दें कि अभी तक कंपनी ने इस प्लेन के टिकट की कीमत या इसे बनाने की कुल खर्च के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी है. बता दें कि कंपनी के ऑर्डर बुक की कीमत जुलाई 2026 तक 9.4 अरब डॉलर है, जिसमें United Airlines, Mesa Air Group, Air Canada और JSX जैसी एयरलाइंस शामिल हैं.
इसके अलावा जो डेटा X1 के टेस्टिंग से सामने आएगा, उसके अनुसार ही ES-30 के डेवलपमेंट में मदद मिलेगा, जिसका टाइप सर्टिफिकेशन 2031 में मिलने का लक्ष्य रखा गया है. बताया जा रहा है कि अगर सब कुछ सही तरह से योजना के मुताबिक चला, तो आने वाले सालों में यह हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक प्लेन छोटी दूरी की उड़ानों के लिए इस्तेमाल होने लगेगा, जिससे हवाई सफर सस्ता और पर्यावरण के लिए कम नुकसानदायक होगा.
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