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जानबूझकर गाए वंदे मातरम के दो पैरा, कितनी होगी सजा?

Goa Congress Vande Mataram Controversy: वंदे मातरम पर जारी सियासी बवाल के बीच खबर है कि कांग्रेस ने अपने गोवा के कार्यक्रम में वंदे मातरम के सिर्फ दो पैरा गाए. चलिए जानें कि ऐसा करने पर कितनी सजा है.

Goa Congress Vande Mataram Controversy: गोवा में आयोजित कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो पैराग्राफ गाए जाने के बाद देश में एक नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है. मंच पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में हुए इस वाकये से यह सवाल उठने लगा है कि क्या राष्ट्रगीत के केवल दो पद गाना कानूनी रूप से गलत है? राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के लागू होने के बाद आम लोगों के मन में सजा और नियमों को लेकर कई तरह की भ्रम की स्थितियां बन गई हैं. कानून विशेषज्ञ और संसदीय प्रावधान स्पष्ट करते हैं कि सुविधानुसार केवल दो पद गाने पर कोई कार्रवाई नहीं होती, बल्कि दुर्भावनापूर्वक बाधा डालना अपराध की श्रेणी में आता है. चलिए इस बारे में विस्तार से समझें.

आजादी का इतिहास और 1950 का संविधान सभा का फैसला

वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी, जो सबसे पहले 1875 में बंगदर्शन पत्रिका में छपा और बाद में 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ का हिस्सा बना. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत क्रांतिकारियों की सबसे बड़ी प्रेरणा बना. 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार इसे मंच पर प्रस्तुत किया था. आजादी के बाद 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसके अतुलनीय ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए इसे आधिकारिक तौर पर भारत का राष्ट्रगीत (National Song) स्वीकार किया. ऐतिहासिक रूप से भी राष्ट्रीय अवसरों पर केवल शुरुआती दो पदों को ही गाने की परंपरा रही है.

वंदे मातरम पर सजा के कड़े कानूनी प्रावधान

हाल ही में संसद द्वारा पारित और राष्ट्रपति से मंजूरी प्राप्त 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026' ने राष्ट्रगीत को काफी मजबूती दी है. इस नए कानून के तहत 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान कानूनी सुरक्षा दी गई है. कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगीत के गायन को रोकता है, सभा में उपद्रव करता है या व्यवधान डालता है, तो उसे अधिकतम 3 साल की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है. अगर कोई व्यक्ति दोबारा यही अपराध करता है, तो उसके लिए कम से कम 1 साल की अनिवार्य सजा का कड़ा नियम बनाया गया है.

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जानबूझकर गाए वंदे मातरम के दो पैरा, कितनी होगी सजा?

तो क्या वंदे मातरम आधा गाना अपराध है?

कानूनी स्थिति बिल्कुल साफ है कि केवल दो पैरा गाना या पूरा राष्ट्रगीत न गाना अपने आप में कोई जुर्म नहीं है. किसी कार्यक्रम में समय की कमी या स्थापित परंपरा के तहत शुरुआती छंद गाने पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती है. अदालत और गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देश बताते हैं कि सजा केवल तभी लागू होती है जब व्यक्ति की मंशा राष्ट्रगीत का अपमान करने या चल रहे गायन में अड़चन डालने की हो. बिना किसी दुर्भावना के केवल दो पद गाने वाले किसी भी नागरिक या संस्था पर 3 साल की सजा का प्रावधान लागू नहीं होता है.

राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का अंतर तथा 52 सेकंड का नियम

'जन गण मन' और 'वंदे मातरम्' दोनों भारत की राष्ट्रीय पहचान के आधार हैं, लेकिन दोनों के प्रशासनिक प्रोटोकॉल अलग हैं. रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा संस्कृतनिष्ठ बंगाली में रचित 'जन गण मन' को 27 दिसंबर 1911 को पहली बार गाया गया था और 24 जनवरी 1950 को इसे 'राष्ट्रगान' का आधिकारिक दर्जा मिला. गृह मंत्रालय के नियमों के अनुसार राष्ट्रगान के आधिकारिक गायन की अवधि ठीक 52 सेकंड तय है, ताकि पूरे देश में इसकी प्रस्तुति एक समान और गरिमापूर्ण रहे. इसके अलावा, राष्ट्रगान के दौरान सम्मानपूर्वक सीधे खड़े होना अनिवार्य है, और इसमें बाधा डालने पर भी 1971 के मूल कानून के तहत 3 साल तक की जेल का प्रावधान है.


जानबूझकर गाए वंदे मातरम के दो पैरा, कितनी होगी सजा?

सार सार्वजनिक कार्यक्रमों की मर्यादा

भारत का कानून राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के प्रति जानबूझकर किए गए असम्मान या रुकावट पर सख्त सजा का प्रावधान करता है. हालांकि, ऐतिहासिक परंपराओं के अनुसार वंदे मातरम् के शुरुआती दो पद गाना पूरी तरह से कानूनी और संवैधानिक रूप से मान्य है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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