अविमुक्तेश्वरानंद पर जिन धाराओं में दर्ज हुआ केस उसमें कितनी होती है सजा, जान लें कानून
Swami Avimukteshwaranand FIR: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. आइए जानते हैं कि जिन धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है उनमें कितनी सजा होती है.

Swami Avimukteshwaranand FIR: स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के आदेश के बाद प्रयागराज के झूंसी पुलिस स्टेशन में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. इस केस में उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी का भी नाम है. कोर्ट के निर्देश पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत प्रोविजन लागू किए हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि जिन धाराओं में केस दर्ज हुआ है उसमें कितनी सजा होती है.
पॉक्सो एक्ट के तहत धाराएं
क्योंकि कथित पीड़ित नाबालिग है इस वजह से पॉक्सो एक्ट के सख्त प्रोविजन लागू किए गए हैं. पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 3, 5 और 9 पेनेट्रेटिव सेक्सुअल एसॉल्ट और अपराध के गंभीर रूपों से जुड़े हैं. गंभीर पेनेट्रेटिव सेक्सुअल एसॉल्ट में ऐसे हालात शामिल हैं जिनमें अधिकार या फिर भरोसे की स्थिति में लोग शामिल होते हैं और इसी के साथ दूसरी गंभीर परिस्थितियां भी शामिल हैं. दोषी पाए जाने पर इन सेक्शन के तहत सजा कम से कम 20 साल की सजा से लेकर उम्र कैद तक हो सकती है. काफी गंभीर मामलों में कोर्ट भारी जुर्माना के साथ मौत की सजा भी दे सकती है.
पॉक्सो एक्ट का सेक्शन 17 किसी अपराध के लिए उकसाने से जुड़ा हुआ है. अगर कोई व्यक्ति ऐसे अपराधों में मदद करता या फिर उकसाता हुआ पाया जाता है तो सजा मुख्य अपराधी जैसी ही होती है. इसका मतलब है कि उकसाने वाले को भी मुख्य अपराध के लिए तय की गई उतनी ही सजा हो सकती है.
भारतीय न्याय संहिता के तहत सेक्शन
भारतीय न्याय संहिता के सेक्शन 69 रेप और गंभीर सेक्सुअल एसॉल्ट से जुड़े हैं. जुर्म के नेचर और गंभीरता के आधार पर सजा कम से कम 10 साल की जेल से लेकर उम्र कैद तक हो सकती है. गंभीर हालात में सजा और भी सख्त हो सकती है. सेक्शन 74, 75, 76 और 79 सेक्सुअल हैरेसमेंट, शर्मिंदगी के इरादे से हमला और दूसरे गंभीर सेक्सुअल मिसकंडक्ट जैसे जुर्मों से जुड़े हैं. इन नियमों के तहत आमतौर पर 3 से 7 साल की जेल हो सकती है और साथ ही जुर्माना भी लगता है. किसी जुर्म के लिए उकसाने से जुड़ी धारा 109 में यह प्रावधान है कि अगर कोई व्यक्ति किसी जुर्म को करने के लिए उकसाता है या फिर उसमें मदद करता है तो उसे मुख्य अपराधी की तरह ही सजा दी जा सकती है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सार्वजनिक रूप से इन सभी आरोपों से इनकार किया है और उन्हें राजनीतिक साजिश बताया है. कानूनी कार्रवाई अभी भी शुरुआती दौर में है.
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Source: IOCL




























