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Elections From EVM: दुनिया के किस देश में पहली बार EVM से हुए थे चुनाव, जानें अब क्या है वहां का हाल

Elections From EVM: भारत में अक्सर EVM पर सवाल खड़े होते रहे हैं और कहा जाता है कि ईवीएम हैक हो गई. लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया में सबसे पहले EVM का इस्तेमाल कहां हुआ था, चलिए जानें.

Elections From EVM: भारत में अक्सर विपक्ष ईवीएम पर आरोप लगाता रहता है कि चुनाव के दौरान ईवीएम हैक हो गई, इसीलिए उनकी पार्टी को वोट नहीं मिले या कम वोट मिले. अब लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया की अहम भूमिका होती है. समय के साथ मतदान प्रणाली भी बदली है. पारंपरिक बैलेट पेपर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन EVM तक का सफर कई देशों ने तय किया. बहुत से लोगों को लगता है कि EVM का प्रयोग सबसे पहले भारत में हुआ था, लेकिन सच्चाई यह नहीं है. चलिए आपको बताते हैं कि सबसे पहले EVM का इस्तेमाल आखिर किस देश ने किया था. 

किस देश में सबसे पहले EVM का इस्तेमाल हुआ

शायद यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि दुनिया में सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल अमेरिका में हुआ था. 1960 के दशक के अंत और 1970 के दशक की शुरुआत में अमेरिका के कुछ राज्यों ने वोटिंग को तेज और सुविधाजनक बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर प्रयोग शुरू किए. यही प्रयोग आगे चलकर आधुनिक EVM का आधार बने.

अमेरिका में EVM की शुरुआत

अमेरिका में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग का सबसे पहला प्रयोग 1964 में ऑटोमैटिक वोटिंग मशीन AVM के रूप में हुआ. इसके बाद 1970 के दशक में डायरेक्ट रिकॉर्डिंग इलेक्ट्रॉनिक DRE मशीनों का इस्तेमाल शुरू हुआ, जिसमें मतदाता बटन दबाकर या टचस्क्रीन के जरिए वोट डालते थे. 1980 के दशक तक अमेरिका के कई राज्यों ने इन मशीनों को अपना लिया. यह बदलाव मतदान की गति और सुविधा बढ़ाने के लिए किया गया था.

वर्तमान स्थिति क्या है?

आज अमेरिका में पूरी तरह से EVM पर निर्भरता नहीं है. 2000 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में फ्लोरिडा के बैलेट विवाद के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम पर सवाल उठे. सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर लगातार बहस होती रही. इसके बाद कई राज्यों ने पेपर बैलेट और EVM का हाइब्रिड सिस्टम अपनाया. इसका मतलब है कि अब वोट इलेक्ट्रॉनिक मशीन से दर्ज होते हैं, लेकिन साथ ही उसका पेपर रिकॉर्ड भी रखा जाता है ताकि जरूरत पड़ने पर दोबारा गिनती की जा सके.

आज का हाल

2024 तक की स्थिति को देखें तो अमेरिका में लगभग 70% वोटिंग मशीनें इलेक्ट्रॉनिक और पेपर बैकअप वाले सिस्टम पर आधारित हैं. वहीं, कुछ राज्य अब भी केवल पेपर बैलेट का इस्तेमाल करते हैं. चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि EVM ने जहां सुविधा और तेजी दी, वहीं साइबर सुरक्षा और हैकिंग के खतरे ने इसकी विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े किए हैं. इसी वजह से अमेरिका में अब EVM और पेपर ट्रेल (VVPAT जैसे सिस्टम) का मिश्रित मॉडल सबसे ज्यादा प्रचलित है.

अमेरिका, जिसने सबसे पहले EVM का इस्तेमाल शुरू किया था, आज भी इस तकनीक पर पूरी तरह भरोसा नहीं करता है. वहां के चुनावों में सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग के साथ पेपर बैकअप को अनिवार्य बना दिया गया है. 

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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