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कहां सबसे पहले निकलता है ईद का चांद, जानें किस देश में होता है सबसे बड़ा जश्न

ईद का त्योहार आते ही बाजार गुलजार हो जाते हैं और मुस्लिम समुदाय के घरों पर भी कई तैयारियां होती हैं, लेकिन सभी के मन में सवाल होता है कि ईद का चांद सबसे पहले कहां दिखाई देता है. आइए जानते हैं...

Eid 2025: रमजान का पाक महीना खत्म हो रहा है. अब रोजेदारों की नजर आसमान की ओर है. आसमान में चांद नजर आते ही मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार ईद मनाई जाएगी. हालांकि, ईद कब मनाई जाएगी, यह चांद के दीदार पर निर्भर करता है. ईद का चांद जब भी दिखता है, उसके अगले दिन ईद मनाई जाती है. ईद के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग नए कपड़े पहनते हैं और घर पर सेवईं व अन्य पकवान बनाते हैं. कहते हैं कि रमजान के कठिन रोजों के बाद यह दिन अल्लाह की तरफ से इनाम के तौर पर दिया जाता है. 

ईद का त्योहार आते ही बाजार गुलजार हो जाते हैं और मुस्लिम समुदाय के घरों पर भी कई तैयारियां होती हैं, लेकिन सभी के मन में सवाल होता है कि ईद का चांद सबसे पहले कहां दिखाई देता है, यह कैसे तय होता है कि ईद कब मनाई जाएगी. आज हम ऐसे ही सवालों के जवाब जानेंगे... 

यहां मनाई जाती है सबसे पहले ईद

रमजान के बाद ईद की तारीख को लेकर हर बार बहस होती है और सभी देशों की मुस्लिम कमेटियों के अपने-अपने तर्क होते हैं. हालांकि, भौगोलिक परिस्थितियों के कारण रमजान के पाक महीने के बाद सबसे पहले चांद का दीदार सऊदी अरब में होता है. ऐसे में ईद कब होगी, यह फैसला सऊदी अरब में ईद मनाने के फैसले पर ही होता है. कई मुस्लिम देशों में सऊदी अरब की तय की हुई तारीख पर ही ईद मनाते हैं. सऊदी अरब में ईद के अगले दिन भारत-बांग्लादेश जैसे देशों में ईद मनाई जाती है. हालांकि, शिया आबादी वाले बहुत से देश ईरान में ईद की तारीख की घोषणा सरकार की ओर से की जाती है. 

अरब देशों में होता है सबसे बड़ा जश्न

ईद मुस्लिम समुदाय के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है. ऐसे में मुस्लिम देशों में इस त्योहार की रौनक देखने वाली होती है. माना जाता है कि सऊदी अरब जैसे देशों में सबसे बड़ा ईद का जश्न होता है. इस बार ईद की तारीखों की बात करें तो भारत में रमजान की शुरुआत 2 मार्च से हो गई थी. ऐसे में यहां ईद 31 मार्च या 1 अप्रैल को मनाई जा सकती है. वहीं, सऊदी अरब में रमजान की शुरुआत 1 मार्च को ही हो गई थी. ऐसे में यहां 30 या 31 मार्च को ईद मनाई जा सकती है. 

यह भी पढ़ें: क्या ईद की तरह किसी भी त्योहार की छुट्टी खत्म कर सकती है सरकारें? जानें क्या है नियम

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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