Earth’s Rotation Day: अचानक घूमना बंद कर दे पृथ्वी तो क्या होगा? 'अर्थ रोटेशन डे' पर जान लीजिए इसका जवाब
पृथ्वी का घूमना हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी है. यही घूर्णन दिन और रात का कारण बनता है, मौसमों में बदलाव लाता है और हमारे प्राकृतिक और जैविक चक्रों को प्रभावित करता है.

हर साल 8 जनवरी को पृथ्वी घूर्णन दिवस मनाया जाता है. इस दिन को इसलिए विशेष रूप से चुना गया क्योंकि इसी दिन, 1851 में, फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी लियोन फौकॉल्ट ने यह सिद्ध किया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है. पृथ्वी का घूमना हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी है. यही घूर्णन दिन और रात का कारण बनता है, मौसमों में बदलाव लाता है और हमारे प्राकृतिक और जैविक चक्रों को प्रभावित करता है. तो आइए पृथ्वी घूर्णन दिवस पर जानते हैं कि अगर पृथ्वी अचानक घूमना बंद कर दे तो क्या होगा?
पृथ्वी का घूर्णन क्या है?
पृथ्वी एक काल्पनिक रेखा के चारों ओर घूमती है, जिसे धुरी कहा जाता है. यह धुरी उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव को जोड़ती है. पृथ्वी लगभग 24 घंटे में अपनी धुरी पर एक पूरा चक्कर लगाती है. इसी कारण से हमें दिन और रात का अनुभव होता है. इसके अलावा, पृथ्वी के घूर्णन से मौसमों, हवाओं और प्राकृतिक घटनाओं पर भी असर पड़ता है. जैसे पृथ्वी के घूर्णन के कारण वायुमंडलीय धाराएं कोरियोलिस प्रभाव के कारण अलग-अलग दिशा में मुड़ती हैं. उत्तरी गोलार्ध में हवा दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मुड़ती है. यह हवा और समुद्री धाराओं की दिशा को प्रभावित करता है, जैसे व्यापारिक हवाएं और पश्चिमी हवाएं.
पृथ्वी घूर्णन दिवस का इतिहास
पृथ्वी के घूमने के विचार पर विचार और प्रयोग कई सदियों से होते रहे हैं. प्राचीन यूनानी दार्शनिकों ने ईसा पूर्व 470 में ही यह दावा किया था कि पृथ्वी घूमती है, लेकिन इस विचार को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ साबित करने का श्रेय लियोन फौकॉल्ट को जाता है. 1851 में उन्होंने फौकॉल्ट पेंडुलम नामक एक उपकरण बनाया, जिससे पृथ्वी के घूमने का सीधा प्रमाण दिखाया जा सके. यह प्रयोग इतना प्रभावशाली था कि इसे पेरिस और ग्रीस के विज्ञान संग्रहालयों में प्रदर्शित किया गया. आज भी कई अंतरराष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालयों में यह प्रयोग विशेष महत्व रखता है.
घूमना बंद कर दे पृथ्वी तो क्या होगा?
पृथ्वी का घूर्णन सिर्फ दिन और रात को तय नहीं करता, बल्कि यह कई प्राकृतिक और भौतिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है. जैसे पृथ्वी का घूमना यह तय करता है कि कब दिन होगा और कब रात, पृथ्वी का झुकाव और घूमना मौसम में बदलाव लाता है, कोरियोलिस प्रभाव के कारण वायुमंडलीय और महासागरीय धाराओं का रुख बदलता है, पृथ्वी के पिघले हुए कोर की गति एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है, जो हमें सूरज की हानिकारक विकिरणों से बचाती है. अगर अचानक से पृथ्वी घूमना बंद कर दे तो इसक पृथ्वी पर काफी बुरा असर पड़ेगा. पृथ्वी का एक हिस्सा बेहद ठंडा हो जाएगा और बर्फ की चादर में लिपट जाएगा तो दूसरे हिस्से में गर्मी इतनी बढ़ जाएगी कि मानव जीवन का अस्तित्व तक मिट सकता है.
पृथ्वी घूर्णन दिवस कैसे मनाया जाता है?
इस दिन का उद्देश्य सिर्फ लियोन फौकॉल्ट के प्रयोग को याद करना नहीं है, बल्कि यह दिन लोगों को पृथ्वी के घूमने की प्रक्रिया, उसके महत्व और इसके प्रभावों के बारे में जागरूक करने का है. विज्ञान संग्रहालयों और स्कूलों में इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. बच्चे और युवा फौकॉल्ट पेंडुलम का प्रदर्शन देखकर पृथ्वी के घूमने की प्रक्रिया को समझ सकते हैं. सोशल मीडिया पर हैशटैग #EarthsRotationDay के साथ जागरूकता फैलाई जाती है.
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Source: IOCL























