क्या सोलर पैनल लगाते ही बदल जाएगा बिजली का मीटर, जानें क्या हैं नियम?
सोलर पैनल लगते ही साधारण मीटर बदलकर बाई-डायरेक्शनल नेट मीटर लगाना जरूरी होता है. ताकि ग्रिड को भेजी गई अतिरिक्त बिजली का हिसाब रखकर बिल में छूट और सरकारी सब्सिडी मिल सके.

घर की छत पर रूफटॉप सोलर सिस्टम सेट अप करवाते ही बिजली मीटर बदलना अनिवार्य होता है. आपकी स्थानीय पावर सप्लाई कंपनी पुराना साधारण मीटर निकालकर वहां दोतरफा काम करने वाला बाय-डायरेक्शनल यानी नेट मीटर इंस्टॉल करती है. सोलर प्लांट चालू होने पर उपभोक्ता को पीएम सूर्य घर पोर्टल के माध्यम से अपनी संबंधित डिस्कॉम में नेट मीटरिंग का एप्लीकेशन सबमिट करना होता है. अमूमन इस कागजी काम में पैनल लगाने वाला वेंडर भी सहायता कर देता है. डिस्कॉम से एप्लीकेशन अप्रूव होने के बाद एक थर्ड-पार्टी एजेंसी उपकरण की बारीकी से टेस्टिंग करती है.
जांच पूरी होने पर पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी का इंस्पेक्टर साइट का जायजा लेकर मंजूरी देता है, जिसके बाद नया मीटर एक्टिव हो जाता है और बिलिंग इसी डेटा से होती है. अंत में सब्सिडी की राशि पाने के लिए जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं.
बाई-डायरेक्शनल मीटर कैसे करता है काम?
साधारण घरेलू बिजली मीटर केवल एक दिशा में काम करता है और सिर्फ यही रिकॉर्ड बनाता है कि आपने ग्रिड से कुल कितने यूनिट बिजली की खपत की. इसके विपरीत, सोलर पैनल लगने के बाद इस्तेमाल होने वाला बाई-डायरेक्शनल मीटर दोनों तरफ की बिजली का सटीक ब्योरा रखता है. यह उपकरण दर्ज करता है कि आपने ग्रिड से कितनी बिजली ली और आपके रूफटॉप प्लांट से पैदा होकर कितनी अतिरिक्त बिजली वापस सरकारी ग्रिड में भेजी गई.
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कैसे बदलते हैं मीटर?
छत पर सोलर ढांचा खड़ा हो जाने मात्र से अपने आप मीटर नहीं बदलता, बल्कि इसके लिए कुछ औपचारिक चरण पूरे करने पड़ते हैं. यूजर को अपने क्षेत्रीय बिजली वितरण निगम (DISCOM) के दफ्तर या आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर नेट मीटरिंग कनेक्शन के लिए अप्लाई करना होता है. इसके बाद बिजली विभाग के तकनीकी अफसर आपके घर आकर पूरे सोलर ढांचे की बनावट, अर्थिंग और सेफ्टी फीचर्स का इंस्पेक्शन करते हैं. सभी मानक सही पाए जाने पर ही नेट मीटर लगाने का अप्रूवल दिया जाता है.
एक्स्ट्रा बिजली का समायोजन और बिल में छूट
नेट मीटर लगाने का सबसे बड़ा आर्थिक फायदा यह है कि यह आपके महीने के बिजली बिल को बहुत कम कर देता है. यदि आपका सोलर सिस्टम दिन के समय आपकी जरूरत से ज्यादा पावर जनरेट करता है, तो बची हुई यूनिट्स अपने आप ग्रिड में ट्रांसफर हो जाती हैं. नेट मीटर के रिकॉर्ड के आधार पर डिस्कॉम आपके द्वारा दी गई यूनिट्स को कुल खपत में से घटा देता है और केवल बची हुई यूनिट्स का ही बिल बनाता है. यदि नेट मीटर न लगा हो, तो ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त बिजली का कोई क्रेडिट उपभोक्ता को नहीं मिलता है.

स्वीकृत उपकरणों से जुड़ा अनिवार्य नियम
सोलर रूफटॉप योजना के तहत सरकारी सब्सिडी हासिल करने के लिए केंद्र सरकार की एएलएमएम (ALMM) गाइडलाइन का सख्ती से पालन करना जरूरी है. इस नियम के अनुसार, आपके सोलर सिस्टम में लगे पैनल और सोलर सेल अनिवार्य रूप से सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त निर्माताओं की अप्रूव्ड लिस्ट (ALMM) के ही होने चाहिए. यदि वेंडर किसी गैर-मान्यता प्राप्त कंपनी के पैनल लगा देता है, तो डिस्कॉम नेट मीटर की मंजूरी देने से मना कर सकती है और आपकी सब्सिडी भी अटक सकती है.
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