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जेल में हमला करने वाले दोषियों की क्या बढ़ जाती है सजा, किन धाराओं में दर्ज होता है केस

जेल में हमला करना या किसी कैदी को चोट पहुंचाना गंभीर अपराध माना जाता है. इस तरह की घटनाओं में आमतौर पर कई धाराएं लागू होती है, जिनके अनुसार हमला करने वाले कैदियों की सजा भी बढ़ाई जा सकती है.

अहमदाबाद की साबरमती जेल से गंभीर मामला सामने आया है. यहां जेल में बंद अन्य कैदियों ने गुजरात स्थित एक आतंकी डॉ. अहमद सईद पर अचानक हमला कर दिया और उसकी पिटाई कर दी. हमले में डॉ. अहमद सईद के चेहरे पर गंभीर चोटें आई और उसे तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा. पुलिस ने इस घटना को गंभीर सुरक्षा चूक माना और संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि जेल में हमला करने वाले दोषियों की सजा क्या बढ़ जाती है और इन पर किन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाता है. 

कैसे हुआ हमला?

पुलिस के अनुसार, आतंकी डॉ. अहमद सईद को उसके दो साथियों के साथ एटीएस ने एक दिन पहले ही गिरफ्तार कर साबरमती जेल लाया था. उसे हाई सिक्योरिटी वाले ब्लॉक में रखा गया था. अहमद सईद पर हत्या के आरोप में सजा काट रहे दो कैदियों और पोस्को अधिनियम के तहत एक अन्य आरोपी ने हमला किया और उसकी आंखों के पास चोट पहुंचाई. हमले से पहले सईद की उस विंग में बंद दो अन्य आतंकियों के साथ बहस हुई थी. वहीं पुलिस ने हमलावर कैदियों की पहचान अनिल कुमार, शिवम शर्मा और अंकित लोधी के रूप में की है. 

किन धाराओं में दर्ज होता है जेल में हमला? 

जेल में हमला करना या किसी  कैदी को चोट पहुंचाना गंभीर अपराध माना जाता है. इस तरह की घटनाओं में आमतौर पर कई धाराएं लागू होती है. जिनके अनुसार हमला करने वाले कैदियों की सजा भी बढ़ाई जा सकती है और उन पर अलग से जुर्माना भी लगाया जा सकता है. 

धारा 131- Assault या Criminal Force

बीएनस की धारा 131 ऐसे मामलों पर लागू होती है जब जेल में कोई व्यक्ति बिना किसी गंभीर और अचानक उकसावे के किसी पर हमला कर देता है या उसे पर जोर जबरदस्ती करता है. इन धाराओं के तहत 3 महीने की कैद या 1000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा दी जा सकती है. 

धारा 115- Voluntarily Causing Hurt

जेल के अंदर मारपीट के मामलों में बीएनस की धारा 115 भी लागू होती है. इस धारा के तहत कोई भी व्यक्ति अगर जानबूझकर यह जानते हुए कि उसके कारण से सामने वाले को चोट लग सकती है हमला करता है और चोट पहुंचाता हैं तो उसे पर एक साल तक की कैद या 10 हजार तक का जुर्माना या फिर दोनों लगाई जा सकती है. यह धारा सामान्य चोट पहुंचाने की स्थिति में लगाई जाती है. 

धारा 117- Voluntarily Causing Grievous Hurt

अगर मामला गंभीर चोट का हो तो ऐसे मामलों में बीएनस की धारा 117 लागू होती है. यह धारा कहती है कि अगर आरोपी जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाता है और पीड़ित को गंभीर नुकसान हो जाता है तो उसे 7 साल की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है. वहीं अगर चोट इतनी गंभीर हो कि पीड़ित स्थाई विकलांगता का शिकार हो जाए या पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट में चला जाए तो आरोपी को न्यूनतम 10 साल से लेकर उम्रकैद की सजा भी हो सकती है. 

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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