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मिलिट्री ड्रोन और आम ड्रोन में क्या होता है अंतर? जानें कौन कितनी देर तक उड़ सकता है

ड्रोन अब सिर्फ निगरानी का नहीं बल्कि युद्ध का सबसे सटीक और भरोसेमंद हथियार बन गया है. मिलिट्री ड्रोन जहां लंबी दूरी तक हमला कर सकते हैं, वहीं आम ड्रोन सिर्फ सीमित कार्यों के लिए काम आते हैं.

दुनिया एक बार फिर से युद्ध जैसे हालात की तरफ बढ़ रही है. इजरायल और ईरान एक बार फिर आमने सामने हैं. इजरायल ने कई मिसाइलों और ड्रोन से ईरान की मिलिट्री और न्यूक्लियर साइट्स को निशाना बनाया है. वहीं कुछ समय पहले भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान भी पाकिस्तान लगातार भारत पर ड्रोन से हमले कर रहा था, लेकिन भारत ने पाकिस्तान के सभी ड्रोन को नष्ट कर दिया था. इनके अलावा यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध में ड्रोन को निर्णायक हथियार के रूप में देखा गया.

ड्रोन सिर्फ निगरानी ही नहीं बल्कि युद्ध में भी सटीक हथियार

जिस तरह से दुनियाभर के तनाव माहौल में युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे यह तो साफ हो गया है कि ड्रोन अब सिर्फ निगरानी या कैमरे का डिवाइस नहीं बचा है बल्कि यह युद्ध के समय दुनिया में सबसे भरोसेमंद, सटीक और खतरनाक हथियार बन चुका है. ड्रोन अब एक ऐसा हथियार बन गया है जो बिना पायलट के दुश्मन के इलाके में घुसकर लक्ष्य को नष्ट कर सकता है. शायद यही वजह है कि दुनियाभर की सेनाएं अब ड्रोन टेक्नोलॉजी पर निवेश कर रही हैं.

क्या होता है ड्रोन का फर्क

जिस तरह से दुनिया भर की सेनाएं ड्रोन का इस्तेमाल कर रही हैं, वैसे ही अब सवाल यह भी उठने लगे हैं कि आखिर मिलिट्री ड्रोन कितनी दूरी तक जा सकते हैं साथ ही आम ड्रोन और मिलिट्री ड्रोन में क्या फर्क होता है.

ये है मिलिट्री ड्रोन की ताकत

मिलिट्री ड्रोन आमतौर पर काफी लंबी दूरी और समय तक उड़ान भर सकते हैं. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका का MQ-9 Reaper ड्रोन लगभग 1,850 किलोमीटर तक उड़ सकता है. वहीं इसे सैटेलाइट से कंट्रोल भी किया जा सकता है. अगर बात की जाए मिलिट्री ड्रोन के उड़ान भरने की तो RQ-4 Global Hawk जैसे ड्रोन लगातार 32 घंटों तक उड़ सकते हैं.

मिलिट्री ड्रोन की तुलना में काफी कमजोर होते हैं आम ड्रोन

जिस तरह से मिलिट्री ड्रोन युद्ध के दौरान और जासूसी जैसे मामलों में साथ ही उड़ान भरने में काफी सक्षम होते हैं वैसे ही आम ड्रोन इन सभी मामलों में मिलिट्री ड्रॉन के एकदम विपरीत होता है. आम ड्रोन जिसे कमर्शियल ड्रोन भी कहा जा सकता है, यह फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और खेती के लिए कामों में इस्तेमाल किया जाता है.

आम ड्रोन ज्यादा लंबे समय और दूरी तक भी नहीं उड़ सकता है. कमर्शियल ड्रोन की रफ्तार 50 मील प्रति घंटे से ज्यादा नहीं होती है. वहीं कमर्शियल ड्रोन का मकसद स्थिरता बनाए रखना और इसे सही प्रकार से कंट्रोल करना होता है न कि स्पीड बढ़ाना या लंबी दूरी तय करना होता है. कमर्शियल ड्रोन आमतौर पर 20 से 50 किलोमीटर की दूरी ही तय कर सकते हैं वहीं यह मिलिट्री ड्रोन से वजन में भी काफी हल्के होते हैं.

टेक्नोलॉजी और डिजाइन में भी बड़ा फर्क

मिलिट्री ड्रोन आमतौर पर हाई टेक चीजों से बने होते हैं. इनमें अक्सर स्टील्थ टेक्नोलॉजी होती है, जिससे यह रडार में भी नहीं पकड़े जाते हैं, इनका कैमरा और सेंसर भी काफी भारी होता है. वहीं आम ड्रोन हल्के होते हैं और रोजाना के कामों जैसे फसल की निगरानी, वीडियो शूट या डिलीवरी के लिए बनाए जाते हैं.

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