एक्सप्लोरर

Hanging and Crucifixion: फांसी और सूली में क्या होता है फर्क, क्यों दोनों एक-दूसरे से अलग?

फांसी और सूली दोनों एक दूसरे से अलग-अलग शब्द है. इन दोनों का ही उद्देश्य दोषी को मृत्यु दंड देना होता है, लेकिन सजा देने का तरीका, मौत की प्रक्रिया और इनका इतिहास एक दूसरे से बहुत अलग है.

Hanging and Crucifixion: कानूनी मामलों में मौत की सजा का जिक्र आते ही अक्सर फांसी और सूली जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं. ज्यादातर लोग इन दोनों ही शब्दों को एक ही मान लेते हैं, लेकिन सच यह है कि फांसी और सूली दोनों एक दूसरे से अलग-अलग शब्द है. इन दोनों का ही उद्देश्य दोषी को मृत्यु दंड देना होता है, लेकिन सजा देने का तरीका, मौत की प्रक्रिया और इनका इतिहास एक दूसरे से बहुत अलग है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि फांसी और सूली में क्या फर्क होता है और यह दोनों एक दूसरे से क्यों अलग है.

क्या होती है फांसी? 

फांसी मृत्यु दंड देने का वह तरीका है, जिसमें दोषी व्यक्ति के गले में रस्सी का फंदा डालकर उसे लटकाया जाता है. इसके लिए पहले व्यक्ति को एक तख्त पर खड़ा किया जाता है और फिर तय समय पर तख्त हटा दिया जाता है. फंदे के झटके से गर्दन की हड्डी और गले की नसों पर असर पड़ता है, जिससे कुछ ही समय में व्यक्ति की मौत हो जाती है. वहीं आज के समय न्यायिक व्यवस्था में यह तरीका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. फांसी का उद्देश्य मृत्यु दंड को कम समय में पूरा करना माना जाता है और यही वजह है कि कई देशों में इसे कानूनी मान्यता मिली है. 

क्या होती है सूली? 

सूली प्राचीन समय की बहुत कठोर और दर्दनाक दंड प्रणाली है. इसमें अपराधी को किसी लकड़ी के बड़े ढांचे, खंबे या क्रॉस पर बांध दिया जाता है या फिर कीलों से ठोक दिया जाता था. कुछ स्थानों पर नुकीले खंभे पर बैठाकर भी मृत्यु दंड दिया जाता था. इस प्रक्रिया में मौत तुरंत नहीं होती, कई बार व्यक्ति घंटों या कई दिनों तक दर्द सहता रहता था. ज्यादा खून बहने, प्यास, थकान और सांस लेने में कठिनाई के कारण उसकी मृत्यु हो जाती थी. इतिहासकारों के अनुसार सूली पर चढ़ाने की प्रथा पारसी साम्राज्य से शुरू हुई और बाद में मिश्र कार्थेज तथा रोमन साम्राज्य में भी इसका इस्तेमाल किया गया. 

फांसी और सूली में क्या है बड़ा अंतर? 

फांसी और सूली दोनों मृत्युदंड के तरीके हैं, लेकिन दोनों का तरीका बहुत अलग होता है. फांसी में रस्सी के फंदे की मदद से व्यक्ति को लटकाया जाता है और मौत कुछ ही सेकंड में हो जाती है, वहीं सूली में व्यक्ति को लकड़ी के ढांचे पर बांधकर कीलों से ठोककर लंबे समय तक लटकाया जाता है. जिससे व्यक्ति की मौत धीरे-धीरे और ज्यादा तड़प-तड़प कर होती है. फांसी में मौत का मुख्य कारण गर्दन की हड्डी टूटना, नसों पर दबाव पड़ना या सांस रूकना होता है, जबकि सूली में मौत कई शारीरिक कारणों के प्रभाव से होती है. 

ये भी पढ़ें-Ranga Billa Case: कौन थे रंगा-बिल्ला, जिन पर बनी वेब सीरीज राख सुर्खियों में छाई?

क्या आज भी कहीं दी जाती है सूली?

आधुनिक कानून व्यवस्था में सूली को मान्यता प्राप्त नहीं है, इसे मानवाधिकारों के विरुद्ध और बहुत क्रूर सजा माना जाता है. यही कारण है कि दुनिया के अधिकांश देशों में यह व्यवस्था खत्म हो चुकी है. वहीं इसके उलट जिन देशों में आज भी मृत्यु दंड का प्रावधान है, वहां सजा के लिए फांसी का भी उपयोग किया जाता है.

ये भी पढ़ें-Rani Lakshmibai Balidan Divas: घूंघट छोड़ थाम लिए हथियार, जानें बुरे वक्त में कैसे रानी लक्ष्मीबाई ने अकेले खड़ी की थी महिला दुर्गा दल सेना

कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

दो देशों की सेनाएं साथ युद्धाभ्यास क्यों करती हैं, इसका खर्च कौन उठाता है?
दो देशों की सेनाएं साथ युद्धाभ्यास क्यों करती हैं, इसका खर्च कौन उठाता है?
अमेरिकी राष्ट्रपति को कितनी छुट्टियां मिलती हैं, भारत में प्रधानमंत्री के लिए क्या रूल?
अमेरिकी राष्ट्रपति को कितनी छुट्टियां मिलती हैं, भारत में प्रधानमंत्री के लिए क्या रूल?
रूस की संसद में कितनी सीटें, यहां कैसे होता है चुनाव?
रूस की संसद में कितनी सीटें, यहां कैसे होता है चुनाव?
सैटेलाइट जमीन पर क्यों नहीं गिरती, हवा में कैसे टंगी रहती है?
सैटेलाइट जमीन पर क्यों नहीं गिरती, हवा में कैसे टंगी रहती है?

वीडियोज

27 के चुनाव से पहले यूपी में महाभारत!
Tu Hi Re Dil Mein:😱Sanjay-Swati का बेपनाह प्यार! Swati के इश्क में सब भूल बैठा शादीशुदा Sanjay! #sbs
Bollywood News: रिलीज से पहले विवादों में घिरी फिल्म ‘वन’, गाने पर लगा चोरी का आरोप (21.09.26)
Sansani: कैमरे में कैद गुस्से की डरावनी पिक्चर | Gurugram | ABP News
Mumbai BMW Accident: तेज रफ्तार...बेकाबू हुई BMW कार | Ground Report | Breaking News | Maharashtra

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
राम मंदिर चढ़ावा: CCTV में कैद चोरी की 105 घटनाएं, SIT को SC से चार्जशीट फाइल की इजाजत
राम मंदिर चढ़ावा: CCTV में कैद चोरी की 105 घटनाएं, SIT को SC से चार्जशीट फाइल की इजाजत
राजस्थान निकाय अध्यक्ष रिजल्ट पर रांका बोले, 'मुझे लगता है कि देश में...'
राजस्थान निकाय अध्यक्ष रिजल्ट पर रांका बोले, 'मुझे लगता है कि देश में...'
Jio Hotstar का धमाका, नहीं होगी एंटरटेनमेंट की कमी, रिलीज हुईं साउथ-बॉलीवुड की 12 फिल्में
जियो हॉटस्टार का धमाका, नहीं होगी एंटरटेनमेंट की कमी, रिलीज हुईं साउथ-बॉलीवुड की 12 फिल्में
जापान के खिलाफ टी20 पर बोले श्रेयस अय्यर, 'कभी नहीं सोचा था कि...'
जापान के खिलाफ टी20 पर बोले श्रेयस अय्यर, 'कभी नहीं सोचा था कि...'
जमुई घटना पर भड़कीं ममता बनर्जी, कहा - ' अगर सच कहूं तो...'
जमुई घटना पर भड़कीं ममता बनर्जी, कहा - ' अगर सच कहूं तो...'
बंगाल उपचुनाव से पहले ममता बनर्जी की TMC का लोगो जारी, सामने आई फोटो
बंगाल उपचुनाव से पहले ममता बनर्जी की TMC का लोगो जारी, सामने आई फोटो
पाकिस्तान की अनपढ़ पुलिस, विदेशी टूरिस्ट की अंग्रेजी नहीं समझ पाए अधिकारी
पाकिस्तान की अनपढ़ पुलिस, विदेशी टूरिस्ट की अंग्रेजी नहीं समझ पाए अधिकारी
घर में कैसे बनाएं बाजार जैसी मोमोज की लाल चटनी? देखें रेसिपी
घर में कैसे बनाएं बाजार जैसी मोमोज की लाल चटनी? देखें रेसिपी
Embed widget