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Dharmendra Pradhan Resignation: इस्तीफे के बाद मंत्री को कितनी मिलती है पेंशन, जानें नियम

Dharmendra Pradhan Resignation: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या इस्तीफे के बाद उन्हें पेंशन मिलती रहेगी.

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  • केंद्रीय मंत्री का पद छोड़ने पर सभी आधिकारिक सुविधाएं समाप्त।
  • मंत्री को इस्तीफे से पेंशन नहीं; सांसद का वेतन जारी।
  • पूर्व सांसदों को न्यूनतम ₹31,000 मासिक पेंशन मिलती है।

Dharmendra Pradhan Resignation: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने एक बार फिर से भारत में मंत्रियों के वेतन, लाभ और पेंशन को कंट्रोल करने वाले नियमों पर ध्यान आकर्षित किया है. जब एक मंत्री पद छोड़ने के बाद कई आधिकारिक विशेषाधिकार त्याग देता है, मंत्री परिषद से इस्तीफा देने से वह अपने आप पेंशन के लिए पात्र नहीं हो जाता.  पात्रता इस बात पर निर्भर होती है कि व्यक्ति संसद सदस्य के रूप में काम करना जारी रखता है या फिर नहीं. इसी के साथ संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते पर पेंशन अधिनियम के प्रावधान पर भी पात्रता निर्भर होती है.

इस्तीफे के बाद वेतन और भत्ते 

एक बार जब किसी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा मंजूर हो जाता है तो मंत्री पद से जुड़े सभी फायदे खत्म हो जाते हैं. इसमें मंत्री का मूल वेतन, आधिकारिक भत्ता, सरकारी वाहन, कर्मचारी और मंत्री पद की वजह से मिलने वाली दूसरी सुविधाएं भी शामिल हैं. 

पूर्व मंत्री को कार्यकाल के दौरान आवंटित आधिकारिक सरकारी आवास भी खाली करना होगा. मौजूदा नियम के तहत बंगला आमतौर पर निर्धारित समय के अंदर खाली करना होता है. आमतौर पर कार्यालय छोड़ने के लगभग 1 महीने बाद. 

इस्तीफा देने वाले मंत्री की पेंशन 

किसी भी मंत्री को सिर्फ इस वजह से पेंशन नहीं मिलती क्योंकि उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है. अगर व्यक्ति संसद सदस्य के रूप में काम करना जारी रखता है तो वह पेंशन के बजाय सांसदों को मिलने वाले वेतन और भत्ते का हकदार बना रहता है. संसदीय नियमों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद का वेतन और पूर्व सांसद की पेंशन नहीं प्राप्त कर सकता. 

मंत्री पद से इस्तीफे के बाद भी जारी है सांसद का वेतन 

हालांकि मंत्री पद खत्म हो जाता है, निर्वाचित संसद के रूप में व्यक्ति की स्थिति तब तक बिना किसी बदलाव की रहती है जब तक कि वह संसद से इस्तीफा नहीं दे देता या फिर उसका कार्यकाल समाप्त नहीं हो जाता. व्यक्ति को संसद सदस्यों को मिलने वाला वेतन, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और दूसरे फायदे मिलते रहते हैं. 

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कब मिलती है पेंशन? 

कोई पूर्व मंत्री संसद सदस्य ना रहने के बाद ही पेंशन का पात्र बनता है. संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन अधिनियम के तहत पूर्व सांसदों को न्यूनतम मासिक पेंशन ₹31,000 मिलती है. इसके अलावा प्रारंभिक 5 साल की अवधि के बाद संसदीय सेवा के हर अतिरिक्त साल के लिए पेंशन ₹2500 प्रति माह बढ़ जाती है. 

पूर्व सांसदों को आजीवन फायदा 

मासिक पेंशन के अलावा पूर्व संसद सदस्य सेवानिवृत्ति के बाद की कुछ सुविधाओं के लिए पात्र रहते हैं. इनमें केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना के तहत चिकित्सा उपचार और लागू नियम के अधीन भारतीय रेलवे पर  प्रथम श्रेणी एसी में मुफ्त यात्रा शामिल है.

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स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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