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Indian Army Training: एक सैनिक की ट्रेनिंग पर कितना खर्च करती है इंडियन आर्मी?

Indian Army Training: भारतीय सेना में एक सिपाही से लेकर बड़े अधिकारी को तैयार करने पर लाखों से करोड़ों रुपये का बजट खर्च होता है. चलिए जानें कि वित्तीय बजट कहां-कहां खर्चा होता है.

Indian Army Training: देश की सुरक्षा के लिए सीमा पर तैनात होने वाले जवान सेना की रीढ़ की हड्डी होते हैं. वे सीमा पर डटे रहते हैं और देश के लोगों की सुरक्षा करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि एक आम युवा को देश का वीर रक्षक बनाने के पीछे कितना बजट खर्चा होता है? देश सेवा का यह सफर सिर्फ कड़ी मेहनत नहीं, बल्कि इसके पीछे भारी वित्तीय निवेश भी छिपा रहता है. चलिए इसके बारे में विस्तार से समझें.

अग्निवीर योजना का खर्चा

कुछ सालों पहले शुरू की गई अग्निवीर योजना के तहत चुने जाने वाले देश के अग्निवीरों को छह महीने की खास और तेज रफ्तार वाली ट्रेनिंग दी जाती है. इस कम अवधि की ट्रेनिंग के दौरान बुनियादी सुविधाओं, रहने-खाने और ट्रेनिंग सामग्री पर प्रति जवान होने वाला खर्चा परंपरागत सिपाहियों से कम बैठता है. हालांकि इस छह महीने की तैयारी के दौरान हर अग्निवीर को सरकार की तरफ से 30,000 रुपये प्रति महीने का तय भत्ता दिया जाता है, जो उनकी बुनियादी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए भी होता है.

सामान्य जवानों की ट्रेनिंग पर होने वाला खर्चा

अगर बात परंपरागत तरीके से भर्ती होने वाले सिपाहियों की करें तो, उनकी शुरुआती ट्रेनिंग लगभग नौ महीने तक चलती है. इस बुनियादी नौ महीने की ट्रेनिंग पर रहने, भोजन और प्रशिक्षण के मद में सीधे तौर पर करीब 3.2 लाख से 3.8 लाख रुपये का खर्चा आता है. लेकिन सेना के एक जवान का सफर यहीं खत्म नहीं होता है. 17 साल की पूरी सेवा के दौरान दिए जाने वाले लगातार एडवांस अभ्यास, आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल, मेडिकल, वेतन और अन्य भत्तों को जोड़ें तो एक जवान पर जीवनभर करीब 11.5 करोड़ रुपये का खर्चा आता है.

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IMA, OTA या SSC में प्रशिक्षण का खर्चा

भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) या अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (OTA) में चुने गए अफसरों की तैयारी पर सबसे ज्यादा बजट खर्च किया जाता है. शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत आने वाले एक अधिकारी की शुरुआती 10 से 14 साल की सेवा और प्री-कमीशनिंग ट्रेनिंग पर सरकार करीब 5 करोड़ से लेकर 6.8 करोड़ रुपये तक की मोटी रकम लगाती है. अधिकारियों की ट्रेनिंग का दायरा बहुत बड़ा होता है, जिसमें लीडरशिप स्किल, हाई-टेक सैन्य तकनीक और भारी मात्रा में गोला-बारूद का इस्तेमाल शामिल होता है.

प्रशिक्षण खर्चे में क्या-क्या होता है शामिल?

सेना के लिए इस भारी-भरकम बजट का इस्तेमाल कई अलग-अलग मदों में होता है. इसमें केवल जवान का खाना या कपड़े ही शामिल नहीं होते हैं, बल्कि सैन्य अकादमियों का रखरखाव, उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं, अभ्यास के दौरान इस्तेमाल होने वाला ईंधन और गोला-बारूद शामिल होते हैं. इसके अलावा, रंगरूटों को ट्रेनिंग देने वाले अनुभवी कोचों और सैन्य इंस्ट्रक्टर्स का वेतन भी इसी पूरे ट्रेनिंग बजट का हिस्सा होता है, जो हर एक कैडेट को जंग के मैदान के लिए पूरी तरह तैयार बनाता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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