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टेक से लेकर फूड तक, जानें अमेरिका के सामने कहां टिकती हैं रूस और चीन की कंपनियां?

रूस-चीन गठबंधन चर्चा में आ गया है. अब जब अमेरिका ने चीन और रूस  पर अलग-अलग दबाव बनाना शुरू किया है तो  इन देशों के साथ आने की संभावना बढ़ती दिख रही है.

पिछले कुछ सालों में वैश्विक राजनीति और व्यापार की दिशा तेजी से बदली है. अमेरिका, जो दशकों से दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक और राजनीतिक ताकत रहा, अब उसे कई मोर्चों पर चुनौतियां झेलनी पड़ रही हैं. ये चुनौतियां ट्रेड वॉर के रूप में सामने आ रही हैं. खासकर रूस और चीन जैसे देश अब अमेरिका को आर्थिक और कूटनीतिक रूप से चुनौती दे रहे हैं. 

अब जब अमेरिका ने चीन और रूस पर अलग-अलग दबाव बनाना शुरू किया है तो इन देशों के साथ आने की संभावना बढ़ती दिख रही है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या ये देश वाकई मिलकर अमेरिका को आर्थिक, राजनीतिक और तकनीकी मोर्चे पर चुनौती दे सकते हैं. खासकर टेक्नोलॉजी और फूड इंडस्ट्री जैसे क्षेत्रों में क्या हो सकता है. तो आइए जानते हैं कि टेक से लेकर फूड तक अमेरिका के सामने रूस और चीन की कंपनियां कहां टिकती हैं. 

रूस और चीन का गठबंधन

साल 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो पश्चिमी देशों ने उस पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए. ऐसे में रूस को एक ऐसे साथी की जरूरत थी जो उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी स्थिति को मजबूत बनाए रहे. यही वह समय था जब चीन रूस का सबसे भरोसेमंद व्यापारिक साथी बनकर सामने आया. चीन न सिर्फ रूस से बड़ी मात्रा में तेल, गैस और कोयला खरीद रहा है, बल्कि अब रूस के फूड प्रोडक्ट्स की चीन में मांग भी तेजी से बढ़ी है. चीन में अब ऐसे पॉप-अप स्टोर्स खुलने लगे हैं जो खासतौर पर रूसी सामान बेचते हैं, जैसे चॉकलेट, कुकीज़, वोदका, और शहद. ये स्टोर्स बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक फैलते जा रहे हैं. 2022 के बाद से चीन में 2,500 से  ज्यादा नई कंपनियां सिर्फ रूसी प्रोडक्ट बेचने के लिए रजिस्टर्ड हुई हैं. इनमें से ज्यादातर आज भी एक्टिव हैं. इस तरह, रूसी प्रोडक्ट चीन में एक ब्रांड बन चुके हैं, Made in Russia नाम से, इसने आम चीनी नागरिकों के मन में रूस के प्रति एक पॉजिटिव इंपैक्ट भी पैदा की है. 

टेक्नोलॉजी के सेक्टर में रूस और चीन की कंपनियां

टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर अमेरिका अभी भी दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है. Apple, Google, Microsoft, Amazon जैसे दिग्गज कंपनियों का मुकाबला कोई भी देश सीधे तौर पर नहीं कर पाया है. हालांकि, चीन इस क्षेत्र में सबसे तेजी से उभरता हुआ देश है. Huawei, Xiaomi, Tencent, Alibaba जैसी कंपनियों ने दुनियाभर में अपनी पहचान बनाई है. AI (Artificial Intelligence), 5G टेक्नोलॉजी, और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के क्षेत्र में चीन ने अमेरिका को टक्कर देना शुरू कर दिया है. रूस टेक्नोलॉजी में उतना मजबूत नहीं है, लेकिन साइबर सिक्योरिटी और सैन्य टेक्नोलॉजी में उसकी मजबूत पकड़ है. रूस और चीन मिलकर अगर डिजिटल करेंसी या अमेरिकी डॉलर का ऑप्शन लाने की कोशिश करते हैं, तो यह अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है. वहीं ट्रंप पहले ही BRICS देशों को चेतावनी दे चुके हैं कि अगर वे डॉलर का ऑप्शन लाने की साजिश करते हैं, तो 100 प्रतिशत टैरिफ झेलना पड़ेगा. 

फूड इंडस्ट्री और लोकल मार्केट में अमेरिका के सामने रूस और चीन

अमेरिकी कंपनियां जैसे Coca-Cola, Pepsi, McDonald’s, और KFC दुनियाभर में फेमस रही हैं. अब चीन में रूसी ब्रांड इनकी जगह लेने की कोशिश कर रहे हैं. चॉकलेट, कुकीज, आइसक्रीम और शहद जैसे प्रोडक्ट्स में रूसी टेस्ट ने चीन में धूम मचाई है. चीनी युवाओं में रूसी आइटम्स के प्रति अट्रैक्ट एक ट्रेंड बन चुका है. हालांकि कुछ स्टोर्स में ऐसे मामले भी सामने आए जहां रूसी कहे जाने वाले प्रोडक्ट्स असल में चीन में ही बनाए गए थे, लेकिन इसका असर कुल मिलाकर पॉजिटिव ही रहा है. ऐसे में रूस और चीन मिलकर अमेरिका को कुछ क्षेत्रों में चुनौती जरूर दे सकते हैं.  खासकर ऊर्जा व्यापार, टेक्नोलॉजी और फूड मार्केट. लेकिन अमेरिका की वैश्विक सैन्य ताकत, डॉलर की पकड़, और वैश्विक ब्रांड वैल्यू अब भी कहीं आगे है. 

यह भी पढ़ें : रूस के कौन-कौन से शहर यूरोप में आते हैं और कौन-से एशिया में? देख लें पूरी लिस्ट

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