दिल्ली के 16 मेट्रो स्टेशन अगले आदेश तक बंद, जानिए इससे DMRC को कितना होगा नुकसान?
बीते दिनों जंतर-मंतर और संसद के बाहर सीजेपी के कार्यकर्ताओं का उग्र प्रदर्शन देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने अपने 16 प्रमुख स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया है. चलिए जानें इससे उनका कितना नुकसान.

दिल्ली में चल रहे सीजेपी के उग्र विरोध प्रदर्शन और बीते 20 जुलाई को हुए हंगामे को देखते हुए DMRC ने सुरक्षा के लिहाज से बड़ा फैसला लिया है. जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के आसपास सोमवार और मंगलवार की रात हुए भारी बवाल के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली के 16 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिया गया है. संसद भवन और आसपास के संवेदनशील इलाकों में उपद्रव की आशंका को टालने के लिए पुलिस प्रशासन के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है. अचानक लिए गए इस फैसले से यात्रियों की दैनिक आवाजाही प्रभावित हुई है और इससे दिल्ली मेट्रो को होने वाले नुकसान को लेकर भी मंथन शुरू हो गया है. चलिए जानें कि उनको कितना नुकसान होगा.
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए DMRC का फैसला
प्रदर्शनकारियों की भीड़ को संसद और कनॉट प्लेस के आसपास जमा होने से रोकने के लिए दिल्ली मेट्रो प्रशासन ने शहर के 16 अति-संवेदनशील स्टेशनों के प्रवेश और निकासी द्वार पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं. हालांकि राजीव चौक और मंडी हाउस जैसे प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों पर ट्रेनों को बदलने की सुविधा जारी रखी गई है. ताकि यात्रियों को कनेक्टिंग लाइन पकड़ने के लिए कोई दिक्कत न हो. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि उपद्रवियों की आवाजाही को सीमित करने के लिए मेट्रो सेवाओं पर यह आंशिक प्रतिबंध लगाना अनिवार्य हो गया था.
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DMRC की दैनिक कमाई और उसका नुकसान
स्टेशनों के बंद होने के बाद यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि इस कदम के बाद दिल्ली मेट्रो को कितना नुकसान झेलना पड़ेगा. आंकड़ों की मानें तो DMRC की रोजाना की कुल कमाई लगभग 10 करोड़ रुपये से ज्यादा होती है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि पूरे नेटवर्क के मुकाबले सिर्फ 16 स्टेशनों के बंद होने से दिल्ली मेट्रो के कुल दैनिक राजस्व पर कोई बहुत बड़ा सा विनाशकारी असर नहीं देखने को मिलेगा. यह नुकसान बेहद मामूली या आंशिक ही माना जा रहा है, क्योंकि अधिकांश यात्री पूरी तरह से सफर रद्द करने की बजाय निकटतम खुले स्टेशनों या अन्य मार्गों से ही अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं.
परिचालन और लॉजिस्टिक की चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम में दिल्ली मेट्रो कॉर्पोरेशन के लिए मुख्य चुनौती वित्तीय घाटे से ज्यादा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की है. स्टेशनों को अचानक बंद करने और फिर यात्रियों को दूसरे रास्तों की तरफ मोड़ने में भारी मैनेजमेंट की जरूरत पड़ रही है. आर्थिक दृष्टि से नुकसान भले ही उतना ज्यादा न हो रहा हो, जितनी कल्पना की जा रही है, लेकिन नेटवर्क में यात्रियों का संतुलनबनाकर रखना और मेट्रो स्टेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करना दिल्ली मेट्रो के लिए इस वक्त बड़ा काम बन गया है, जो कि स्थिति सामान्य होने तक जारी रहेगा.
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