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China Protests : चीन में तानाशाही तो फिर वहां कैसे होते हैं सरकार के खिलाफ प्रदर्शन?

China Protests : दुनिया में चीन को एक ऐसी ताकत के रूप में देखा जाता है, जहां कम्युनिस्ट पार्टी का शासन है और सरकार का प्रशासनिक कंट्रोल सबसे मजबूत माना जाता है.

China Protests : दिल्ली और झारखंड में हाल के छात्र प्रदर्शनों के बाद एक बार फिर सरकार के खिलाफ होने वाले आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को लेकर चर्चा तेज हो गई है. ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन देशों में सरकार के खिलाफ सख्ती मानी जाती है, वहां आखिर विरोध प्रदर्शन कैसे होते हैं.  ऐसा में चीन को लेकर अक्सर सबसे ज्यादा सवाल पूछे जाते हैं. दुनिया में चीन को एक ऐसी ताकत के रूप में देखा जाता है, जहां कम्युनिस्ट पार्टी का शासन है और सरकार का प्रशासनिक कंट्रोल सबसे मजबूत माना जाता है. इसके बाद भी समय-समय पर वहां सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन भी देखने को मिलते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि चीन में तानाशाही तो फिर वहां सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कैसे होते हैं.

1949 में बना कम्युनिस्ट देश

साल 1949 में माओ जेदोंग के नेतृत्व में चीन में कम्युनिस्ट शासन की स्थापना हुई और देश का आधिकारिक नाम पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना रखा गया. इसके बाद फैक्ट्रियों, कारोबार और जमीन जैसी कई चीजों पर सरकार का कंट्रोल हो गया. निजी स्वामित्व की व्यवस्था खत्म कर दी गई और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CCP) ने शासन की पूरी जिम्मेदारी संभाल ली. उस समय माओ का मानना था कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत प्रगति दूसरों के नुकसान की कीमत पर नहीं होनी चाहिए. 

माओ के बाद क्या बदला?

माओ जेदोंग के निधन के बाद चीन ने उनकी नीतियों से कुछ दूरी बनाई, लेकिन देश में कम्युनिस्ट पार्टी का प्रभाव आज भी कायम है. वर्तमान में भी चीन में कम्युनिस्ट पार्टी ही सर्वोच्च राजनीतिक शक्ति मानी जाती है और देश की राजनीतिक व्यवस्था उसी के नेतृत्व में चलती है. 

चीन में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कैसे होते हैं?

चीन में समय-समय पर विरोध प्रदर्शन होते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में इन्हें सरकारी मीडिया में ज्यादा जगह नहीं मिलती या फिर प्रशासन इन्हें जल्दी कंट्रोल कर देता है. मार्च 2022 में शंघाई में स्थानीय पीपुल्स कांग्रेस चुनाव को लेकर लोगों ने WeChat और Weibo जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विरोध जताया था.  इसके बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जीरो-कोविड नीति के खिलाफ भी चीन के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए. इन प्रदर्शनों को प्रशासन ने जल्द ही कंट्रोल कर लिया. हालांकि, जब इसकी खबर विदेशी मीडिया तक पहुंची तो चीन के शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली. इसके कुछ समय बाद चीन ने अपनी लॉकडाउन नीति खत्म कर दी. 

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हर प्रदर्शन पर एक जैसा नहीं रहा

चीन में ऐसे प्रदर्शन जिनका उद्देश्य किसी विशेष समस्या का समाधान हो और जो सीधे कम्युनिस्ट पार्टी को चुनौती न दें, उन्हें कुछ मामलों में सफलता भी मिली है. साल 2021 में टेक कर्मचारियों ने 996 वर्क कल्चर के खिलाफ ऑनलाइन अभियान चलाया. इसके बाद चीन की सर्वोच्च अदालत ने इस कार्य व्यवस्था को अवैध घोषित कर दिया.  इसी तरह 2019 में विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा सोशल मीडिया पर चलाए गए विरोध अभियान के बाद यौन उत्पीड़न के आरोप झेल रहे दो प्रोफेसरों को उनके पद से हटा दिया गया. इसे चीन के #MeToo अभियान का जरूरी पड़ाव माना गया. 

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. फिलहाल वह एबीपी नेटवर्क के टेक सेक्शन में काम कर रही हैं, जहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने के साथ-साथ उनके लिए रिसर्च और कंटेंट तैयार करने की जिम्मेदारी संभालती हैं.

पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से इंटर्न के रूप में की. इसके बाद से वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. फीचर, टेक और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ उनकी रुचि स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में है.

मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की. वर्तमान में वह राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं.मानसी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखती हैं.

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