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विदेश में पैदा होने पर बच्चे को कहां की मिलेगी नागरिकता, जानें क्या कहता है कानून

दुनिया के कई बच्चे विदेशों में जन्म लेते है. क्या विदेश में जन्म लेने वाले हर बच्चे को वहां की नागरिकता मिल जाती है. जानिए कानून क्या कहता है.



देश के उद्योगपतियों समेत तमाम क्रिकेटर और सेलिब्रिटी अक्सर घूमने के लिए विदेश जाते हैं. इनमें से कुछ सेलिब्रिटी इलाज के अलावा बेबी प्लान के लिए भी विदेश जाना पसंद करते हैं. जैसे अभी हाल ही में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा एक बार फिर माता-पिता बने हैं. अनुष्का ने लंदन में बेटे को जन्म दिया है. बता दें कि अनुष्का ने बेटे का नाम अकाय रखा है. लेकिन आज हम आपको बताएंगे कि क्या विदेश में जन्म लेने पर बच्चे को वहां की नागरिकता मिलती है या नहीं. इसके पीछे क्या कानून है. 

बच्चे के जन्म को लेकर क्या कहता है कानून?

बता दें कि बच्‍चों की नागरिकता के मामले में पूरी दुनिया में दो नियम लागू होते हैं. पहला नियम ‘राइट ऑफ सॉइल’ होता है. वहीं दूसरा नियम ‘राइट ऑफ ब्लड’ होता है. ‘राइट ऑफ सॉइल’ के मुताबिक बच्चे का जन्म जिस देश में हुआ है, उसे वहां का नागरिक माना जाता है. वहीं  दूसरे नियम ‘राइट ऑफ ब्लड’ के तहत बच्चे के माता और पिता जिस देश के नागरिक होते हैं, उसको उसी देश का नागरिक माना जाता है. हालांकि अमेरिका समेत कई देश हैं जो राइट ऑफ सॉइल को प्राथमिकता देते हैं. ऐसे देशों में जन्‍म लेने वाले बच्‍चों को नियम के तहत वहां की नागरिकता मिल जाती है. दुनियाभर में अमेरिका समेत 30 देशों में बर्थ राइट सिटिजनशिप को माना जाता है.

विराट-अनुष्‍का के बेटे को ब्रिटिश नागरिकता ?

विराट और अनुष्का दोनों भारतीय नागरिक हैं. सामान्य तौर पर जन्म लेने वाले बच्चे को वहां की नागरिकता मिलती है, लेकिन इसके लिए भी माता-पिता में से कोई एक उस देश का नागरिक होना चाहिए. अनुष्का शर्मा और विराट कोहली सिर्फ बेहतर चिकित्सा संसाधनों के कारण बेटे को जन्म देने के लिए लंदन गए थे. इसलिए वहां जन्म के बावजूद उनके बेटे अकाय को ब्रिटेन की नागरिकता नहीं मिलेगी. हालांकि अकाय को अगर ब्रिटेन की नागरिकता चाहिए, तो उसे वहां के नियमों का पालन करना होगा.

ब्रिटेन के लिए क्या है नियम ?

ब्रिटेन में नागरिकता पाने के लिए कोई भी व्‍यक्ति लगातार पांच साल वैध वीजा पर रहने के बाद नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता था. हालांकि इसके लिए अंग्रेजी और ब्रिटेन के आम जीवन से जुड़े सामान्य ज्ञान की परीक्षा देनी पड़ती है. जानकारी के मुताबिक अब नियमों में बदलाव किया गया है, नए नियमों के मुताबिक वैध वीजा पर पांच साल रहने के बाद भी लोगों को अस्थायी नागरिकता ही दी जाती है. वहीं देश की स्थाई नागरिकता के लिए लोगों को ब्रिटेन के प्‍वाइंट सिस्‍टम से गुजरना पड़ता है. इसके तहत आवेदक को अलग-अलग मुद्दों पर अंक दिए जाते हैं. हालांकि ब्रिटिश नागरिक से शादी करने पर नागरिकता पाना आसान हो जाता है.

अमेरिका नागरिकता 

अमेरिका 19वीं सदी से ही राइट ऑफ सॉइल के तहत अपने यहां जन्मे बच्चों को अपना नागरिक मानने लगा था. कनाडा, अर्जेंटिना, बोलिविया, फिजी, ग्वाटेमाला, क्यूबा, इक्‍वाडोर और वेनेजुएला समेत कई देश अपने यहां पैदा होने वाले बच्‍चों को इसी नियम के तहत नागरिकता देते हैं. बता दें कि अमेरिका की नागरिकता पाने के लिए कम से कम पांच साल वैध स्थायी निवासी होना जरूरी है. कुछ विशेष प्रावधानों के तहत कुछ लोगों को आसानी से नागरिकता मिल जाती है. जैसे अगर आप किसी अमेरिकी से शादी करते हैं, तो नागरिकता पाना आसान हो जाता है. इसके अलावा अमेरिका में जन्मा बच्चा 21 साल का होने पर ही माता-पिता के लिए ग्रीन कार्ड का आवेदन कर सकता है. उसे साबित करना होगा कि वह आर्थिक तौर पर मजबूत है. उसके पेरेंट्स अमेरिकी लोगों पर बोझ नहीं बनेंगे. हालांकि ग्रीन कार्ड मिलने के बाद भी उसके माता-पिता नागरिकता के लिए पांच साल बाद ही आवेदन कर सकते हैं.

कनाडा 

कनाडा की नागरिकता के लिए भी वहां कम से कम पांच साल में 1,095 दिन गुजारने होते हैं. इसमें भी पांच साल में जितने दिन आप कनाडा में फिजिकली रहते हैं, उतने ही दिनों को गिना जाता है. इसके अलावा कम से कम दो साल तक स्थायी तौर पर वहां रहना जरूरी है. इसके अलावा कम से कम तीन साल तक आपको वहां टैक्स भी भरना होता है. कनाडा की नागरिकता के लिए ये भी जरूरी है कि आप पर कोई क्रिमिनल केस नहीं होना चाहिए. वहीं कनाडा के नागरिक कर्तव्यों की जानकारी, भूगोल, इतिहास और राजनीतिक ढांचे की समझ भी होना जरूरी है. इसके लिए आपकी उम्र 18 से 54 साल के बीच होनी चाहिए. इसके साथ ही अंग्रेजी या फ्रेंच भाषा की जानकारी का सर्टिफिकेट भी देना होता है.

भारत

भारत में भी जन्म के आधार पर नागरिकता दी जाती है. कानून के मुताबिक 26 जनवरी 1950 के बाद और 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्मे लोग भारतीय नागरिक कहलाएंगे. उस समय के तहत माता-पिता की नागरिकता के स्थान से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. वहीं 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे बच्‍चों के माता या पिता में कोई भी भारत का नागरिक है, तो वह भी भारतीय नागरिक होगा. इसके अलावा 3 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे बच्‍चे के माता-पिता दोनों भारतीय नागरिक हैं या कम से कम एक भारतीय नागरिक है और दूसरा अवैध प्रवासी नहीं है, तो बच्चा भारतीय नागरिक होगा. हालांकि कई देशों की नागरिकता पाने के लिए उस बच्चे के माता और पिता दोनों को उसी देश का नागरिक होना जरूरी होता है.

 

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