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Census 2027 Data: जनगणना में दी गई जानकारी कितनी गोपनीय, जो RTI के तहत भी किसी से साझा नहीं होती? जानें पूरी बात

Census 2027 Data: भारत में जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू हो गया है, जिसमें 33 सवालों के जरिए घर और परिवार का ब्योरा जुटाया जाएगा. इस दौरान आपका जो डेटा लिया जाएगा आखिर कितना सुरक्षित है.

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  • जनगणना 2027 में 33 प्रश्न पूछे जाएंगे, डेटा रहेगा गोपनीय.
  • व्यक्तिगत जनगणना डेटा RTI और अदालतों से पूरी तरह बाहर.
  • डिजिटल जनगणना डेटा सुरक्षित, डेटा सेंटर राष्ट्रीय संपत्ति घोषित.

Census 2027 Data: भारत में जनगणना 2027 का आगाज हो चुका है. जब जनगणना की जानकारी के लिए लोग आपके दरवाजे पर दस्तक देंगे, तो वे आपके परिवार और घर से जुड़े 33 महत्वपूर्ण सवाल पूछेंगे. ऐसे में हर नागरिक के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उनकी निजी जानकारी कितनी सुरक्षित है? क्या यह डेटा किसी के हाथ लग सकता है? भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायणन ने इन सभी चिंताओं पर विराम लगाते हुए डेटा की सुरक्षा को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है.

कितनी गोपनीय है आपकी दी हुई जानकरी?

जनगणना के दौरान आपसे ली गई हर जानकारी कानूनी रूप से पूरी तरह गोपनीय होती है. जनगणना आयुक्त के अनुसार, जनगणना अधिनियम की धारा 15 नागरिक के डेटा को एक अभेद्य सुरक्षा प्रदान करती है. इस कानून के तहत, व्यक्तिगत जानकारी को किसी भी स्थिति में सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है. यह सुरक्षा इतनी कड़ी है कि सरकार का कोई भी दूसरा विभाग या निजी संस्था आपके व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच नहीं बना सकती है. इसका उद्देश्य केवल देश की सांख्यिकीय स्थिति को समझना है, न कि किसी व्यक्ति की निगरानी करना.

RTI और अदालती कार्यवाही से बाहर है यह डाटा

अक्सर लोगों को डर रहता है कि कहीं उनकी जानकारी सूचना का अधिकार (RTI) के तहत कोई और न निकाल ले. लेकिन नियमों के मुताबिक, जनगणना का व्यक्तिगत डेटा RTI के दायरे से पूरी तरह बाहर है. इतना ही नहीं, आपके द्वारा दी गई जानकारी को किसी भी अदालत में सबूत या साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. चाहे किसी सरकारी योजना का लाभ लेना हो या कोई कानूनी विवाद, जनगणना के डेटा का उपयोग किसी भी व्यक्तिगत दावे की पुष्टि के लिए नहीं किया जाएगा.

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डिजिटल माध्यम और डेटा सेंटर की सुरक्षा

इस बार की जनगणना पूरी तरह आधुनिक और डिजिटल होगी. डेटा एकत्र करने के लिए मोबाइल ऐप का सहारा लिया जा रहा है, जिससे कागजी कार्रवाई की गलतियां कम होंगी. वहीं, पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक समर्पित वेब पोर्टल बनाया गया है. डेटा की सुरक्षा को लेकर सरकार कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि डेटा सेंटरों को क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर घोषित किया गया है. इसका मतलब है कि इन केंद्रों की सुरक्षा राष्ट्र की रणनीतिक संपत्तियों की तरह की जाएगी. 

जानकारी का इस्तेमाल सिर्फ डेटा कलेक्शन के लिए

आम जनता को यह समझना जरूरी है कि उनके डेटा का असल उपयोग क्या है. जनगणना आयुक्त ने साफ किया कि एकत्र की गई जानकारी का उपयोग केवल संकलन और सांख्यिकीय डेटा तैयार करने के लिए किया जाएगा. इससे यह पता लगाया जाता है कि देश की जनसंख्या कितनी है, साक्षरता दर क्या है और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति क्या है. इस सामूहिक डेटा का उपयोग देश के विकास के लिए नीतियां बनाने में होता है, लेकिन इसमें किसी खास व्यक्ति की पहचान उजागर नहीं की जाती है. 

जनगणना का एसआईआर से कोई संबंध नहीं

जनगणना के साथ-साथ अक्सर राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (NPR) को लेकर भी चर्चाएं होती रहती हैं. इस पर स्पष्टीकरण देते हुए आयुक्त ने बताया कि एनपीआर को अपडेट करने के संबंध में फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया गया है. साथ ही, उन्होंने यह भी साफ किया कि जनगणना की इस प्रक्रिया का चुनाव आयोग द्वारा किए जाने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से कोई सीधा संबंध नहीं है. यह दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं और इनका उद्देश्य भी भिन्न है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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