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Galghontu Disease: मॉनसून में दूधारू पशुओं में तेजी से फैलता है यह रोग, हो सकती है मौत 

Galghontu Disease: गलघोंटू रोग पास्चुरेला मल्टोसिडा नामक जीवाणु के कारण होता है. बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने और पशुशालाओं में गंदगी जमा होने से यह जीवाणु तेजी से फैलता है.

Galghontu Disease: गर्मियों के बाद मॉनसून का मौसम पड़ता है, जो अक्सर किसानों के लिए राहत लेकर आता है. लेकिन यह मौसम पशुपालकों के लिए कई समस्याएं भी खड़ी कर देता है. बारिश के दौरान बढ़ी हुई नमी, कीचड़ और गंदगी बैक्टीरिया व वायरस के पनपना के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है. इस वजह से इस मौसम में पशुओं में कई बैक्टीरिया बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इनमें गलघोंटू सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक मानी जाती है. डॉक्टर के अनुसार यह बीमारी गाय और भैंसों को प्रभावित करती है. वहीं समय पर इसका इलाज न मिलने से संक्रमित पशु की 24 से 48 घंटे के अंदर मौत भी हो सकती है. 

कैसे फैलता है गलघोंटू रोग? 

गलघोंटू रोग पास्चुरेला मल्टोसिडा नामक जीवाणु के कारण होता है. बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने और पशुशालाओं में गंदगी जमा होने से यह जीवाणु तेजी से फैलता है. संक्रमित पशु के संपर्क, दूषित पानी, चारा और वातावरण के माध्यम से यह बीमारी दूसरे जानवरों तक पहुंच सकती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिन पशुओं की इम्यूनिटी कमजोर होती है या जिन्हें पूरी तरह से पोषण नहीं मिलता, उनमें इस संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है. 

बीमारी होने पर क्या करें? 

यह जीवाणु पशु के शरीर में प्रवेश करता है, तो सबसे पहले श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है. इसके बाद संक्रमण तेजी से पूरे शरीर में फैलने लगता है. बीमारी बढ़ने पर पशु को तेज बुखार आता है, सांस लेने में दिक्कत होती है और गले व गर्दन के आसपास सूजन दिखाई देने लगती है. कई मामलों में पशु के मुंह और नाक से पानी निकलने लगता है. वह चार खाना छोड़ देता है और ज्यादा सुस्ती महसूस करता है. इन्फेक्शन गंभीर होने पर पशु की अचानक मौत भी हो सकती है. 

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किन पशुओं को सबसे ज्यादा खतरा? 

भैंसों में गलघोंटू रोग का सबसे ज्यादा खतरा माना जाता है. हालांकि गाय, बछड़े और दूसरे दुधारू पशु भी इसकी चपेट में आ सकते हैं. लंबे समय तक गीले और गंदे वातावरण में रहने वाले पशुओं में बीमारी फैलने की संभावना ज्यादा रहती है. 

गलघोंटू  बीमारी से बचने के लिए क्या करें?

एक्सपर्ट्स के अनुसार गलघोंटू रोग से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर टीकाकरण है. मॉनसून शुरू होने से पहले गाय और भैंसों को गलघोंटू का टीका जरूर लगवाना चाहिए. इससे संक्रमण का खतरा बहुत हद तक कम हो जाता है. इसके अलावा पशुशाला की नियमित सफाई करनी चाहिए. पशुओं के रहने की जगह पर पानी जमा नहीं होने देना चाहिए और उन्हें साफ और पौष्टिक चारा उपलब्ध कराना चाहिए. अगर किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत दूसरे पशुओं से अलग कर देना चाहिए.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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