भारत में कैसे बन सकते हैं चुनाव आयुक्त? क्या है पूरी प्रक्रिया
जानिए भारत में कैसे होती है चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, जिसमें पीएम और विपक्ष के नेता की कमेटी की सिफारिश पर राष्ट्रपति लगाते हैं मुहर और तय करते हैं देश के लोकतंत्र की कमान.

पिछले कुछ दिनों से मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच फैसलों को लेकर सामने आए मतभेदों ने इस पद को सुर्खियों में ला दिया है. सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर लगातार बहस चल रही है, जिसके बाद इस पूरे मामले को एक बड़ी संवैधानिक बेंच के पास भेज दिया गया है. ऐसे में हर नागरिक के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर देश के इतने बड़े और ताकतवर पद पर किसी व्यक्ति की नियुक्ति कैसे होती है? कौन तय करता है कि चुनाव आयुक्त कौन बनेगा?
चुनाव आयुक्त बनने के लिए सबसे पहली और अनिवार्य शर्त यह है कि उम्मीदवार भारत सरकार में सचिव स्तर के पद पर काम कर रहा हो या पहले काम कर चुका हो. यानी यह पद किसी आम नागरिक के लिए सीधे आवेदन करने वाला नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रशासनिक सेवा में लंबा अनुभव होना जरूरी है. मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 के तहत अब वरिष्ठता की पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए चुनाव आयोग के बाहर से भी योग्य अधिकारियों को इस पद के लिए चुना जा सकता है.
कौन करता है चयन?
चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए एक सर्च कमेटी बनाई जाती है, जिसकी अध्यक्षता कानून मंत्री करते हैं. यह कमेटी सचिव स्तर के योग्य अधिकारियों के नाम छांटकर एक पैनल तैयार करती है. इसके बाद यह पैनल एक चयन समिति के सामने रखा जाता है, जिसमें प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं. यह तीन सदस्यीय समिति पैनल में से किसी नाम को चुन सकती है, या चाहे तो पैनल से बाहर के किसी योग्य उम्मीदवार को भी नामित कर सकती है.
पहले क्या थी व्यवस्था?
मार्च 2023 से पहले तक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सिर्फ सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती थी, क्योंकि संविधान में इसके लिए कोई अलग कानून नहीं बनाया गया था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ मामले में फैसला सुनाते हुए निर्देश दिया कि जब तक संसद इस पर कोई नया कानून नहीं बनाती, तब तक प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश की एक कमेटी नियुक्ति की सिफारिश करेगी. हालांकि 2023 में बने नए कानून ने मुख्य न्यायाधीश की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री को शामिल कर दिया, जिसे लेकर विपक्ष और कानूनी जानकारों ने सवाल भी उठाए हैं.
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कितने साल का होता है कार्यकाल?
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति अधिकतम 6 साल के लिए की जाती है, लेकिन अगर इस दौरान वे 65 साल की उम्र पूरी कर लेते हैं, तो उन्हें पद से रिटायर होना पड़ता है, यानी दोनों में से जो भी सीमा पहले आए, वही लागू होती है.
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