POK Violence: POK में क्रूरता दिखा रहा पाकिस्तान, क्या वहां के लोगों की मदद कर सकता है भारत?
पीओके में हिंसा की चिंगारी आगामी चुनाव को लेकर भड़की है. पाकिस्तान में JAAC का विरोध मुख्य रूप से उन 45 विधानसभा सीटों में से 12 को शरणार्थियों के लिए आरक्षित करने की फैसले के खिलाफ है.

POK Violence: भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में हिंसा भड़क रही है. पीओके में हिंसा की चिंगारी 27 जुलाई को होने वाले आगामी चुनाव को लेकर भड़की है. पाकिस्तान में JAAC का विरोध मुख्य रूप से उन 45 विधानसभा सीटों में से 12 को शरणार्थियों के लिए आरक्षित करने की फैसले के खिलाफ है. इसके अलावा पाकिस्तानी प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि यहां स्थानीय लोगों की आवाज को राजनीतिक तरीके से दबाने की साजिश है. ऐसे में फिलहाल पाक अधिकृत कश्मीर यानी पीओके इस समय बारूद के ढेर पर बैठा है.
रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तानी सेना और पुलिस की अंधाधुंध गोलीबारी में अब तक 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जबकि 400 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि क्या पाकिस्तान में हो रही इस हिंसा के बीच भारत वहां के लोगों की मदद कर सकता है या नहीं?
किन चीजों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी?
पीओके में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत केवल एक मुद्दे से नहीं हुई है. बताया जा रहा है कि पीओके के स्थानीय लोग लंबे समय से बिजली की ऊंची कीमतों, महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने आरोप भी लगाया है कि पाकिस्तान सरकार उनकी आवाज दबाने का लगातार प्रयास कर रही है.
क्या भारत कर सकता है सीधे हस्तक्षेप?
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत का रुख जम्मू कश्मीर और लद्दाख को लेकर तो साफ है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भारत सीधे तौर पर पीओके में सैन्य या प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं कर सकता है. किसी भी क्षेत्र में सीधे हस्तक्षेप से दो देशों के बीच बड़े संघर्ष का कारण बन सकता है. ऐसे में बताया जा रहा है कि भारत सीधे सेना भेजने के बजाय कूटनीतिक और मानवीय कदम उठा सकता है. जैसे भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बना सकता है. मानवीय सहायता का प्रस्ताव रख सकता है. मानवाधिकारों के हनन का हवाला देते हुए पाकिस्तान पर प्रेशर बना सकता है और वहां के लोग अगर मदद मांगे तो अंतरराष्ट्रीय समर्थन से कदम उठा सकता है.
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भारत का अब तक के क्या रुख रहा?
भारत ने पीओके में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसा पर चिंता जताई है और पाकिस्तान से मानवाधिकारों का सम्मान करने की मांग की है. भारत का कहना है कि पाकिस्तान को वहां के लोगों की लोकतांत्रिक और आर्थिक मांगों को दबाने की वजह उनका समाधान करना चाहिए.
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