Birds In Space: क्या पृथ्वी की तरह अंतरिक्ष में भी उड़ सकते हैं पक्षी, जानें क्या कहता है साइंस?
Birds In Space: क्या आपने कभी सोचा है कि पक्षी अंतरिक्ष में कैसे उड़ेंगे. आइए जानते हैं कि क्या ऐसा संभव है या नहीं?

Birds In Space: अंतरिक्ष में पक्षियों के आजादी से उड़ने का विचार सुनने में काफी अच्छा लग सकता है लेकिन असल में यह संभव नहीं है. दरअसल उनकी उड़ने की क्षमता हवा और ग्रेविटी पर काफी ज्यादा निर्भर करती है. साइंस से यह पता चलता है कि पक्षी अंतरिक्ष के खुले वैक्यूम में उस तरह से नहीं उड़ सकते जैसे वह पृथ्वी पर उड़ते हैं. हालांकि अगर उन्हें किसी बंद, हवा भरे स्पेसक्राफ्ट या फिर स्पेस स्टेशन के अंदर रखा जाए तो उनकी हरकत काफी अलग और अनोखी हो सकती है.
अंतरिक्ष के वैक्यूम में उड़ना नामुमकिन है
खुले अंतरिक्ष में पक्षी नहीं उड़ सकते क्योंकि लिफ्ट पैदा करने के लिए हवा नहीं होती. पृथ्वी पर पक्षी अपने पंखों से हवा को नीचे धकेलते हैं. इससे उड़ने के लिए जरूरी ऊपर की तरफ बल पैदा होता है. वैक्यूम में पंख फड़फड़ाने से बिल्कुल भी लिफ्ट पैदा नहीं होगी. इसके अलावा अंतरिक्ष में ऑक्सीजन की कमी होती है और इस वजह से लाइफ सपोर्ट सिस्टम के बिना पक्षियों का जीवित रहना नामुमकिन हो जाता है. काफी ज्यादा तापमान और लगभग शून्य वायुमंडलीय दबाव भी उन्हें ऐसी स्थिति में रहने से रोकेगा.
स्पेस स्टेशन के अंदर हलचल
अगर पक्षियों को स्पेस स्टेशन जैसे माहौल में रखा जाए जहां पर हवा और कंट्रोल किया हुआ तापमान होता है तो वह चल फिर सकते हैं. लेकिन वैसे नहीं जैसे पृथ्वी पर चलते हैं. माइक्रो ग्रेविटी में पक्षियों को हवा में रहने के लिए ग्रेविटी से लड़ने की जरूरत नहीं होगी. इसके बजाय वे अपने पंखों का इस्तेमाल मूल रूप से खुद को आगे धकेलने और दिशा बदलने के लिए करेंगे.
जीरो ग्रेविटी में ओरिएंटेशन की चुनौती
माइक्रो ग्रेविटी वाले माहौल में किए गए प्रयोगों से ऐसा पता चला है कि पक्षियों को शुरू में ओरिएंटेशन में दिक्कत होती है. ऊपर या फिर नीचे की साफ समझ के बिना वे संतुलन खो सकते हैं और यहां तक की उल्टे भी उड़ सकते हैं.
सामान्य उड़ान में ग्रेविटी की भूमिका
ग्रेविटी इस बात में एक बड़ी भूमिका निभाती है कि पक्षी टेक ऑफ, लैंडिंग और ग्लाइडिंग को कैसे कंट्रोल करते हैं. ग्रेविटी के बिना पारंपरिक उड़ान पैटर्न गायब हो जाता है और पंखों की हरकतें लिफ्ट पैदा करने के बजे ज्यादा प्रोपल्शन का काम करती है. इस अंतर की वजह से पक्षियों के लिए अंतरिक्ष उड़ान पृथ्वी पर उनकी शानदार उड़ान से काफी अलग दिखेगी.
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Source: IOCL
























