एक्सप्लोरर

सऊदी अरब और ईरान दोनों मुस्लिम देश, फिर इनमें क्यों खिंची दुश्मनी की तलवार?

सऊदी अरब और ईरान भले ही ये दो मुस्लिम देश हैं, लेकिन इनके बीच हमेशा तलवारें खिंची रहती हैं. इनके बीच टकराव मुस्लिम नेतृत्व, क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा से जुड़ा है

ईरान पर जिस वक्त इजरायल और अमेरिका ने हमला किया, तब तक किसी को अंदाजा नहीं था कि जंग की यह शुरुआत पूरे मिडिल ईस्ट को अपनी चपेट में ले लेगी. ईरान ने जैसे ही अपने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को खोया, उसने पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया. ईरान ने सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन जैसे खाड़ी देशों पर मिसाइलों से हमले किए, जिसने पूरे मिडिल ईस्ट को जंग के दरवाजे पर खड़ा कर दिया. 

मिडिल ईस्ट पर किए गए इन ईरानी हमलों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा सऊदी अरब की हो रही है. दरअसल, ईरान और सऊदी अरब भले ही मुस्लिम देश हों, लेकिन दोनों एक दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं. अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अपने ऊपर हुए ईरानी हमलों का सऊदी अरब कैसे जवाब देता है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि मुस्लिम देश होने के बाद भी ईरान और सऊदी अरब में दुश्मनी क्यों है, क्या है इन दोनों देशों का इतिहास? 

अभी तक सऊदी अरब में क्या हुआ?

अमेरिकी नेतृत्व में ईरान पर हुए इजरायली हमले के बाद IRGC की तीखी प्रतिक्रिया से सऊदी अरब हैरान है. ईरान पर जैसे ही हमला हुआ, उसने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाना शुरू किया, इसमें सऊदी अरब में भी ठिकाने शामिल थे. धीरे-धीरे ईरान ने अपने हमलों को तेज किया और इसी बीच खबर आई कि ईरानी ड्रोन ने सऊदी अरब में दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी रास तनुरा को निशाना बनाया. सऊदी अरब ने इस हमले को नाकाम कर दिया, लेकिन इसके तुरंत बाद रिफाइनरी को अस्थाई तौर पर बंद करना पड़ा, जिसके बाद दुनिया पर बड़े तेल संकट बादल मंडराने लगे हैं. 

क्या है ईरान और सऊदी अरब का इतिहास?

सऊदी अरब और ईरान मध्य पूर्व के दो बड़े देश माने जाते हैं. दोनों ही देशों की आबादी मुस्लिम धर्म को मानने वाली है, लेकिन जब भी इन दोनों का नाम एक साथ सुनाई देता है तो आंखों के सामने युद्ध की तस्वीर उभर जाती है. ऐसा भी कहा जाता है कि मिडिल ईस्ट में शांति बनाए रखने और इसे भंग करने में ईरान और यूएई का ही हाथ होता है. दोनों देश मिडिल ईस्ट में अपना प्रभाव जमाने के लिए लंबे वक्त से संघर्ष में जूझ रहे हैं. दोनों मुस्लिम देश होने के बाद भी इनकी दुश्मनी को धार्मिक मतभेदों ने बढ़ावा दिया है . 

दरअसल ईरान में बड़ी संख्या में शिया मुस्लिम आबादी रहती है, वहीं अरब  सुन्नी बाहुल्य लोगों का देश है. इन दोनों देशों के बीच धर्म का यह बंटवारा साफ तौर पर नजर आता है. कई मुल्क ऐसे हैं जहां शिया की आबादी है तो वहीं कुछ देशों में सुन्नी लोग बहुतायत में रहते हैं. ऐसे में समर्थन और विरोध के लिए ये ईरान और सऊदी अरब का साथ देते हैं. 

मुस्लिम दुनिया में नेतृत्व की जंग

मध्य पूर्व की राजनीति में सऊदी अरब और ईरान के बीच टकराव सिर्फ दो देशों का विवाद नहीं है, बल्कि यह मुस्लिम दुनिया में नेतृत्व, प्रभाव और विचारधारा की सीधी भिड़ंत है. एक ओर राजशाही व्यवस्था वाला सऊदी अरब है, जो खुद को इस्लाम का केंद्र मानता है. दूसरी ओर 1979 की क्रांति के बाद उभरा ईरान है, जिसने धार्मिक शासन मॉडल के जरिए पूरे क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की नीति अपनाई है. 

कहां से हुई दोनों देशों में तकरार की असली शुरुआत?

1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई. इस क्रांति के नेता अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी थे. उनके नेतृत्व में ईरान में शाह की सत्ता खत्म हुई और एक धार्मिक शासन प्रणाली स्थापित की गई. इसके बाद ईरान ने खुद को सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि एक वैचारिक मॉडल के रूप में पेश किया.

सऊदी अरब पहले से ही इस्लाम के पवित्र शहरों का संरक्षक होने के कारण खुद को मुस्लिम दुनिया का स्वाभाविक नेता मानता रहा है, लेकिन ईरान की क्रांति ने इस दावे को सीधी चुनौती दी. ईरान ने शिया समुदाय के जरिए क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई, जबकि सऊदी खुद को सुन्नी नेतृत्व का केंद्र मानता है. बस यहीं से वैचारिक और सामरिक संघर्ष की नींव पड़ी.

इराक युद्ध से बदला ताकत का संतुलन

2003 में अमेरिका ने इराक पर हमला कर सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटा दिया. सद्दाम हुसैन सुन्नी थे, जबकि इराक की आबादी शिया बहुल है. उनके हटने के बाद बगदाद में शिया नेतृत्व वाली सरकार बनी और वहां ईरान का प्रभाव तेजी से बढ़ा. अब इराक, जो पहले सऊदी के लिए संतुलन का काम करता था, वो धीरे-धीरे ईरान के प्रभाव क्षेत्र में जाता नजर आने लगा. इससे सऊदी की रणनीतिक चिंता बढ़ गई और दोनों देशों के बीच अविश्वास गहराता गया.

अरब क्रांति और देशों का बढ़ता दखल

इसके बाद साल 2011 में अरब देशों में राजनीतिक उथल-पुथल शुरू हुई, जिसे अरब क्रांति कहा गया. इस अस्थिरता ने कई देशों की सरकारों को कमजोर किया. सऊदी और ईरान ने इस मौके का इस्तेमाल अपने-अपने हित मजबूत करने के लिए किया. सीरिया में ईरान ने राष्ट्रपति बशर अल-असद का खुलकर समर्थन किया. इसके विपरीत सऊदी ने विद्रोही गुटों का साथ दिया. अब इसका नतीजा यह हुआ कि सीरिया युद्ध दोनों देशों की परोक्ष जंग में बदल गया. यहां भी ईरान की रणनीति यह रही कि इराक, सीरिया और लेबनान के जरिए भूमध्य सागर तक अपना एक प्रभाव क्षेत्र बनाया जाए, लेकिन सऊदी इसे अपने लिए खतरा मानता है.

यमन में हूती विद्रोहियों का विवाद

यमन में हूती विद्रोहियों का उभार सऊदी के लिए बड़ी चुनौती बना. सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया. सऊदी का आरोप है कि ईरान हूतियों को हथियार और समर्थन देता है. ईरान इन आरोपों को नकारता है, लेकिन क्षेत्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि हूती समूह के जरिए ईरान यमन में प्रभाव बढ़ाना चाहता है. कई सालों की लड़ाई के बाद भी सऊदी को निर्णायक सफलता नहीं मिली, जिससे उसकी रणनीतिक स्थिति कमजोर दिखी.

यह भी पढ़ें: जिस तेल के लिए 'जल' रही पूरी दुनिया, आज की ही तारीख में मिला था उसका पहला कुआं

लेबनान और हिजबुल्लाह फैक्टर

लेबनान में शिया संगठन हिजबुल्लाह का मजबूत प्रभाव है. यह संगठन राजनीतिक और सैन्य दोनों रूपों में ताकतवर है और ईरान का करीबी सहयोगी माना जाता है. 2017 में लेबनान में सऊदी अरब ने अपने समर्थन वाले प्रधानमंत्री साद हरीरी ने अचानक इस्तीफा देने पर मजबूर किया था. यह कदम हिजबुल्लाह की बढ़ती राजनीतिक ताकत को रोकने की कोशिश के रूप में देखा गया. 

सिर्फ इतना ही नहीं इजराइल और सऊदी अरब के बीच भले दुश्मनी हो, लेकिन दोनों को ही ईरान से खतरा है. अब पुरानी कहावत कि दुश्मन का दुश्मन अपना दोस्त है, इसीलिए ईरान के प्रभाव को रोकने के लिए इजरायल भी सऊदी अरब का साथ देता है.

यह भी पढ़ें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हुआ तो किन देशों की आर्थिक तरक्की के रास्ते होंगे बंद? देखें पूरी लिस्ट

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

Iran Saudi Conflict: सऊदी अरब ने पाकिस्तान से किया था रक्षा समझौता, फिर ईरान के हमलों पर जवाब क्यों नहीं दे रहा पाक?
सऊदी अरब ने पाकिस्तान से किया था रक्षा समझौता, फिर ईरान के हमलों पर जवाब क्यों नहीं दे रहा पाक?
Suicide Boats: क्या होते हैं सुसाइड बोट्स, ईरान-इजरायल और अमेरिका से जंग में कैसे हो रहा इनका इस्तेमाल?
क्या होते हैं सुसाइड बोट्स, ईरान-इजरायल और अमेरिका से जंग में कैसे हो रहा इनका इस्तेमाल?
क्रूड ऑयल से कैसे बनते हैं डीजल-पेट्रोल और LPG-CNG? जान लें पूरा प्रोसेस
क्रूड ऑयल से कैसे बनते हैं डीजल-पेट्रोल और LPG-CNG? जान लें पूरा प्रोसेस
करीब 3000 साल से 33 किमी चौड़ा है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, अब तक क्यों नहीं बढ़ाई गई इसकी चौड़ाई?
करीब 3000 साल से 33 किमी चौड़ा है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, अब तक क्यों नहीं बढ़ाई गई इसकी चौड़ाई?
Advertisement

वीडियोज

Bollywood News: विवाद के बावजूद Sitaare Zameen Par को लेकर दर्शकों में उत्सुकता और चर्चा लगातार बनी हुई है (11-03-2026)
Mahadev & Sons: धीरज ने उठाई विद्या के लिए आवाज, क्या बाप-बेटे का रिश्ता हो जायेगा ख़तम?
Tesla Model Y vs Mercedes-Benz CLA electric range and power comparison | Auto Live #tesla #mercedes
Strait of Hormuz ही ईरान का सबसे बड़ा हथियार..चल दिया दांव! | US Israel Iran War | Khamenei
AI Impact Summit Congress protests: Rahul के बयान पर संबित का पलटवार | BJP MP
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement
Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
केरलम विधानसभा चुनाव के लिए AAP की पहली लिस्ट जारी, 22 उम्मीदवारों का ऐलान
केरलम विधानसभा चुनाव के लिए AAP की पहली लिस्ट जारी, 22 उम्मीदवारों का ऐलान
हाई कोर्ट पहुंचा सिलेंडर की सप्लाई का मामला, केंद्र को नोटिस जारी, 16 मार्च तक देना होगा जवाब
हाई कोर्ट पहुंचा सिलेंडर की सप्लाई का मामला, केंद्र को नोटिस जारी, 16 मार्च तक देना होगा जवाब
Watch: मंदिर में ट्रॉफी ले जाने के विवादित के बीच गुरुद्वारे पहुंचे गौतम गंभीर, कर दी सबकी बोलती बंद
मंदिर में ट्रॉफी ले जाने के विवादित के बीच गुरुद्वारे पहुंचे गौतम गंभीर, देखें वीडियो
नीना गुप्ता से आमिर खान तक, सूरज बड़जात्या के बेटे के वेडिंग रिसेप्शन में लगा सितारों का मेला
नीना गुप्ता से आमिर खान तक, सूरज बड़जात्या के बेटे के वेडिंग रिसेप्शन में लगा सितारों का मेला
'खून से रंग देंगे फारस की खाड़ी...', ईरान ने अमेरिका-इजरायल को दी खुली धमकी, मिडिल ईस्ट में भारी बवाल
'खून से रंग देंगे फारस की खाड़ी...', ईरान ने अमेरिका-इजरायल को दी खुली धमकी, मिडिल ईस्ट में भारी बवाल
अमेरिका-ईरान जंग के बीच गुड न्यूज! दिल्ली-रियाद के बीच फिर से शुरू हुई फ्लाइट्स, जानें पूरा अपडेट
अमेरिका-ईरान जंग के बीच गुड न्यूज! दिल्ली-रियाद के बीच फिर से शुरू हुई फ्लाइट्स, जानें पूरा अपडेट
इन 5 तरीकों से कर सकते हैं गैस सिलेंडर बुक, जान लीजिए कौनसा सबसे आसान रहेगा
इन 5 तरीकों से कर सकते हैं गैस सिलेंडर बुक, जान लीजिए कौनसा सबसे आसान रहेगा
सरकारी नौकरी का मौका MPESB में 291 स्टाफ नर्स और पैरामेडिकल पदों पर भर्ती,जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया
सरकारी नौकरी का मौका MPESB में 291 स्टाफ नर्स और पैरामेडिकल पदों पर भर्ती,जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया
Embed widget