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Budget Session 2026: लोकसभा के अंदर कैसे होती है पीएम की सिक्योरिटी, क्या सदन के अंदर भी मौजूद होती है SPG?

Budget Session 2026: हाल ही में सदन में हुई रुकावट के बाद लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि लोकसभा के अंदर प्रधानमंत्री की सिक्योरिटी कैसी होती है. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

Budget Session 2026: लोक सभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में होने वाली रूकावटों के बारे में हाल ही में एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता कल सदन में स्पीकर की कुर्सी के पास जाकर कोई अप्रिय घटना करना चाहते थे. उनके अनुरोध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशन में शामिल नहीं हुए. इसी बीच आइए जानते हैं कि लोकसभा के अंदर कैसी होती है प्रधानमंत्री की सिक्योरिटी और क्या सदन के अंदर भी मौजूद होती है एसपीजी.

संसद के अंदर एसपीजी की भूमिका 

प्रधानमंत्री को स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप सुरक्षा देता है. यह उनके आवासों, यात्रा मार्गों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनके करीबी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होते हैं. हालांकि स्थापित संसदीय प्रोटोकॉल के मुताबिक, सशस्त्र एसपीजी कमांडो सत्र के दौरान लोकसभा या फिर राज्यसभा कक्षों में प्रवेश नहीं करते हैं. वे प्रधानमंत्री के साथ सदन के प्रवेश द्वार, लॉबी और गलियारों तक जाते हैं. इसके बाद कक्ष के अंदर सुरक्षा की जिम्मेदारी संसदीय अधिकारियों को सौंप दी जाती है.

सदन के अंदर सुरक्षा की जिम्मेदारी 

एक बार जब प्रधानमंत्री लोकसभा कक्ष में प्रवेश करते हैं तो आंतरिक सुरक्षा सांसद सुरक्षा सेवा द्वारा संभाली जाती है. सदन के अंदर तैनात मार्शल व्यवस्था बनाए रखते हैं और संसद सदस्यों के साथ-साथ प्रधानमंत्री सहित आने वाले गणमान्य व्यक्तियों की सुरक्षा को पक्का करते हैं. 

बहु स्तरीय सुरक्षा कोऑर्डिनेशन 

हालांकि एसपीजी कर्मी कक्ष के अंदर नहीं रहते हैं लेकिन हर सत्र से पहले एसपीजी और संसदीय सुरक्षा टीमों के बीच अच्छा खासा कोऑर्डिनेशन होता है. किसी भी घटना की स्थिति में तत्काल कार्रवाई को सुनिश्चित करने के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना, प्रवेश मार्ग, बैठने की व्यवस्था और निकास रणनीतियों की पहले से ही समीक्षा की जाती है.

सुरक्षा हस्तांतरण प्रोटोकॉल 

जब प्रधानमंत्री संसद परिसर में आते हैं तो एसपीजी की सुरक्षा उन्हें घेरे रहती है. जैसे ही वे सदन कक्ष के पास पहुंचते हैं आंतरिक सुरक्षा के लिए परिचालन कमान औपचारिक रूप से संसदीय सुरक्षा अधिकारियों को सौंप दी जाती है. जैसे ही सत्र समाप्त हो जाता है और प्रधानमंत्री का बाहर निकलने लगते हैं एसपीजी सुरक्षा पूरी तरह से फिर से शुरू हो जाती है.

कुल मिलाकर लोकसभा के अंदर प्रधानमंत्री की सुरक्षा एक सावधानी से कोऑर्डिनेटर सिस्टम के जरिए काम करती है. इसमें एसपीजी बाहरी और करीबी सुरक्षा देता है जबकि पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस स्पीकर के अधिकार के तहत चेंबर के अंदर सुरक्षा और व्यवस्था को पक्का करती है.

ये भी पढ़ें: जब नेहरू पीएम बने, तब किस पायदान पर थी भारत की इकोनॉमी? उनके निधन पर क्या था हाल?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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