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चीन के पड़ोसियों को भाया भारत का 'ब्रह्मोस', फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया-वियतनाम में मची धूम

भारत की सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की मांग दक्षिण-पूर्व एशिया में तेजी से बढ़ रही है. फिलीपींस के बाद अब वियतनाम के साथ यह डील फाइनल हुई है. जबकि इंडोनेशिया के साथ बातचीत अंतिम दौर में है.

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  • भारत ब्रह्मोस मिसाइल के साथ रक्षा महाशक्ति बनकर उभरा है.
  • फिलीपींस के बाद वियतनाम, इंडोनेशिया भी ब्रह्मोस प्राप्त करेंगे.
  • ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज, सटीक और घातक क्रूज मिसाइल है.
  • यह दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदल देगी.

वैश्विक कूटनीति और रक्षा बाजार में भारत एक बड़ी महाशक्ति बनकर उभर रहा है. दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते सैन्य दबदबे और विस्तारवादी नीतियों से परेशान उसके पड़ोसी देशों को अब भारत का सबसे भरोसेमंद हथियार भा गया है. दुनिया की सबसे तेज सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' अब दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों की पहली पसंद बन चुकी है. फिलीपींस द्वारा इस मिसाइल प्रणाली को अपनाने के बाद अब वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देश भी अपनी सेना को ब्रह्मोस से लैस करने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं, जिससे इस पूरे क्षेत्र का रणनीतिक नक्शा बदलने वाला है.

सिंगापुर में रक्षा सचिव का बड़ा खुलासा

इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक मुहर तब लगी जब भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित शांगरी-ला डायलॉग में वैश्विक मंच पर स्थिति साफ की. उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि वियतनाम के साथ भारत का ब्रह्मोस मिसाइल सौदा पूरी तरह फाइनल हो चुका है, जबकि इंडोनेशिया के साथ भी रक्षा समझौता अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है. फिलीपींस साल 2024 से ही इस मिसाइल सिस्टम का सक्रियता से इस्तेमाल कर रहा है. इसका सीधा मतलब यह है कि ब्रह्मोस अब धीरे-धीरे पूरे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में अपना एक मजबूत सुरक्षा नेटवर्क तैयार कर रही है.

वियतनाम के साथ बिग डील

अगर वियतनाम के साथ हुए इस ऐतिहासिक रक्षा सौदे के वित्तीय और तकनीकी पहलुओं पर बात करें, तो यह पूरा सौदा करीब 5,800 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है. इस बड़े कॉन्ट्रैक्ट के तहत भारत न केवल वियतनाम को अपनी तटीय सुरक्षा मजबूत करने के लिए कोस्टल डिफेंस मिसाइल बैटरियां देगा, बल्कि शुरुआती मिसाइल सप्लाई, वहां के सैनिकों के लिए विशेष ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट भी मुहैया कराएगा. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, वियतनाम की दिलचस्पी सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भविष्य में ब्रह्मोस के हवा से दागे जाने वाले यानी एयर-लॉन्च वेरिएंट को खरीदने की योजना पर भी गंभीरता से काम कर रहा है.

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इंडोनेशिया के साथ अंतिम दौर की बातचीत

वियतनाम के बाद इस कतार में अगला बड़ा नाम इंडोनेशिया का है, जिसके साथ मिसाइल आपूर्ति को लेकर बातचीत बहुत आगे बढ़ चुकी है. दोनों देशों ने रक्षा संबंधों को केवल खरीदार और विक्रेता तक सीमित न रखकर इसे और गहरा बनाने के लिए एक विशेष 'डिफेंस इंडस्ट्री कोऑपरेशन कमेटी' का गठन भी किया है. इस कमेटी के माध्यम से भारत और इंडोनेशिया के बीच भविष्य में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, जॉइंट रिसर्च और मजबूत सप्लाई चेन बनाने पर काम किया जाएगा. इंडोनेशिया के अलावा इसी क्षेत्र के दो और प्रमुख देश थाईलैंड और मलेशिया भी भारत की इस मिसाइल तकनीक को हासिल करने में लगातार गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं.

क्यों अचूक और बेजोड़ है ब्रह्मोस?

आखिर चीन के पड़ोसी देश ब्रह्मोस के पीछे इतने दीवाने क्यों हैं, इसका जवाब इस मिसाइल की बेजोड़ ताकत में छिपा है. ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे तेज और घातक क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है, जिसकी रफ्तार मैक-3 यानी ध्वनि की गति से करीब 3 गुना तक तेज है. भारत और रूस के इस संयुक्त उत्पाद की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे समुद्र के जहाजों, जमीन और हवा यानी लड़ाकू विमानों, तीनों ही प्लेटफॉर्म से बेहद आसानी से दागा जा सकता है. इसकी अचूक सटीकता और पलक झपकते ही दुश्मन के युद्धपोतों या सैन्य ठिकानों को तबाह करने की क्षमता इसे समुद्री सुरक्षा के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प बनाती है.

दक्षिण चीन सागर में बीजिंग का बढ़ा तनाव

इस मिसाइल सौदे का सबसे बड़ा असर दक्षिण चीन सागर पर पड़ने वाला है, जिसे चीन लंबे समय से अपनी बपौती समझता आया है. चीन इस पूरे समुद्री क्षेत्र पर अपना ऐतिहासिक दावा ठोकता है और वहां कृत्रिम द्वीप और सैन्य ठिकाने बनाकर स्थायी गतिविधियां चला रहा है. फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया तीनों ही देशों का इस क्षेत्र में चीन के साथ गंभीर सीमा विवाद चल रहा है. ये देश चीन के दावों को पूरी तरह खारिज करते हैं और उसकी विस्तारवादी सोच के खिलाफ अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए अब भारत के सैन्य सहयोग का सहारा ले रहे हैं.

बदलेगा सत्ता का संतुलन

दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के पास ब्रह्मोस जैसी आधुनिक और सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल प्रणाली आने से उनकी रक्षा क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. जब इन मिसाइलों को तटीय इलाकों में तैनात किया जाएगा, तो इस पूरे क्षेत्र में सैन्य और रणनीतिक सत्ता का संतुलन पूरी तरह बदल जाएगा. अब तक चीनी नौसेना जिस तरह बिना किसी डर के इस इलाके में अपना एकतरफा वर्चस्व बनाए हुए थी, ब्रह्मोस की मौजूदगी के बाद उसके लिए ऐसा करना बेहद मुश्किल और जोखिम भरा हो जाएगा क्योंकि दुश्मन के जहाजों को अब हमेशा निशाना बनने का डर सताएगा.

भारत के लिए इस डील के क्या फायदे

भले ही दक्षिण चीन सागर से भारत की भौगोलिक सीमाएं सीधे तौर पर नहीं जुड़ी हैं, लेकिन अपने पड़ोसी क्षेत्र में चीन के बढ़ते वर्चस्व को रोकना भारत के अपने राष्ट्रीय हितों के लिए भी बेहद जरूरी है. इन रक्षा सौदों के जरिए भारत को हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने का एक बेहतरीन मौका मिल रहा है. भविष्य में यह साझेदारी भारत को फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों के साथ मिलकर एक नया और मजबूत सुरक्षा संगठन या गठबंधन बनाने का अवसर दे सकती है, जो चीन के खिलाफ एक मजबूत दीवार साबित होगा.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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