ये शख्स था बिहार का प्रधानमंत्री, फिर बना पहला मुख्यमंत्री; जानें पूरी कहानी
Bihar Politics: क्या आप बिहार के प्रधानमंत्री के बारे में जानते हैं? जो पहले प्रधानमंत्री बने फिर बिहार के ही मुख्यमंत्री बन गए. है न हैरान करने वाली बात चलिए जानते हैं उस शख्स के बारे में.

Bihar Politics: आजादी के बाद भारत को कई प्रधानमंत्री मिले. भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे ये हम सब जानते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि आजादी से पहले ब्रिटिश राज में भी प्रधानमंत्री थे वो भी बिहार के जी हां बिहार के प्रधानमंत्री कौन थे उनका क्या नाम था चलिए इसके बारे में हम आपको बताते हैं.
कौन हैं श्री कृष्ण सिंह
हम बात कर रहे हैं बिहार के उस शख्स की जिन्होंने न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में अपनी अमिट छाप छोड़ी. डॉ. श्रीकृष्ण सिंह, जिन्हें प्यार से 'श्री बाबू कहा जाता था. 1935 के भारत सरकार अधिनियम के तहत राज्यों में सीमित स्वायत्तता मिली और 1937 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने बिहार में जीत हासिल की. श्री कृष्ण सिंह को 1937 में बिहार प्रांत का प्रधानमंत्री चुना गया और 31 अक्टूबर 1939 तक पद पर बने रहे. उन्होंने इस पद पर रहते हुए सामाजिक और आर्थिक सुधारों की नींव रखी. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी जमींदारी प्रथा का उन्मूलन, जिसके लिए उन्हें 'बिहार केसरी' की उपाधि मिली.
प्रधानमंत्री के बाद बने मुख्यमंत्री
15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी के बाद भारत का अपना संविधान बना और पहली बार चुनाव हुए तो प्रांतों में बनने वाली सरकार के मुखिया को मुख्यमंत्री का पदनाम दिया गया. 1952 में आजाद भारत का पहला आम चुनाव हुआ तो इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने बाजी मारी कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला जिसमें श्री कृष्ण सिंह को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना गया. जब मुख्यमंत्री बने तो 15 सालों तक इस पद को संभाला.
बिहार के लिए किया ये काम
श्री बाबू ने शिक्षा, बुनियादी ढांचे और उद्योग के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए. उन्होंने बिहार में स्टेट हाइवे के किनारे छायादार वृक्ष लगवाने की योजना शुरू की, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला. इसके अलावा उन्होंने छोटा नागपुर के पठार को औद्योगिक विकास के लिए चुना जिससे बाद में बिहार के राजस्व में वृद्धि हुई और लाखों लोगों को रोजगार मिला. उनके शासनकाल के दौरान राज्य में पहली बार औद्योगिक क्रांति आई थी. श्री बाबू इस चीज को समझते थे कि किसी भी राज्य में औद्योगिक क्रांति के लिए बिजली और सड़क मूलभूत जरूरतें होती हैं. उन्होंने बेगूसराय और पटना के बीच गंगा नदी पर पुल बनवाया. श्री बाबू ने दलितों और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कई कदम उठाए, जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाता है.
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