एक्सप्लोरर

कोई 5 दिन सीएम रहा तो कोई मात्र 13 दिन, बिहार में इन मुख्यमंत्रियों का रहा सबसे छोटा कार्यकाल

Bihar Politics: बिहार की राजनीति हमेशा से ही उतार-चढ़ाव भरी रही है. बिहार में कई ऐसे CM हुए जिनका कार्यकाल बहुत छोटा रहा चलिए जानते हैं कि बिहार में किन मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल सबसे छोटा रहा.

Bihar Politics: बिहार में इन दिनों विधानसभा चुनावों की सरगर्मियां तेज हैं. विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने कमर कस ली है चुनाव आयोग ने भी तैयारी कर ली है. अब बस तारीखों का ऐलान होना बाकी है, लेकिन बिहार की सियासत का इतिहास देखें तो कई ऐसे मुख्यमंत्री हुए हैं जिनकी कुर्सी इतनी जल्दी हिल गई कि वे 20 दिन भी सत्ता की गद्दी पर नहीं बैठ सके. तो चलिए हम आपको बताते हैं बिहार के उन मुख्यमंत्रियों के बारे में जो बिहार के इतिहास में सबसे कम समय तक सत्ता में रहे. 

ये हैं सबसे कम कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री

पहले बात करते हैं बिहार के सबसे कम समय वाले मुख्यमंत्री की. 1967 का वह दौर था जब बिहार में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी (SSP) का दबदबा था. महामाया प्रसाद सिन्हा के इस्तीफे के बाद 28 जनवरी 1968 को सतीश प्रसाद सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया. लेकिन उनकी सत्ता महज 5 दिनों तक चली. 1 फरवरी को ही विधानसभा में विश्वास मत हारने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. बाद में वे राज्यसभा सदस्य बने और राजनीति में सक्रिय रहे, लेकिन यह उनका सबसे छोटा कार्यकाल था. 

भोला पासवान शास्त्री

दूसरे नंबर पर हैं भोला पासवान शास्त्री. भोला पासवान शास्त्री की कुर्सी सिर्फ 7 दिनों तक टिकी. गजब की बात ये है कि भोला पासवान तीन बार मुख्यमंत्री बने लेकिन तीनों कार्यकाल मिलाकर भी वो एक साल पूरा नहीं कर सके. 22 मार्च 1968 को पहली बार मुख्यमंत्री बने अपने कार्यकाल में वह 100 दिनों तक सीएम रहे. इसके बाद 22 जून 1969 से 4 जुलाई मात्र 13 दिन तक मुख्यमंत्री रहे. फिर 2 जून 1971 को उन्होंने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और इस बार उनका कार्यकाल 9 जनवरी 1972 तक था.

दीप नारायण सिंह

तीसरे स्थान पर आते हैं दीप नारायण सिंह. दीप नारायण सिंह बिहार के दूसरे और सबसे कम समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री हैं. बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिंह की मृत्यु हो गई उनकी मृत्यु के बाद बिहार के गवर्नर ने दीप नारायण सिंह को 1 फरवरी 1961 को कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया लेकिन 18 फरवरी 1961 तक ही रहा मात्र 17 दिनों तक ही वो मुख्यमंत्री पद का भार संभाल पाए. इनका कार्यकाल छोटा इसलिए था क्योंकि उनका पद पर रहने का मकसद राज्य की व्यवस्था को संभालना था वे स्थायी मुख्यमंत्री नहीं थे.

इसे भी पढ़ें-बिहार को 'बिहार' ही क्यों कहा गया, यूपी या पंजाब क्यों नहीं? कैसे पड़ा इसका नाम

About the author नेहा सिंह

नेहा सिंह बीते 6 साल से डिजिटल मीडिया की दुनिया से जुड़ी हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद से ताल्लुक रखती हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद हैदराबाद स्थित ईटीवी भारत से साल 2019 में अपने करियर की शुरुआत की. यहां पर दो साल तक बतौर कंटेट एडिटर के पद पर काम किया इस दौरान उन्हें एंकरिंग का भी मौका मिला जिसमें उन्होंने बेहतरीन काम किया.

फिर देश की राजधानी दिल्ली का रुख किया, यहां प्रतिष्ठित चैनलों में काम कर कलम को धार दी. पहले इंडिया अहेड के साथ जुड़ीं और कंटेंट के साथ-साथ वीडियो सेक्शन में काम किया. 

इसके बाद नेहा ने मेनस्ट्रीम चैनल जी न्यूज में मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के पद पर अपनी सेवाएं दीं. जी न्यूज में रहते हुए नेशनल और इंटरनेशनल मुद्दों पर एक्सप्लेनर वीडियो क्रिएट किए.

इसी बीच प्रयागराज महाकुंभ के दौरान कुलवृक्ष संस्थान से जुड़कर महाकुंभ भी कवर किया, साधु-संतों का इंटरव्यू किया. लोगों से बातचीत करके उनके कुंभ के अनुभव और समस्याओं को जाना.

वर्तमान में नेहा एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां पर नॉलेज सेक्शन में ऐसी खबरों को एक्सप्लेन करती हैं, जिनके बारे में आम पाठक को रुचि होती है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

Strait of Hormuz Closure: होर्मुज पूरी तरह बंद हो जाए तो क्या होगा, फिर किन रास्तों से दुनिया को मिलेगी राहत?
होर्मुज पूरी तरह बंद हो जाए तो क्या होगा, फिर किन रास्तों से दुनिया को मिलेगी राहत?
Teesta River Project: बांग्लादेश ने चीन को सौंपा तीस्ता प्रोजेक्ट, जानें यह भारत के लिए कितना खतरनाक?
बांग्लादेश ने चीन को सौंपा तीस्ता प्रोजेक्ट, जानें यह भारत के लिए कितना खतरनाक?
दिल्ली का जंतर-मंतर कैसे बना लोकतंत्र की आवाज, सबसे पहले यहां कौन सा आंदोलन हुआ था?
दिल्ली का जंतर-मंतर कैसे बना लोकतंत्र की आवाज, सबसे पहले यहां कौन सा आंदोलन हुआ था?
Plastic Currency Note Cost: प्लास्टिक के नोट बनाने में कितना पैसा होगा खर्च, जानें 10 रुपये का नोट कितने में बनेगा?
प्लास्टिक के नोट बनाने में कितना पैसा होगा खर्च, जानें 10 रुपये का नोट कितने में बनेगा?

वीडियोज

गुटखाबाज बीवी की डिमांड डायरी!
Shehnaaz Gill बोलीं- अभी सक्सेस नहीं मिली, मेरा सपना है लोग टिकट खरीदकर मेरी फिल्में देखने आएं
Bollywood News: '3 Idiots' की कहानी पर आमिर का नया खुलासा, सोनम वांगचुक कनेक्शन पर छिड़ी नई बहस (17-07-2026)
Udne ki Asha: Sailee-Sachin की बदली किस्मत; Ganpatipule में मिला पैसा, पर खो गया सुकून!
Tata Altroz diesel long term review and mileage: E20 ka best solution? #autolive

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर की सबसे बड़ी उड़ान, आज इतिहास रचने निकलेगा Vikram-1; जानिए क्यों खास है ये मिशन
भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर की सबसे बड़ी उड़ान, आज इतिहास रचने निकलेगा Vikram-1; जानिए क्यों खास है ये मिशन
'BJP वाले देश के लिए सफेद चादर का कफन...', सोनम वागंचुक को जंतर-मंतर से हटाने पर बोलीं डिंपल यादव
'BJP वाले देश के लिए सफेद चादर का कफन...', सोनम वागंचुक को जंतर-मंतर से हटाने पर बोलीं डिंपल यादव
रूसी तेल खरीद पर अमेरिका लगाएगा 100 फीसदी टैरिफ? भारतीय विदेश मंत्रालय ने सवाल पर क्या कहा
रूसी तेल खरीद पर अमेरिका लगाएगा 100 फीसदी टैरिफ? भारतीय विदेश मंत्रालय ने सवाल पर क्या कहा
'बंटवारा 1947' से पहले बड़े पर्दे पर दहाड़ते नजर आएंगे सनी देओल, री रिलीज हो रही एक्टर की तीन ब्लॉकबस्टर फिल्में, नोट कर लें तारीख!
'बंटवारा 1947' से पहले सनी देओल की री रिलीज हो रही तीन ब्लॉकबस्टर फिल्में, नोट कर लें तारीख!
IND vs ENG 3rd ODI में रोहित शर्मा रच सकते हैं इतिहास, Lord's में बना सकते हैं ये 2 रिकॉर्ड
IND vs ENG 3rd ODI में रोहित शर्मा रच सकते हैं इतिहास, Lord's में बना सकते हैं ये 2 रिकॉर्ड
जम्मू-कश्मीर के कठुआ रेलवे स्टेशन का बदला नाम, केंद्र सरकार ने कर दिया ऐलान
जम्मू-कश्मीर के कठुआ रेलवे स्टेशन का बदला नाम, केंद्र सरकार ने कर दिया ऐलान
'दिल्ली पुलिस ने मुझे...', सोनम वांगचुक को धरने से हटाए जाने के बाद अभिजीत दीपके का बड़ा दावा
'दिल्ली पुलिस ने मुझे...', सोनम वांगचुक को धरने से हटाए जाने के बाद अभिजीत दीपके का बड़ा दावा
'लोकतंत्र एक बार फिर शर्मसार', सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाया तो भड़के नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद
'लोकतंत्र एक बार फिर शर्मसार', सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाया तो भड़के नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद
Embed widget