Bihar Elections: बिहार चुनाव में कितने करोड़पति उम्मीदवार, देखें राज्य में रईसी के आंकड़े?
Bihar Elections: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में उम्मीदवारों की रईसी के आंकड़ों ने चौंका दिया है. जानिए किस गठबंधन में करोड़पतियों की भरमार है और राज्य में रईसी के आंकड़े क्या हैं.

Bihar Elections: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने राजनीति के साथ-साथ रईसी की तस्वीर भी साफ कर दी है. आंकड़े बताते हैं कि इस बार बिहार की राजनीति में बहस सिर्फ विकास की नहीं, बल्कि दौलत की भी हो रही है. सवाल उठता है कि जहां आम जनता रोजमर्रा की जरूरतों से जूझ रही है, वहीं उनके प्रतिनिधि इतने अमीर कैसे हैं? आइए जानते हैं बिहार चुनाव के उम्मीदवारों की रईसी का पूरा गणित.
बिहार चुनाव में बढ़ी उम्मीदवारों की संपत्ति की रफ्तार
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में कुल 18 जिलों की 121 सीटों पर उम्मीदवार मैदान में हैं. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से लगभग 73% यानी 178 उम्मीदवार करोड़पति हैं. वहीं, केवल 65 उम्मीदवारों की संपत्ति एक करोड़ रुपये से कम है. ये सभी आंकड़े प्रत्याशियों द्वारा दाखिल किए गए नामांकन पत्रों और शपथपत्रों से प्राप्त हुए हैं.
कौन ज्यादा अमीर-एनडीए या इंडिया गठबंधन?
अगर राजनीतिक गठबंधनों की बात करें तो एनडीए में सबसे अधिक 92 करोड़पति उम्मीदवार हैं, जबकि इंडिया गठबंधन में 86 उम्मीदवारों की संपत्ति करोड़ों में है. लखपतियों की बात करें तो कुल 64 उम्मीदवारों में से 35 इंडिया गठबंधन और 29 एनडीए से आते हैं. दिलचस्प बात यह है कि वाम दलों के 14 प्रत्याशी लखपति श्रेणी में हैं.
10 करोड़ से अधिक संपत्ति वाले उम्मीदवार
इस बार के चुनाव में करोड़पति तो बहुत हैं, लेकिन 10 करोड़ से अधिक संपत्ति वाले प्रत्याशियों की संख्या भी कम नहीं है. इंडिया गठबंधन में ऐसे 28 उम्मीदवार हैं, जबकि एनडीए के 22 उम्मीदवारों के पास 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है. इनमें सबसे ज्यादा 10 करोड़ से अधिक संपत्ति वाले उम्मीदवार राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से हैं. राजद के 141 प्रत्याशियों में से लगभग 15% यानी हर सातवां उम्मीदवार 10 करोड़ से अधिक का मालिक है.
आम लोग बनाम अमीर उम्मीदवार
राजनीतिक मंचों पर जहां विकास, शिक्षा और रोजगार की बातें होती हैं, वहीं आंकड़े बताते हैं कि बिहार की आम जनता अब भी आर्थिक रूप से कमजोर है. जातीय जनगणना के अनुसार, राज्य की कुल आबादी में केवल 4.92% लोग नौकरियों में हैं, जिनमें से महज 1.57% ही सरकारी नौकरी करते हैं.
नीति आयोग के एक विश्लेषण की मानें तो बिहार के मात्र 1.3% परिवार ही सबसे अमीर 10% की श्रेणी में आते हैं. यह अंतर दर्शाता है कि आम नागरिकों और नेताओं की संपत्ति के बीच एक गहरी खाई है.
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Source: IOCL
























