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Bakrid Qurbani Rules: क्या हिंदुओं के त्योहारों की तरह बकरीद में होता है कुर्बानी का मुहूर्त, कैसे तय होती है टाइमिंग?

Bakrid 2026: क्या हिंदू त्योहारों की तरह बकरीद (Eid-ul-Adha) में भी जानवरों की कुर्बानी का कोई मुहूर्त होता है? जानिए नमाज के बाद कुर्बानी का सही समय, दिन और इस्लामिक नियम.

भारत विविधताओं और त्योहारों का देश है. यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्मों के लोग अपने-अपने त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं. आपने अक्सर देखा होगा कि हिंदू धर्म में दिवाली, होली या किसी भी पूजा-पाठ के लिए पंडित जी पंचांग देखकर शुभ 'मुहूर्त' निकालते हैं. हिंदू धर्म में हर शुभ काम ग्रहों और नक्षत्रों की चाल यानी मुहूर्त के हिसाब से किया जाता है. आज इस्लाम धर्म का प्रमुख त्योहार बकरीद है तो ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हिंदुओं की तरह बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी के लिए कोई फिक्स 'मुहूर्त' होता है? आइए समझते हैं कि इस्लाम में कुर्बानी का समय और तारीख कैसे तय होते हैं?

क्या इस्लाम में है 'मुहूर्त' का कोई नियम?

अगर सीधे शब्दों में कहें तो नहीं. इस्लाम में पंचांग, ग्रहों की चाल या तारों की स्थिति देखकर 'शुभ मुहूर्त' निकालने की परंपरा नहीं है. इस्लाम मुख्य रूप से चांद कैलेंडर पर आधारित है. हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बकरीद के दिन कोई भी व्यक्ति किसी भी वक्त कुर्बानी कर सकता है. मुहूर्त न होने के बावजूद इस्लाम में कुर्बानी करने का बेहद सख्त और तय समय होता है. अगर इस तय समय से पहले या बाद में कुर्बानी की जाए तो धर्म के अनुसार वह कुर्बानी कुबूल नहीं होती है.

कब शुरू होता है कुर्बानी का सही समय?

कुर्बानी करने का सबसे अहम नियम यह है कि यह ईद-उल-अजहा की नमाज अदा करने के बाद ही शुरू होती है. 

  • नमाज से पहले मनाही: अगर कोई व्यक्ति बकरीद के दिन सुबह-सुबह ईद की नमाज पढ़े बिना या शहर में नमाज होने से पहले ही कुर्बानी दे देता है तो उसे कुर्बानी नहीं माना जाता है. इस्लामिक नजरिए से वह सिर्फ आम गोश्त खाने के लिए काटा गया जानवर माना जाएगा.
  • नमाज के तुरंत बाद: जैसे ही मस्जिद या ईदगाह में बकरीद की सामूहिक नमाज और खुत्बा पूरा हो जाता है, वैसे ही कुर्बानी का समय शुरू हो जाता है.

कितने दिन तक दी जा सकती है कुर्बानी?

हिंदू धर्म में जैसे मुहूर्त कुछ घंटों या मिनटों का होता है, वैसे इस्लाम में कुर्बानी के लिए पूरे तीन दिन का समय दिया गया है. इस्लामिक कैलेंडर के 12वें महीने का नाम जिलहिज्ज (Dhul-Hijjah) है. कुर्बानी इसी महीने की 10, 11 और 12 तारीख को की जा सकती है.

  • पहला दिन (10 जिलहिज्ज): यह बकरीद का मुख्य दिन होता है. नमाज के बाद पूरा दिन और रात कुर्बानी की जा सकती है. इस्लाम में पहले दिन कुर्बानी करना सबसे 'अफजल' (सबसे बेहतर और पुण्य का काम) माना गया है.
  • दूसरा दिन (11 जिलहिज्ज): अगर किसी वजह से पहले दिन कुर्बानी नहीं हो पाई तो दूसरे दिन भी की जा सकती है.
  • तीसरा दिन (12 जिलहिज्ज): यह आखिरी दिन होता है. तीसरे दिन सूरज डूबने (मगरिब की अजान) से ठीक पहले तक कुर्बानी की जा सकती है. गौर करने वाली बात यह है कि तीसरे दिन सूरज ढलने के बाद कुर्बानी का समय हमेशा के लिए खत्म हो जाता है.

कैसे तय होती है बकरीद की तारीख?

बकरीद किस दिन मनाई जाएगी, यह पूरी तरह से चांद दिखने पर निर्भर करता है. इस्लामिक कैलेंडर चांद के हिसाब से चलता है. जब 11वें महीने (जिलकाद) की 29 तारीख को आसमान में नया चांद नजर आता है तो अगले दिन से 12वां महीना जिलहिज्ज शुरू हो जाता है. चांद दिखने के ठीक 10वें दिन बकरीद (ईद-उल-अजहा) मनाई जाती है. चांद देखने का काम और उसकी पुष्टि रुईयत-ए-हिलाल कमेटी (चांद कमेटी) करती है.

ये भी पढ़ें: बकरीद पर कुर्बानी को लेकर देशभर में घमासान, जानें किस राज्य में कौन-से जानवर मारने पर सख्त हैं नियम?

About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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