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Bakrid 2026: ईद की नमाज के लिए क्यों नहीं दी जाती अजान? बेहद खास है इसके पीछे की वजह

Bakrid 2026: मुस्लिम धर्म में आज बकरीद का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ईद की नमाज के लिए अजान नहीं दी जाती है. आइए इसके पीछेकी वजह जानते हैं.

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  • बकरीद का त्योहार त्याग और समर्पण का प्रतीक है.
  • ईद की नमाज से पहले अजान नहीं दी जाती है.
  • पैगंबर साहब की परंपरा के अनुसार नमाज होती है.
  • अनिवार्य नमाजों से ईद की नमाज विशेष है.

Bakrid 2026: आज पूरे भारत में इस्लाम धर्म का सबसे प्रमुख त्योहार ईद-उल-अजहा यानी बकरीद पारंपरिक रूप से मनाया जा रहा है. इसे मुख्य रूप से कुर्बानी की ईद के नाम से जाना जाता है, जिसमें जानवर की कुर्बानी दी जाती है. इस्लामिक कैलेंडर यानी हिजरी के आखिरी महीने 'जिल-हिज्जा' की 10 तारीख को मनाया जाने वाला यह पर्व अल्लाह के प्रति अटूट विश्वास, गहरे समर्पण और बड़े त्याग का प्रतीक है. इस पावन मौके पर सुबह की विशेष नमाज का नियम है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ईद की नमाज के लिए अजान नहीं दी जाती है, चलिए जानें. 

मुस्लिमों के त्याग और समर्पण का पावन त्योहार

भारत सहित पूरी दुनिया में ईद-उल-अजहा का त्योहार बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. चाहे ईद-उल-फितर हो या बकरीद, मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह-सुबह नए कपड़े पहनकर बड़ी तादाद में ईदगाह या मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए जमा होते हैं. लेकिन इस खास नमाज से जुड़ी एक ऐसी बात है, जो अक्सर लोगों को हैरान करती है. रोज की पांच वक्त की नमाज के विपरीत, ईद की नमाज से पहले अजान नहीं दी जाती है. इसके पीछे बेहद खास धार्मिक और ऐतिहासिक वजहें मौजूद हैं.

अजान न देने की सबसे बड़ी वजह

ईद की नमाज के दौरान अजान न होने का सबसे मुख्य कारण पैगंबर हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की परंपरा है. इस्लामिक मान्यताओं और हदीसों के मुताबिक, पैगंबर साहब ने अपने जीवन में ईद की नमाज हमेशा बिना अजान और इकामत के ही अदा की थी. उन्होंने ईदगाह पहुंचकर सीधे नमाज पढ़ाने और उसके ठीक बाद खुतबा (धार्मिक उपदेश) देने का तरीका तय किया था. इसी वजह से आज भी उनके इस नियम को पूरी शिद्दत से माना जाता है.

यह भी पढ़ें: Bakrid Qurbani Rules: क्या हिंदुओं के त्योहारों की तरह बकरीद में होता है कुर्बानी का मुहूर्त, कैसे तय होती है टाइमिंग?

सुन्नत का कड़ाई से होता है पालन

इस्लाम धर्म में पैगंबर मुहम्मद साहब के तौर-तरीकों और उनके जीवन जीने के ढंग को सुन्नत कहा जाता है. पैगंबर साहब के साथ-साथ उनके करीबियों और शुरुआती खलीफाओं ने भी कभी ईद या बकरीद की नमाज से पहले लोगों को बुलाने के लिए अजान नहीं दी थी. मुस्लिम समाज में सुन्नत का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है, इसलिए सदियों पुराना यह नियम आज भी बिना किसी बदलाव के वैसा का वैसा ही लागू है.

अनिवार्य और विशेष नमाजों में अंतर

इस्लामिक नियमों के अनुसार, पांच वक्त की अनिवार्य (फर्ज) नमाज और जुमे की नमाज के लिए अजान देना बेहद जरूरी माना गया है क्योंकि ये नियमित रूप से हर दिन और हर हफ्ते होती हैं. इसके विपरीत, साल में सिर्फ 2 बार होने वाली ईद की नमाज को एक विशेष उत्सव, शुक्रगुजारी और अतिरिक्त नमाज का दर्जा हासिल है. इस तरह की विशेष नमाजों के लिए इस्लाम में अजान देने का कोई भी आदेश या नियम नहीं बनाया गया है.

यह भी पढ़ें: Allah Taala Meaning in Islam : अल्लाह तआला में क्या होता है तआला का मतलब, अल्लाह के साथ क्यों जोड़ा जाता है यह शब्द?

About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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