अयोध्या: ठेला संचालक की मौत, परिजनों का पुलिस पर गंभीर आरोप
Ayodhya News In Hindi: अयोध्या के सरयू घाट पर अतिक्रमण हटाने गई 'परिवर्तन दल' की कार्रवाई के दौरान पानी बेचने वाले एक व्यक्ति की मौत हो गई. परिजनों ने पुलिस पर दौड़ाने का आरोप लगाया है.

धर्मनगरी अयोध्या के सरयू घाट (Saryu Ghat) पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान एक बेहद दुखद घटना सामने आई है. यहां पानी का ठेला लगाने वाले एक व्यक्ति की मौत के बाद भारी हंगामा खड़ा हो गया. मृतक के परिजनों और मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने 'परिवर्तन दल' की टीम पर वेंडर्स को दौड़ाने का गंभीर आरोप लगाया है, जिसके कारण भगदड़ जैसी स्थिति बन गई. फिलहाल, इस पूरे मामले में पुलिस या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, कल शाम सरयू घाट क्षेत्र में प्रशासन का 'परिवर्तन दल' अतिक्रमण (Encroachment) हटाने की कार्रवाई कर रहा था. बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान पानी का ठेला लगाने वाले एक व्यक्ति की अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह जमीन पर गिर पड़े. उन्हें पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
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परिजनों और चश्मदीदों के गंभीर आरोप
मृतक की पत्नी ने बताया कि जब परिवर्तन दल के वाहन घाट पर पहुंचे, तो ठेला और दुकान लगाने वाले लोग डरकर भागने लगे. पत्नी का सीधा आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनके पति को दौड़ाया, इसी अफरा-तफरी में वह गिर पड़े और उनकी मौत हो गई. मौके पर मौजूद एक अन्य महिला चश्मदीद ने भी परिजनों के दावों का समर्थन करते हुए कहा कि कार्रवाई के दौरान लोगों को दौड़ाया गया था, जिससे वहां भगदड़ मच गई थी.
मूल रूप से बिहार का रहने वाला था मृतक
गीता भवन के संत केदारदास ने बताया कि जब उन्हें घटना की जानकारी मिली, तो वह मौके पर पहुंचे. हालांकि, तब तक पुलिस घायल व्यक्ति को अस्पताल भेज चुकी थी. संत केदारदास ने बताया कि मृतक मूल रूप से बिहार के गया जिले का रहने वाला था. उसके परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटियां और एक बेटा है. पिता की मौत के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. संत केदारदास ने यह भी बताया कि लोगों से उन्हें जानकारी मिली है कि मृतक पहले से ही हृदय रोग (Heart Disease) से पीड़ित था.
फिलहाल, मृतक का शव एंबुलेंस के जरिए उनके पैतृक गांव (बिहार) भेजा जा रहा है. अब देखना यह है कि परिजनों के इन गंभीर आरोपों पर पुलिस-प्रशासन क्या स्पष्टीकरण देता है.
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