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सिर्फ पांच मिनट की बातचीत और फोन स्विच्ड ऑफ... मूर्तियां सेलेक्ट होने की खबर के बाद कितनी बदल गई अरुण योगीराज की जिंदगी?

​​अयोध्या में राम मंदिर के गर्भगृह में किस मूर्तिकार की मूर्ति रखी जानी है इसे लेकर चर्चाओं पर अब विराम लग गया है. यहां अरुण योगीराज की बनाई गई मूर्तियों को स्थापित किया जाएगा.

देश में इस समय राम मंदिर सबसे बड़ा मुद्दा है. हर तरफ राम मंदिर और उसकी प्राण प्रतिष्ठा की चर्चा हो रही है. इस मंदिर के लिए कर्नाटक के दिग्गज मूर्तिकार अरुण योगीराज के हाथों से बनी मूर्तियों को चुन लिया गया है. एबीपी न्यूज ने इस सिलसिले में उनकी पत्नी विजेता से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि इस खबर के सामने आने के बाद उनके पति की जिंदगी में क्या-क्या बदलाव आ गए.

आइसोलेशन में अरुण योगीराज!

फोन पर हुई बातचीत के दौरान अरुण योगीराज की पत्नी विजेता ने बताया कि उनके पति को इस वक्त आइसोलेशन में रहने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही, किसी से बातचीत करने से भी मना किया गया है. इसके अलावा भगवान राम की मूर्तियों से संबंधित किसी भी सवाल का जवाब देने से भी रोका गया है. ऐसे में अरुण किसी से भी बात नहीं कर रहे हैं. 

दिनभर में सिर्फ पांच मिनट होती है बातचीत

विजेता ने एबीपी न्यूज को बताया कि राम मंदिर में अरुण द्वारा बनाई गई मूर्तियों को स्थापित किए जाने की खबर सामने आने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है. वह मुझसे, बच्चों और पूरे परिवार से दिनभर में सिर्फ पांच मिनट ही बात करते हैं. इसके बाद उनका फोन दिनभर स्विच्ड ऑफ रहता है. दरअसल, उन्हें लगातार फोन आ रहे हैं, जिससे उनका काम भी प्रभावित होता है.

क्या वाकई लग रहीं योगीराज की मूर्तियां?

विजेता के मुताबिक, राम मंदिर में अरुण की मूर्तियां लगने की खबर उन्हें खुद मीडिया से पता लगी है. इसके बाद पूरा परिवार बेहद खुश है. हमारे पास लगातार फोन आ रहे हैं. घर में पड़ोसियों और रिश्तेदारों का मेला लगा हुआ है, लेकिन इस बारे में हमारे पास कोई सटीक जानकारी नहीं है. न ही शासन और प्रशासन की तरफ से इस संबंध में कोई पुष्टि की गई है. वहीं, अरुण ने भी इस बारे में कुछ नहीं बताया है. 

पांच पीढ़ियों से हो रहा है काम

मूर्तियां तराशने का काम अरुण पहली बार नहीं कर रहे हैं. उनका परिवार पांच पीढ़ियों से मूर्ति तराशने का काम कर रहा है. अरुण के पिता योगिराज भी एक कुशल मूर्तिकार हैं. उनके दादा बसवन्ना शिल्पी को मैसूर के राजा का संरक्षण प्राप्त था. पढ़ाई लिखाई की बात करें तो अरुण ने एमबीए किया है. पहले वो एक प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन में नौकरी कर रहे थे, लेकिन 2008 में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपने पुश्तैनी काम यानी मूर्तियां तराशने में लग गए.

सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति से अरुण का नाता

जब भी आप कभी इंडिया गेट घूमने जाते होंगे तो आपको वहां 30 फीट ऊंची सुभाष चंद्र बोस की एक मूर्ति दिखती होगी. ये मूर्ति भी अरुण योगीराज ने ही तैयार की है. दरअसल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इस मूर्ति का अनावरण पीएम मोदी ने खुद 8 सितंबर 2022 को किया था. हालांकि, इसके पहले इस मूर्ति की जगह पीएम मोदी ने 23 जनवरी को इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के होलोग्राम स्टैचू का अनावरण किया था.

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सुष्मित सिन्हा एबीपी न्यूज़ के बिज़नेस डेस्क पर बतौर सीनियर सब एडिटर काम करते हैं. दुनिया भर की आर्थिक हलचल पर नजर रखते हैं. शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच तेजी से बदलते आंकड़ों की बारिकियों को आसान भाषा में डिकोड करने में दिलचस्पी रखते हैं. डिजिटल मीडिया में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. यहां से पहले इंडिया टीवी, टीवी9 भारतवर्ष और टाइम्स नाउ नवभारत में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
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