स्पेस में जहां तक जाएगा आर्टिमिस II, वह जगह धरती से कितनी दूर? इस मिशन में क्या-क्या किया जाएगा
Artemis II Moon Mission: नासा का आर्टेमिस 2 मिशन चार यात्रियों के साथ लॉन्च हुआ है. यह यान चांद पर उतरे बिना उसके सुदूर हिस्से से तक जाएगा, जो मानव इतिहास की सबसे लंबी अंतरिक्ष यात्रा होगी.

Artemis II Moon Mission: ब्रह्मांड की गहराइयों को नापने के लिए नासा ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो पिछले 50 सालों के रिकॉर्ड तोड़ देगा. आर्टेमिस 2 मिशन के जरिए इंसान एक बार फिर चांद की दहलीज पर दस्तक देने जा रहा है. 2 अप्रैल 2026 को होने वाली यह लॉन्चिंग महज एक रॉकेट का सफर नहीं है, बल्कि यह उस हिम्मत की कहानी है जो इंसानों को धरती से 4 लाख किलोमीटर दूर ले जाएगी. चार अंतरिक्ष यात्रियों की यह टीम अंतरिक्ष के उस हिस्से तक पहुंचेगी, जहां आज तक कोई मानव कदम नहीं रख पाया है. आइए जानें कि इस मिशन में क्या-क्या होगा.
धरती से कितनी दूर जाएगा आर्टिमिस II?
आर्टेमिस 2 मिशन का सबसे रोमांचक पहलू इसकी दूरी है. यह यान चंद्रमा की सतह पर उतरेगा नहीं, लेकिन यह चांद के उस सुदूर हिस्से के भी पीछे तक जाएगा. वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, यह अंतरिक्ष यान चंद्रमा की सतह से लगभग 7400 से 9600 किलोमीटर ऊपर से गुजरेगा. अगर पृथ्वी से कुल दूरी की बात करें, तो अंतरिक्ष यात्री 4,00,000 किलोमीटर से भी ज्यादा का सफर तय करेंगे. यह 1970 के मशहूर अपोलो 13 मिशन द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड से भी करीब 4,144 मील ज्यादा है.
इस ऐतिहासिक सफर पर कितने लोग?
इस ऐतिहासिक सफर पर निकलने वाले चार अंतरिक्ष यात्रियों में तीन पुरुष और एक महिला शामिल हैं. क्रू में नासा के रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन शामिल हैं. इन यात्रियों को ले जाने के लिए दुनिया के सबसे शक्तिशाली रॉकेट, स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) का इस्तेमाल किया जाएगा. फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होने वाला यह रॉकेट ओरियन शटल यान को अंतरिक्ष में धकेलेगा, जिसके भीतर बैठकर यात्री इस दुर्गम यात्रा को पूरा करेंगे.
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इस मिशन में क्या-क्या होगा?
यह पूरा मिशन कुल 10 दिनों का होगा, जिसमें हर दिन की योजना बेहद सटीक है. लॉन्चिंग के बाद पहले दिन यान पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलेगा. इसके बाद चांद तक पहुंचने में करीब 3 से 4 दिन का समय लगेगा. चांद के करीब पहुंचने पर यान लगभग एक दिन उसकी परिक्रमा में बिताएगा. इस दौरान यात्री चंद्रमा के सुदूर हिस्से को अपनी आंखों से देखने वाले पहले इंसान बनेंगे. मिशन के अंतिम चार दिन धरती पर सुरक्षित वापसी की यात्रा के लिए तय किए गए हैं.
अंतरिक्ष की गहराई में जाएगा ओरियन
अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद एसएलएस रॉकेट का मुख्य हिस्सा ओरियन शटल से अलग हो जाएगा. इसके बाद ओरियन का अपना इंजन काम शुरू करेगा. इस चरण को ट्रांसलूनर इंजेक्शन कहा जाता है. यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें इंजन को सक्रिय करके यान को चांद की कक्षा की ओर सही दिशा और गति दी जाती है. इसी प्रक्रिया के बूते ओरियन यान अगले कुछ दिनों में चंद्रमा के पास पहुंचेगा और उसके पीछे की ओर चक्कर लगाते हुए अंतरिक्ष की गहराई में प्रवेश करेगा.
क्या चांद पर उतरेंगे यात्री?
कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या ये यात्री चांद पर उतरेंगे? जवाब है नहीं. आर्टेमिस 2 एक टेस्ट फ्लाइट है. अंतरिक्ष यात्री ओरियन यान के भीतर रहकर यह जांचेंगे कि यान अंतरिक्ष की मुश्किल परिस्थितियों में कैसा प्रदर्शन कर रहा है. वे आपातकालीन स्थितियों का अभ्यास करेंगे और जीवन रक्षक प्रणालियों की बारीकी से जांच करेंगे. यह मिशन भविष्य में चांद पर इंसानों की लैंडिंग (आर्टेमिस 3) की नींव रखने के लिए किया जा रहा है, ताकि बाद के मिशन सुरक्षित हो सकें.
गहरी रिसर्च और अनोखी तस्वीरें
चंद्रमा के चारों ओर घूमने के दौरान अंतरिक्ष यात्री खाली नहीं बैठेंगे. वे वैज्ञानिक और शोध संबंधी कार्यों को अंजाम देंगे. चंद्रमा के उस हिस्से की तस्वीरें ली जाएंगी जो धरती से कभी दिखाई नहीं देता है. इन तस्वीरों से भविष्य के मिशनों के लिए लैंडिंग साइट चुनने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही, इतनी लंबी दूरी और रेडिएशन के बीच अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर की भी लगातार निगरानी की जाएगी. यह डेटा मंगल ग्रह जैसे भविष्य के बड़े अभियानों के लिए बहुत कीमती साबित होगा.
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Source: IOCL



























