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Army Uniforms 2026: किसने डिजाइन की थी भारतीय सेना की पहली वर्दी, जानें आजादी के बाद कितने हुए बदलाव?

Army Uniforms 2026: हाल ही में भारतीय सेना ने आर्मी यूनिफॉर्म 2026 मैनुअल के तहत कुछ बड़े बदलाव किए हैं. आइए जानते हैं पहली मिलट्री यूनिफॉर्म किसने डिजाइन की थी.

Army Uniforms 2026: पिछले 180 सालों में भारतीय सेना की यूनिफॉर्म में जबरदस्त बदलाव आए हैं. 19वीं सदी में ब्रिटिश दौर की खाकी ड्रेस से लेकर आज इस्तेमाल होने वाली मॉडर्न कैमोफ्लाज यूनिफॉर्म तक सेना की पोशाक लगातार बदलती युद्ध क्षेत्र की जरूरत, टेक्नोलॉजी और राष्ट्रीय पहचान के हिसाब से विकसित होती रही है. हाल ही में भारतीय सेना ने आर्मी यूनिफॉर्म 2026 मैन्युअल के तहत बड़े बदलाव किए हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारतीय सेना की पहली यूनिफॉर्म को किसने डिजाइन किया था.

पहली खाकी यूनिफॉर्म किसने डिजाइन की थी?

पहली खाकी मिलट्री यूनिफॉर्म लाने का श्रेय सर हैरी लम्सडेन को जाता है. वे एक ब्रिटिश अधिकारी थे और 1846 में आज के पाकिस्तान बॉर्डर के पास कॉर्प्स ऑफ गाइड्स के साथ तैनात थे. उस समय ब्रिटिश सैनिक पारंपरिक रूप से चमकीले लाल रंग की यूनिफॉर्म पहनते थे. लेकिन हैरी को यह एहसास हुआ कि इन यूनिफॉर्म की वजह से सैनिक ऊबड़-खाबड़ इलाकों में आसानी से दिख जाते हैं. छिपने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने लाल पोशाक की जगह मिट्टी के रंग वाली खाकी पोशाक अपनाई. यह नया तरीका काफी असरदार साबित हुआ और आखिरकार पूरी ब्रिटिश इंडियन आर्मी में इसे अपना लिया गया. 

आजादी के बाद पहला बड़ा बदलाव 

1947 में आजादी के बाद भारत-पाकिस्तान से अलग अपनी एक सैन्य पहचान बनाना चाहता था. पाकिस्तान खाकी रंग की यूनिफॉर्म का इस्तेमाल करता था. भारतीय सेना ने जैतूनी हरे रंग को अपनी मुख्य कॉम्बैट यूनिफार्म के रंग के तौर पर अपनाया. नई यूनिफॉर्म भारतीय सशस्त्र बलों की सबसे जानी पहचानी पहचानों में से एक बन गई.

दूसरा बड़ा बदलाव 

1980 के दशक में सेना ने कॉम्बैट यूनिफॉर्म में ब्रशस्ट्रोक स्टाइल वाला डिसरप्टिव कैमोफ्लाज पैटर्न पेश किया. इस नए डिजाइन का मकसद सैनिकों को जंगलों, पहाड़ों और मुश्किल इलाकों में आसानी से घुल मिल जाने में मदद करना था.

तीसरा बड़ा बदलाव 

2005 में सेना ने अपनी यूनिफॉर्म को फिर से डिजाइन किया ताकि बीएसएफ और सीआरपीएफ जैसे भारत के पैरामिलिट्री बलों से इसे साफ तौर पर अलग पहचाना जा सके. नए पैटर्न ने सेना की खास विजुअल पहचान को मजबूत किया और साथ ही ऑपरेशनल असर को भी बेहतर बनाया.

चौथा बड़ा बदलाव 

आर्मी पेपर डिजिटल कॉम्बैट यूनिफॉर्म लॉन्च होने के साथ 2022 में आधुनिकीकरण की एक बड़ी पहल शुरू हुई. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी द्वारा डिजाइन की गई इस यूनिफार्म में एडवांस्ड डिजिटल कैमोफ्लाज पैटर्न का इस्तेमाल किया गया है. यह रेगिस्तान, पहाड़ और जंगलों जैसे अलग-अलग माहौल में आसानी से घुल मिल जाते हैं. 

आर्मी यूनिफॉर्म 2026 के तहत ऐतिहासिक सुधार 

जून 2026 में भारतीय सेना ने आजादी के बाद से अपनी ड्रेस और ग्रूमिंग के नियमों में सबसे बड़े बदलावों में से एक को लागू किया है. इन सुधारों का मकसद औपनिवेशिक दौर की कुछ परंपराओं को खत्म करना और सशस्त्र बलों में भारतीय पहचान को बढ़ावा देना है. इसमें बंदी जैकेट की शुरुआत, पाउच बेल्ट के इस्तेमाल को बंद करना, परेड के दौरान तलवार ले जाने पर अनिवार्यता को खत्म करना, 3B विंटर यूनिफॉर्म को शुरू करना शामिल है. इसी के साथ पुरुष जवानों के लिए मूंछों की लंबाई 12 सेंटीमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. साथ ही महिला अधिकारियों को ड्यूटी के दौरान मेकअप, लिपस्टिक और कुछ कॉस्मेटिक एसेसरीज पहनने की मनाही है.

यह भी पढ़ेंः नोएडा के पुराने सेक्टर और नए सेक्टरों में कितना अंतर, जानें कमाई के मामले में कौन आगे?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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