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दिल्ली के इस चुनाव में नहीं लागू होता है दलबदल कानून, कभी भी नेता बदल सकते हैं पाला

दिल्ली में बीजेपी के सत्ता में लौटने का असर अब एमसीडी चुनाव में भी दिख रहा है. आप के 3 पार्षदों ने अब बीजेपी का दामन थामा है. जानिए आखिर क्यों इनके ऊपर दलबदल कानून लागू नहीं होगा.

दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी के ऐतिहासिक जीत के बाद अब एमसीडी में भी सत्ता परिवर्तन होने की उम्मीद है. जी हां, जहां एक तरफ अरविंद केजरीवाल विधानसभा चुनाव में अपनी सीट नहीं बचा पाए हैं, वहीं दूसरी तरफ अब आप के नेता भी पार्टी का दामन छोड़कर बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. बता दें कि आप पार्टी के 3 पार्षद भाजपा में शामिल हुए हैं. अब सवाल ये है कि क्या इनके ऊपर दलबदल कानून लागू नहीं होता है? जानिए इन नेताओं ने कैसे पार्टी बदला है.

दलबदल कानून?

आपने कई बार लोगों को ये कहते हुए सुना होगा नेता किसी के नहीं होते हैं, कभी इधर तो कभी उधर होते रहते हैं. आम बोलचाल की भाषा में इसे ही दलबदलना भी कहते हैं. इसको लेकर कानून भी बना है, जिसे अंग्रेजी में एंटी डिफ्केशन लॉ कहा जाता है. नेताओं के दलबदलने को रोकने के लिए राजीव गांधी सरकार ने 1985 में संविधान में 92वां संशोधन किया था. इस संशोधन में दल बदल विरोधी कानून यानी एंटी डिफेक्शन लॉ पारित किया था. इस कानून को संविधान की 10वीं अनुसूची में रखा गया है. 

कानून के तहत हो सकती है कार्रवाई

बता दें कि अगर कोई विधायक या सांसद अपनी मर्जी से पार्टी की सदस्यता छोड़ता है, तो उस दौरान उसकी सीट छिन सकती है. इतना ही नहीं अगर कोई विधायक या सांसद जानबूझकर मतदान से अनुपस्थित रहता है या फिर पार्टी द्वारा जारी निर्देश के खिलाफ जाकर वोट करता है, तो उसे अपनी सीट गंवानी पड़ सकती है. वहीं अगर कोई निर्दलीय सांसद या विधायक किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल हो जाते हैं, तो वे अयोग्य करार दिए जाएंगे. हालांकि किसी विधायक या सांसद को अयोग्य घोषित करने का अधिकार विधानमंडल के सभापति या अध्यक्ष पीठासीन अधिकारियों द्वारा लिया जाता है. आसान भाषा में समझिए तो अगर निर्वाचित विधायक या सांसद अगर कार्यकाल के दौरान पार्टी बदलते हैं, तो उन्हें अयोग्य घोषित किया जा सकता है. 

आप पार्षद आखिर बीजेपी में कैसे हुए शामिल?

आपके दिमाग में सवाल होगा कि जब दलबदल कानून बना है, तो आप पार्षद कैसे बीजेपी में शामिल हुए हैं. बता दें कि दिल्ली नगर निगम चुनाव में दल-बदल कानून लागू नहीं होता है. यही कारण है आसानी से पार्षद एक पाले से दूसरे पाले में जा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक दिल्ली एमसीडी में 12 वार्ड कमेटियां होती है, जिनमें से सात पर पहले से ही बीजेपी भारी है. ऐसे में अब आप पार्षदों द्वारा पार्टी छोड़ने के कारण बीजेपी को मजबूती मिल रही है. गौरतलब है कि अभी एमसीडी की कुर्सी आम आदमी पार्टी के पास है. 
 

ये भी पढ़ें:दिल्ली सरकार में ज्यादा से ज्यादा कितने मंत्री हो सकते हैं? जानें इसे लेकर क्या होता है नियम

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