Gunda Law: किसी अपराधी को कब कहा जाता है 'गुंडा', इसको लेकर क्या है नियम
Gunda Law: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि सिर्फ एक या दो अपराध के आधार पर किसी को गुंडा नहीं कहा जा सकता. आइए जानते हैं किसी अपराधी को कब गुंडा कहा जा सकता है.

- हाई कोर्ट: सिर्फ 1-2 केस से गुंडा घोषित नहीं किया जा सकता।
- गुंडा: आदतन अपराधी, सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा होता है।
- शर्त: बार-बार आपराधिक गतिविधियों में शामिल होना अनिवार्य है।
- घोषित होने पर: जिला बदर जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
Gunda Law: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोगों पर एक बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी भी व्यक्ति को सिर्फ एक या फिर दो आपराधिक मामलों के आधार पर गुंडा नहीं कहा जा सकता है. कोर्ट ने जोर देकर कहा है कि इस तरह का तमगा ना सिर्फ उस व्यक्ति की इज्जत को बल्कि उसके पूरे परिवार की इज्जत को भी बुरी तरह नुकसान पहुंचा सकता है. इसी बीच आइए जानते हैं कि किसी अपराधी को कब गुंडा कहा जाता है.
कानूनी भाषा में गुंडा का क्या मतलब है?
भारतीय कानून में गुंडा सिर्फ कोई आरोपी व्यक्ति नहीं होता बल्कि ऐसा व्यक्ति होता है जिसे आदतन अपराधी या फिर सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा माना जाता है. कई राज्यों ने ऐसे लोगों से निपटने के लिए कानून बनाए हैं. उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970 इसी का एक उदाहरण है. इन कानूनों का मकसद रोकथाम करना है.
आदतन अपराध ही मुख्य शर्त
सबसे जरूरी शर्त यह है कि वह व्यक्ति आदतन अपराधी होना चाहिए. इसका मतलब है कि वह अकेले या फिर किसी गिरोह के हिस्से के तौर पर बार-बार आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा हो. सिर्फ एक घटना या कुछ मामले भी इस पैमाने को पूरा नहीं करते.
अपराधों का प्रकार
हर तरह के अपराध के आधार पर किसी को अपने आप गुंडा घोषित नहीं किया जा सकता. कानून आमतौर पर उन अपराधों पर ध्यान देता है जिनसे सार्वजनिक शांति भंग होती है या फिर सामाजिक डर पैदा होता है. इनमें मारपीट, अपराधिक धमकी, महिलाओं के साथ छेड़छाड़, हथियारों का अवैध कब्जा और ऐसे ही दूसरे काम शामिल हो सकते हैं जिनसे कानून व्यवस्था को खतरा पैदा होता है.
जनता और गवाहों के बीच डर का माहौल
एक और जरूरी बात है डर का माहौल. अगर लोग अपनी जान या फिर माल को खतरे की वजह से किसी व्यक्ति के खिलाफ गवाही देने से डरते हैं तो इससे उस व्यक्ति को गुंडा घोषित करने का मामला और मजबूत हो जाता है.
कानून इस बात पर भी गौर करता है कि क्या उस व्यक्ति ने एक खतरनाक या फिर बेखौफ इंसान के तौर पर अपनी पहचान बना ली है. अगर उनकी मौजूदगी ही सार्वजनिक शांति भंग करने या फिर दहशत फैलाने के लिए काफी है तो अधिकारी संबंधित कानून के तहत कदम उठा सकते हैं.
गुंडा घोषित होने के बाद क्या होता है?
एक बार इन कानूनों के तहत आधिकारिक तौर पर गुंडा घोषित हो जाने के बाद सख्त कदम उठाए जा सकते हैं. जिला मजिस्ट्रेट के पास जिला बदर का आदेश देने का अधिकार होता है. इसका मतलब है कि उस व्यक्ति को एक तय समय के लिए अक्सर 6 महीने तक के लिए जिला छोड़ने के लिए कहा जा सकता है.
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