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आखिर रात के वक्त ही क्यों होता है किन्नरों का अंतिम संस्कार, बाहरी लोग नहीं हो सकते हैं शामिल

किन्नरों का अंतिम संस्कार हमेशा आधी रात में होता है. वहीं आम नागरिकों को किन्नरों की शवयात्रा देखने पर भी मनाही है. आज हम आपको बताएंगे कि ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे क्या वजह है.

 

परिवार में शादी-ब्याह या बच्चे के जन्म जैसी खुशियों के मौके पर अक्सर किन्नर आती हैं और दुआएं देकर जाती हैं. इसके अलावा आपने शहरों में ट्रैफिक सिग्नल पर भी किन्नरों को दुआएं देकर बख्शीस मांगते हुए देखा होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि किन्नरों का अंतिम संस्कार कैसे होता है और इसमें बाहरी लोग क्यों शामिल नहीं हो सकते हैं. आज हम इसके बारे में आपको बताएंगे.

 किन्नरों का अंतिम संस्कार

किन्नर समुदाय को लेकर कई तरह की बातें समाज में होती है. अक्सर किन्नरों के अंतिम संस्कार को लेकर भी चर्चा होती है. माना जाता है कि कई किन्नरों के पास आध्यात्मिक शक्ति होती है, जिससे उन्हें मौत का आभास हो जाता है. जानकारी के मुताबिक मौत आने से पहले होने वाली है, ये जानने के बाद किन्नर कहीं आना-जाना और यहां तक कि खाना भी बंद कर देते हैं. जानकारी के मुताबिक इस दौरान वे सिर्फ पानी पीते हैं और ईश्वर से अपने और दूसरे किन्नरों के लिए दुआ करते हैं. कहा जाता है कि ईश्वर से दुआ करते हुए वे कहते हैं कि अगले जन्म में वे किन्नर न बनें. इसके अलावा आसपास और दूरदराज के किन्नर मरते हुए किन्नर की दुआ लेने आते हैं. क्योंकि किन्नरों में मान्यता है कि मरणासन्न किन्नर की दुआ काफी असरदार होती है.

किन्नरों की मौत की खबर किसी को नहीं

जानकारी के मुताबिक किन्नरों के बीमारी या मौत की खबर बाहर किसी व्यक्ति को नहीं दी जाती है. इतना ही नहीं सभी किन्नर समुदाय के लोग किसी बाहरी व्यक्ति को मरणासन्न किन्नर या किन्नर की मौत की खबर बताने से बचते हैं. इसके अलावा किन्नरों के शव को जहां दफनाया जाता है, वहां अधिकारियों को भी इसके बारे में पहले ही बता दिया जाता है. जिससे ये जानकारी गुप्त रहे.

 शवयात्रा भी अलग

सभी धर्मों में शव को लेटाकर चार कंधों पर लेकर जाते हैं. लेकिन किन्नरों की शवयात्रा बिल्कुल अलग होती है. किन्नर मृतक के शव को खड़ा करके अंतिम संस्कार के लिए लेकर जाते हैं. इसके अलावा ऐसी मान्यता है कि आम लोग अगर मृत किन्नर का शरीर देखते हैं, तो मृतक को दोबारा किन्नर का ही जन्म मिलता है. इसलिए भी किन्नर की शवयात्रा रात में निकलती है और इसमें कोई बाहरी व्यक्ति शामिल नहीं हो सकता है. 

शव यात्रा में जूते-चप्पल

किन्नर समुदाय के लोग अपने जीवन को अभिशप्त मानते हैं. यही कारण है कि शव यात्रा से पहले मृतक को जूते-चप्पलों से पीटा और गालियां दी जाती हैं. इसकी वजह ये भी है कि अगर मृत किन्नर ने कोई अपराध किया हो तो जाते-जाते उसका प्रायश्चित हो जाए और अगला जन्म आम इंसान का मिले. जानकारी के मुताबिक अपने समुदाय में एक भी किन्नर की मौत के बाद पूरा का पूरा वयस्क किन्नर समुदाय पूरे एक सप्ताह तक व्रत करता है और मृतक के लिए दुआएं मांगता है.

 

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