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Ice Breaker Ship: एक ऐसा जहाज जो बर्फ में बनाता है दूसरे शिपों के लिए रास्ता, जानिए कैसे करता है ये काम

दुनियाभर में व्यापार के लिए समुद्री मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है. बड़े-बड़े जहाज समुद्र मार्ग के जरिए एक देश से दूसरे देश तक सामान पहुंचाते हैं.क्या आप जानते हैं कि समुद्र में बर्फ कैसे साफ होता है.

पूरी दुनिया में व्यापार के लिए कार्गो शिप का इस्तेमाल होता है. समुद्री मार्गो के बिना व्यापार संभव नहीं है, क्यों लाखों टन सामान शिप के माध्यम से ही एक देश से दूसरे देश जा सकता है.  शिप ट्रांसपोर्ट के लिए सबसे सस्ता साधन है. लेकिन क्या कई बार ऐसा होता है कि समुद्री मार्गो में बर्फ, ग्लेशियर और हिमखंड मिल जाते हैं, जिससे रास्ता बंद हो जाता है. क्या आप जानते हैं कि ऐसी स्थिति में कौन सा शिप इन रास्तों को खोलता है. आज हम आपको बताएंगे कि बर्फ हटाने के लिए किस शिप का इस्तेमाल किया जाता है. 

व्यापार के लिए कार्गो शिप

बता दें कि दुनियाभर में व्यापार के लिए कार्गो शिप का इस्तेमाल किया जाता है. इन शिपों के माध्यम से सामान एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब कभी शिप बर्फ या ग्लेशियर के पास फंस जाता है और जहाज को आगे जाने का रास्ता नहीं मिलता है, तो उस समुद्री रास्तों में बर्फ कैसे साफ करके रास्ता बनाया जाता है. 

आइसब्रेकर जहाज

आइसब्रेकर जहाज के नाम से आपको समझ में आ गया होगा कि इसका इस्तेमाल कहां पर होता है. दरअसल जब समुद्री बर्फ में जहाज फंस जाते हैं, उस वक्त आइसब्रेकर जहाज का इस्तेमाल किया जाता है. आइसब्रेकर जहाज समुद्र बर्फ को किनारे करके दूसरे जहाजों के लिए रास्ता बनाता है. कई बार ऐसा भी होता है कि जहाज कई दिनों तक बर्फ में फंसे रहते हैं, इसके बाद उन जहाज को रेस्कयू करने के लिए आइसब्रेकर जहाज को भेजा जाता है. ये बर्फ में फंसे सभी समुद्री जहाजों को रेस्क्यू करते हैं. 

आइसब्रेकर जहाज की शुरूआत

जानकारी के मुताबिक आइसब्रेकर जहाज का इतिहास काफी पुराना माना जाता है. इतिहासकारों के मुताबिक 11वीं शताब्दी से भी पहले एक आइसब्रेकर जहाज काम करने के लिए जाना जाता था और लोगों को रेस्क्यू करता था. हालांकि उस वक्त के जहाज आज के जहाजों की तुलना में काफी छोटे और लकड़ी के होते थे. लेकिन आज के वक्त के जहाज काफी बड़े होते हैं और उसमें लोहा,स्टील समेत कई धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है. 

समुद्री मार्ग

खासकर ठंड के समय अक्सर समुद्री मार्गो में जहाज के फंसे होने की खबर आती है. इस स्थिति में जहाज जिस भी देश के सागर में होता है, वहां से उन्हें जल्द से जल्द रेस्क्यू किया जाता है. इसके लिए आइसब्रेकर जहाज का इस्तेमाल किया जाता है. 

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गिरिजांश गोपालन को मीडिया इंडस्ट्री में चार साल से ज्यादा का अनुभव है. फिलहाल वह डिजिटल में सक्रिय हैं, लेकिन इनके पास प्रिंट मीडिया में भी काम करने का तजुर्बा है. दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद गिरिजांश ने नवभारत टाइम्स अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. उन्हें घूमना बेहद पसंद है. पहाड़ों पर चढ़ना, कैंपिंग-हाइकिंग करना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना उनकी हॉबी में शुमार है। यही कारण है कि वह तीन साल से पहाड़ों में ज्यादा वक्त बिता रहे हैं. अपने अनुभव और दुनियाभर की खूबसूरत जगहों को अपने लेखन-फोटो के जरिए सोशल मीडिया के रास्ते लोगों तक पहुंचाते हैं.
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