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500 स्क्वायर फीट की छत बनाने में कितनी मौरंग लगती है, जान लें पूरा हिसाब?

इस महंगाई के जमाने में हर चीज के दाम बढ़ गए हैं, ऐसे में घर बनाने भी काफी महंगा हो चुका है. अक्सर लोगों के मन में घर बनाने से पहले यह सवाल उठता है कि 500 स्क्वायर फीट छत डालने के लिए कितनी मौरंग लगेगी.

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  • 500 वर्ग फीट छत हेतु मौरंग अनुमान समझना महत्वपूर्ण है.
  • 5 इंच मोटी छत को लगभग 100 घन फीट मौरंग लगती.
  • मजबूती हेतु स्वच्छ मौरंग और 5-10% अतिरिक्त रखें.

घर बनवाने के दौरान छत डालना सबसे महत्वपूर्ण और खर्चीला काम माना जाता है. छत की मजबूती काफी हद तक सीमेंट, सरिया, गिट्टी और मौरंग की सही मात्रा पर निर्भर करती है. अक्सर लोग यह जानना चाहते हैं कि 500 स्क्वायर फीट की आरसीसी (RCC) छत बनाने के लिए कितनी मौरंग की जरूरत पड़ेगी. यदि सामग्री का सही अनुमान पहले से लगा लिया जाए तो बजट बनाना आसान हो जाता है और निर्माण के दौरान अनावश्यक खर्च से भी बचा जा सकता है. हालांकि मौरंग की सटीक मात्रा छत की मोटाई और डिजाइन पर निर्भर करती है, फिर भी सामान्य गणना के आधार पर इसका अनुमान लगाया जा सकता है.

छत की मोटाई है महत्वपूर्ण

किसी भी आरसीसी छत में सामग्री की मात्रा उसकी मोटाई पर निर्भर करती है. सामान्य तौर पर मकानों में 5 इंच (0.42 फीट) मोटी छत डाली जाती है. इसी मानक के आधार पर मौरंग की जरूरत का अनुमान लगाया जाता है. यदि छत का क्षेत्रफल 500 वर्ग फीट और मोटाई 5 इंच मानी जाए तो कुल कंक्रीट वॉल्यूम लगभग 208 से 210 घन फीट के आसपास आता है. निर्माण कार्य में सूखी सामग्री का वॉल्यूम गीले कंक्रीट से अधिक माना जाता है, इसलिए गणना बढ़ाकर की जाती है.

आरसीसी की छत में मौरंग का अनुपात

अधिकतर मकानों की छत में M20 ग्रेड कंक्रीट का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें सीमेंट, मौरंग और गिट्टी का अनुपात लगभग 1:1.5:3 होता है. इस अनुपात में मौरंग का हिस्सा कुल सामग्री का महत्वपूर्ण भाग होता है. सामान्य गणना के अनुसार 500 वर्ग फीट की 5 इंच मोटी आरसीसी छत के लिए लगभग 95 से 110 घन फीट मौरंग की आवश्यकता पड़ सकती है. यदि इसे घन मीटर में बदलें तो यह लगभग 2.7 से 3.1 घन मीटर के बराबर होती है. 

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गुणवत्ता का भी रखना होता है ध्यान

सिर्फ मात्रा ही नहीं बल्कि मौरंग की गुणवत्ता भी बेहद महत्वपूर्ण है. साफ, धूल रहित और अच्छी ग्रेड की मौरंग का उपयोग करने से कंक्रीट की मजबूती बढ़ती है. खराब गुणवत्ता वाली मौरंग छत की मजबूती को प्रभावित कर सकती है. निर्माण कार्य के दौरान कुछ सामग्री बिखरने या खराब होने की संभावना रहती है. इसलिए विशेषज्ञ आमतौर पर 5 से 10 प्रतिशत अतिरिक्त मौरंग खरीदने की सलाह देते हैं. इससे काम बीच में रुकने की समस्या नहीं आती.

लागत पर कितना होता है असर?

मौरंग की कीमत अलग-अलग राज्यों और शहरों में अलग होती है. यदि किसी क्षेत्र में मौरंग की कीमत अधिक है तो छत की कुल लागत भी बढ़ जाती है. इसलिए निर्माण शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार भाव की जानकारी लेना जरूरी है.

यह भी पढ़ें: प्लास्टिक का एक नोट छापने में कितना होता है खर्च, RBI के कागज के नोट से महंगा या सस्ता?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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