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स्ट्रगल के दिनों में चॉल में रहा करते थे 'बारामूला' के मानव कौल, बोले- सबसे अच्छे दिन थे, अमीर घरों के बच्चे नहीं बन पाते आर्टिस्ट

मानव कौल इन दिनों सुपरनैचुरल थ्रिलर फिल्म 'बारामूला' को लेकर सुर्खियों में छाए हुए हैं. बता दें, एक्टर की जन्मभूमी भी बारामूला ही है.हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने बचपन के दिनों को याद किया.

'बारामूला' फेम मानव कौल ने हाल ही में अपने बचपन के दिनों को याद करने के साथ-साथ आर्थिक तंगी के बारे में बात की. साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि मुंबई में स्ट्रगल के दिनों में वो कैसे चॉल में रहा करते थे. उसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत के दम पर बॉलीवुड में एक्टर बन बैठे.

मानव कौल ने कहा कि आपके जीवन या गरीबी से इस बात पर फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या करना चाहते हो.फर्क इस बात से पड़ता है कि आपको किस चीज में इंट्रेस्ट है और आप उस समय क्या कर रहे थे.एक्टर ने कहा कि जब मैं चॉल में था तो मेरे हाथ में विनोद कुमार शुक्ल, निर्मल वर्मा की किताबें थीं.

संघर्ष नहीं होता कुछ

वो मेरा एंटरटेनमेंट था. मैंने गोर्की और दोस्तोवस्की और सॉल बेलो जैसे लेखकों को उसी वक्त पढ़ा है जब मेरे पास बहुत वक्त होता था. मैं दीवारें देखने के बजाय किताबें देखता था.मेरा मानना है कि आपके संघर्ष से कुछ नहीं होता. ऐसा होता तो अमीर घरों के बच्चे आर्टिस्ट ही नहीं बन पाते.

सत्यजीत रे तो काफी अच्छे परिवार से थे, उन्होंने पाथेर पंचाली कैसे बनाई?तो आप वही करते हैं जिसके लिए एक्साइटेड होते हैं. हमेशा से मैं साहित्य, सिनेमा, पेंटिंग को लेकर बहुत उत्साहित रहता था. इन चीजों के पीछे मैं भागता रहा हूं. आज थोड़े पैसे आ गए हैं तो मैं यूरोप भी जाता हूं तो अमूमन किसी राइटर या पेंटर की ही खोज में रहता हूं कि वे कहां रहते थे, कैसे रहते थे. मैं कभी टूरिस्ट जगहें देखने नहीं जाता.

 
 
 
 
 
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हमने सोच लिया थे फेलियर हैं हम

उसमें मेरी कोई रुचि नहीं है.मैंने अपनी जो जिंदगी चॉल में बिताई है, वो मेरी जिंदगी के सबसे अच्छे दिन हैं. हम कितना हंसा करते थे. हम हंस-हंसकर पागल हो जाया करते थे, क्योंकि खोने के लिए कुछ भी नहीं था. कुछ भी हमें मिला करता था हो हम खुश हो जाते थे कि अरे, ये कैसे मिल गया. हम तो यही सोचकर आए थे कि हम फेलियर ही हैं.

तब कहीं अच्छा खाना भी मिल जाए तो ऐसा लगता है कि गुरु आज ये मिल गया, आगे काफी समय तक नहीं मिलेता तो आप उसको एंजॉय करते हैं. ये नहीं सोचते कि आगे क्या होगा. मैं आज भी चॉल में जाऊं और वहां रहने लगूं तो मुझे बहुत मजा आएगा. 

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