मैं तो कम्पाउंडर बनने लायक भी नहीं था, स्वास्थ्य मंत्री बन गया: शत्रुघ्न सिन्हा

गुवाहाटी: अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने आज कहा कि मैं तो कम्पाउंडर बनने की भी काबिलियत नहीं रखता था लेकिन मैंने स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर काम किया.
यहां चल रहे ब्रह्मपुत्र साहित्य महोत्सव में दीपा चौधरी के साथ बातचीत के दौरान सिन्हा ने कहा, ‘‘मैं तो कम्पाउंडर बनने की भी काबिलियत नहीं रखता था लेकिन मैंने देश के स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर काम किया.’’
बहरहाल, सिन्हा ने इस बात का उल्लेख किया कि उनके बड़े भाई एक डॉक्टर थे. उन्होंने भारत के लोगों को उन्हें प्यार और सम्मान देने के लिए उनका शुक्रिया अदा किया और बताया कि तब वह बम्बई कोई स्टार बनने के लिए नहीं बल्कि संघर्ष करने और एक अभिनेता बनने के लिए गये थे.
अपनी जीवनी ‘एनिथिंग बट खामोश’ के बारे में बात करते हुए सिन्हा ने कहा कि यह किसी के जीवन पर लिखी सबसे ईमानदार और पारदर्शी किताब है.
दिग्गज अभिनेता ने कहा, ‘‘यह किताब सबसे अधिक बिकने वाली किताब बन गई है. इसमें कोई सनसनी नहीं है. किताब में किसी महिला का अनादर नहीं किया गया है. लेकिन इसमें सबकुछ है.’’
Brahmaputra Literary Festival 2017. Anything but Khamosh unveiled.Great crowd! Overwhelming response! Organizers-National book trust India. pic.twitter.com/gWnAHxvV2z
— Shatrughan Sinha (@ShatruganSinha) January 29, 2017
सिन्हा उस दौर को याद करते हैं जब कुछ लोगों ने उन्हें खूबसूरत दिखने के लिए अपने चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी कराने की सलाह दी थी लेकिन जब दिग्गज अभिनेता देव आनंद ने उन्हें ऐसा करने से रोका तो उन्होंने इसके खिलाफ फैसला किया.
उन्होंने कहा, ‘‘देव साहब ने मुझसे कहा था, ऐसा मत करो, जैसे हो वैसे बने रहो. तब मैंने दुनिया को बताया कि मैं जैसा हूं वैसा ही मुझे स्वीकार किया जाए. मैंने अपने चेहरे, प्रतिभा और व्यक्तित्व को निखारने का काम किया.’’


















