एक्सप्लोरर

गुलशन बावरा: रेलवे का क्लर्क कैसे बना बेहतरीन गीतकार? दंगों में हो गई थी पैरेंट्स की हत्या

Gulshan Bawra Death Anniversary: बॉलीवुड को कई बेहतरीन गीत देने वाले गुलशन बावरा की आज डेथ एनिवर्सरी है. फिल्मी दुनिया में आने से पहले गुलशन भारतीय रेलवे में क्लर्क की नौकरी किया करते थे.

Gulshan Bawra Death Anniversary: हिंदी सिनेमा में अक्सर ही एक्टर्स और एक्ट्रेस को लेकर बातें होती हैं. होना लाजिमी भी है क्योंकि वो बड़े पर्दे पर नजर आते हैं और अपनी हर अदा से फैंस का दिल जीत लेते हैं. उनके अलावा फिर डायरेक्टर्स, प्रोड्यसूर और सिंगर्स भी फैंस का दिल जीतते रहते हैं. हालांकि गीतकारों की बातें बहुत कम होती हैं. जबकि उनका योगदान भी किसी फिल्म की सफलता में बहुत बड़ा होता है.

हिंदी सिनेमा के 112 साल से ज्यादा के इतिहास में एक से बढ़कर एक गीतकार हुए हैं. उन्होंने अपनी कलम से ऐसे गीत रचे जिनकी गूंज सालों और दशकों बाद भी सुनाई देती है. आज हम भी आपको एक ऐसे ही बेहतरीन गीतकार के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने तीन दशक तक फिल्मी दुनिया में काम किया और अपने शानदार गीतों के दम पर हर उम्र के लोगों का दिल बहला लिया. ये गीतकार है गुलशन बावरा. उन्होंने कुछ एक हिंदी फिल्मों में बतौर कैरेक्टर आर्टिस्ट भी काम किया था.

पाकिस्तान में हुआ था जन्म

गुलशन बावरा का जन्म पाकिस्तान के शेखुपुर में 12 अप्रैल 1937 को हुआ था. गीतकार का असली नाम गुलशन मेहता है. हालांकि बाद में ये नाम उन्होंने किसी और की वजह से बदल लिया था.

गुलशन बावरा: रेलवे का क्लर्क कैसे बना बेहतरीन गीतकार? दंगों में हो गई थी पैरेंट्स की हत्या

ये भी पढ़ें: पापा उदित नारायण जैसे क्यों नहीं चमक पाए आदित्य नारायण? टैलेंटेड होने के बावजूद इन वजहों से छूटे पीछे

दंगों में पैरेंट्स को खोया

गुलशन ने कम उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया था. उन्होंने अपनी आंखों से अपने पैरेंट्स की मौत देखी थी. दरअसल भारत के बंटवारे के दौरान हुए सांप्रदायिक दंगो में उनके माता-पिता की हत्या कर दी गई थी. इसके बाद गुलशन दिल्ली आ गए थे. यहां उनकी बड़ी बहन रहा करती थीं. यहां उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था. 

रेलवे में थे क्लर्क

भारत आने के बाद और अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद गुलशन बावरा ने बतौर क्लर्क भारतीय रेलवे में नौकरी की थी. उन्होंने इस नौकरी के लिए अप्लाई किया था और साल 1955 में काम शुरू किया था. उनका मानना था कि सरकारी नौकरी के चलते वो अपना फ्यूचर फाइनेंशियली सिक्योर रख पाएंगे. हालांकि ज्यादा वक्त तक उन्होंने ये काम नहीं किया और फिर फिल्मी दुनिया को गले लगा लिया.

गुलशन बावरा: रेलवे का क्लर्क कैसे बना बेहतरीन गीतकार? दंगों में हो गई थी पैरेंट्स की हत्या

1959 में किया बॉलीवुड डेब्यू

शुरू से ही गुलशन बावरा को लिखने का शौक था. वो शुरू से ही कविता लिखा करते थे और यही शौक उन्हें बॉलीवुड में खींच लाया. उन्हें फिल्मी दुनिया में बतौर गीतकार सबसे पहला ब्रेक संगीतकार कल्याण-आनंद जी की जोड़ी ने 1959 की फिल्म 'चंद्रसेना' के जरिए दिया था.

शांतिभाई पटेल ने दिया था 'बावरा' नाम

साल 1959 में ही गुलशन ने फिल्म 'सट्टा बाजार' के लिए 'तुम्हे याद होगा कभी हम मिले थे' गाना भी लिखा था. इस गीत को दिग्गज गायिका लता मंगेशकर और हेमंत कुमार मुखोपाध्याय ने मिलकर गाया था. उनके गीत से फिल्म वितरक शांतिभाई पटेल काफी खुश हुए थे. इसके बाद उन्होंने गुलशन को बावरा कहा था. आगे जाकर ये शब्द उनकी पहचान बन गया और वो गुलशन मेहता से गुलशन बावरा बन गए.

इन गानों से मिली थी खास पहचान

गुलशन बावरा ने अपने लंबे करियर में करीब 240 गाने लिखे थे. उन्होंने कई फिल्मों के लिए बतौर गीतकार काम किया था. गुलशन ने 1975 की फिल्म 'खेल खेल में', 1978 की फिल्म 'कसमें वादे' और 1982 की फिल्म 'सत्ते पे सत्ता' जैसी चर्चित फिल्मों के आधे गाने लिखे थे. 

गुलशन बावरा: रेलवे का क्लर्क कैसे बना बेहतरीन गीतकार? दंगों में हो गई थी पैरेंट्स की हत्या

ये भी पढ़ें: कभी एयर होस्टेस थीं दीपिका कक्कड़, मुंबई में 5 लोगों के साथ एक कमरे में रहती थीं 'सिमर'

गुलशन बावरा सबसे ज्यादा चर्चा में 'यारी है ईमान मेरा' और 'मेरे देश की धरती' जैसे गानों के लिए रहे. मेरे देश की धरती गाना साल 1968 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'उपकार' और 'यारी है ईमान मेरा' अमिताभ बच्चन की साल 1973 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'जंजीर' का गाना था. इन दोनों गानों के लिए गुलशन को फिल्मफेयर के बेस्ट लिरिसिस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. इसके अलावा उन्होंने 'प्यार हमें किस मोड पे ले आया...' और 'खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे' गानों से भी अपना हुनर साबित किया था.

अपने करियर में गुलशन बावरा ने कल्याणजी-आनंदजी , शंकर-जयकिशन और आरडी बर्मन से लेकर अनु मलिक तक कई दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया था. 

2009 में हो गया था निधन

साल 1973 में गुलशन बावरा को उनके बेहतरीन काम के लिए बिनाका गीतमाला की एनुअल लिस्ट में पहला स्थान दिया गया था. ये मशहूर गीतकार अब हमारे बीच नहीं है. उनका 7 अगस्त 2009 को मुंबई में निधन हो गया था. उन्होंने 72 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया था.

संदीप मेहरा ABP LIVE की एंटरटेनमेंट टीम में बतौर कंसलटेंट कंटेंट राइटर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं. इससे पहले वे एबीपी न्यूज़, टीवी9 भारतवर्ष, न्यूज़ट्रेंड और न्यूजट्रैक लाइव में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

ओटीटी पर इस हफ्ते सबसे ज्यादा देखे गए शोज में 'बिग बॉस 20' का धमाल, देखें टॉप 10 की लिस्ट
ओटीटी पर इस हफ्ते सबसे ज्यादा देखे गए शोज में 'बिग बॉस 20' का धमाल, देखें टॉप 10 की लिस्ट
'मिर्जापुर द मूवी' का 5वें दिन भी कहर, 10 बजे तक 122 करोड़ के हुई पार
'मिर्जापुर द मूवी' का 5वें दिन भी कहर, 10 बजे तक 122 करोड़ के हुई पार
'मैं हमेशा सलमान खान से डरती थी...' प्रीति जिंटा ने खोला अपना बड़ा राज
'मैं हमेशा सलमान खान से डरती थी...' प्रीति जिंटा ने खोला अपना बड़ा राज
'हनुमान अंश' की टीम ने की CM योगी से मुलाकात, दिखाई नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म
'हनुमान अंश' की टीम ने की CM योगी से मुलाकात, दिखाई नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म
Advertisement

वीडियोज

Sansani: कानपुर में Killer बहू का सीक्रेट प्लान ! UP CRIME News
UP Viral News: Bareilly में करीब 4 करोड़ की लागत से बन रही थी टंकी, कटान के चलते नदी में समाई
Punjab Drug Row | Breaking News: मंत्री से सवाल पूछने वाले को जहर पीना पड़ा? | Janhit | CM Mann
Janhit With Chitra Tripathi: BAPS संतों पर फ्रांस में विवाद क्यों हुआ ?
Sapa New Dress Code | Akhilesh Yadav: अखिलेश का लाल+हरा=नीला हो गया! | BJP | UP Election 2027
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'शेख हसीना को कैप्चर कर लाएंगे और फांसी देंगे', बांग्लादेश ने फिर दिखाई आंखें
'शेख हसीना को कैप्चर कर लाएंगे और फांसी देंगे', बांग्लादेश ने फिर दिखाई आंखें
सम्राट चौधरी बोले, 'सोचा नहीं था CM बनूंगा', निशांत कुमार पर क्या कहा?
सम्राट चौधरी बोले, 'सोचा नहीं था CM बनूंगा', निशांत कुमार पर क्या कहा?
मोहनलाल की बेटी विस्मया की 'थुडाक्कम' की OTT रिलीज डेट हुई कंफर्म, जानें- कब और कहां देख सकेंगे?
'थुडाक्कम' की ओटीटी रिलीज डेट हुई कंफर्म, जानें- कब और कहां देख सकेंगे?
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने बिग बैश लीग के निजीकरण को मंजूरी दी, मेलबर्न रेनेगेड्स की होगी बिक्री
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने बिग बैश लीग के निजीकरण को मंजूरी दी, मेलबर्न रेनेगेड्स की होगी बिक्री
ब्रह्मोस की तबाही भूला नहीं PAK! खरीदा चीनी एयर डिफेंस सिस्टम, PAF का दावा
ब्रह्मोस की तबाही भूला नहीं PAK! खरीदा चीनी एयर डिफेंस सिस्टम, PAF का दावा
बिहार में भीषण बाढ़ पर लालू यादव, 'नीतीश ने रगड़-रगड़ कर…'
बिहार में भीषण बाढ़ पर लालू यादव, 'नीतीश ने रगड़-रगड़ कर…'
मुज्तबा की लंदन में लग्जरी प्रॉपर्टी के दावे पर ईरान बोला - 'उनके पास...'
मुज्तबा की लंदन में लग्जरी प्रॉपर्टी के दावे पर ईरान बोला - 'उनके पास...'
भारत में 6G नेटवर्क की तैयारी, दुनिया के इन 25 देशों में भी बढ़ा कदम?
भारत में 6G नेटवर्क की तैयारी, दुनिया के इन 25 देशों में भी बढ़ा कदम?
Embed widget