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जानें- समीक्षकों की नज़र में कैसी है 'शादी में जरूर आना', पढ़ें मूवी रिव्यू

इस फिल्म में राजकुमार राव के साथ कीर्ति खरबंदा है जो इससे पहले इमरान हाशमी के साथ फिल्म राज रिबूट में इससे पहले नज़र आ चुकी हैं.

'न्यूटन', 'बहन होगी तेरी', 'बरेली की बर्फी' जैसी फिल्मों में दर्शकों का दिल जीतने के बाद इस साल अब राजकुमार राव की चौथी फिल्म 'शादी में जरूर आना' रिलीज हो गई है. ये एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है जिसमें दहेज प्रथा जैसे मुद्दे को एक प्रेम कहानी के जरिए दिखाया गया है. इस फिल्म को रत्ना सिन्हा ने निर्देशित किया और इसे कमल पांडे ने लिखा है. इस फिल्म में राजकुमार राव के साथ कीर्ति  खरबंदा है जो इससे पहले इमरान हाशमी के साथ फिल्म राज रिबूट में इससे पहले नज़र आ चुकी हैं.

कहानी

 फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश की संस्कृति और परंपराओं पर आधारित है. यह मध्यम वर्ग के दो साधारण लोगों सत्येंद्र मिश्रा और आरती शुक्ला की कहानी है, जिनकी शादी होने जा रही होती है, लेकिन आरती अपने सपनों को पूरा करने का निर्णय लेती है, और सत्येंद्र को मंडप में अकेला छोड़ जाती है. पांच साल बाद कहानी दिलचस्प मोड़ लेती है, जब आईएएस अधिकारी बन चुके सत्येंद्र को पीसीएस अधिकारी आरती का मामला सौंपा जाता है.

अब आपको बताते हैं कि इस फिल्म को देखने के बाद समीक्षकों ने इसके बारे में क्या लिखा है और कितनी रेटिंग दी है.

नवभारत टाइम्स ने इस फिल्म को तीन स्टार देते हुए लिखा है, ''ऐक्टिंग की बात करें तो मानना होगा कि राजकुमार राव अब हर तरह के किरदार करने में एक्सपर्ट हो चुके हैं, यहां भी सत्तु के किरदार में रॉव का जवाब नहीं है. कृति खरबंदा अपने रोल में बस ठीक-ठाक रही हैं. वैसे भी यह रॉव के इर्दगिर्द घूमती कहानी है सो बाकी कलाकारों को वैसे भी कुछ ज्यादा करने का मौका ही नहीं मिला. डायरेक्टर ने इस सीधी कहानी को इंटरवल से पहले तो सही ट्रैक पर रखा, लेकिन इंटरवल के बाद क्लाइमैक्स को न जाने क्यों मुंबइया फिल्मों की तर्ज पर करने के लिए फिल्म को बेवजह खींचा है.'' जानें- समीक्षकों की नज़र में कैसी है 'शादी में जरूर आना', पढ़ें मूवी रिव्यू

दैनिक जागरण ने इस फिल्म को 2.5 स्टार देते हुए लिखा है, ''दहेज और लैंगिक असमानता के मुद्दे पर सीधे चोट करने के बावजूद फ़िल्म संपूर्णता में असर नहीं छोड़ पाती है. दूसरे हिस्से में लगता है कि किसी सास-बहू शो की रसोई राजनीति चल रही है. संवाद और भावुक करने वाले पल यदा-कदा टुकड़ों में ठीक से लगते हैं. लेखन के इस बर्ताव के चलते राजकुमार राव, कृति खरबंदा और अन्य प्रतिभाशाली कलाकारों की मौजूदगी से भी फ़िल्म असरदार नहीं बन पड़ी है.''

एनडीटीवी की वेबसाइट ने इस फिल्म को 2.5 स्टार देते हुए लिखा है, ''कुल मिलाकर शादी में जरूर आना टाइटल भी जस्टीफाई नहीं हो पाता है. फिल्म के गाने भी ऐसे नहीं हैं जो बांध कर रख सकें. राजकुमार राव की फिल्म होने के बावजूद इस बार यह कहना ही पड़ेगा कि मजा नहीं आया.''

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की जानी मानी समीक्षक शुभ्रा गुप्ता ने इस फिल्म को 1.5 स्टार दिया है. उन्होंने लिखा है कि ये फिल्म आपको कन्फ्यूज करती है. उन्होंने बताया है कि इस फिल्म में 80 के दशक की कहानी है जिसका प्लॉट बदला लेना है. इस फिल्म के कैरेक्टर्स को सीधा दिखाया गया है लेकिन असल में वो बिल्कुल उल्टे है. शुभ्रा ने राजकुमार राव की तारीफ करते हुए लिखा है कि उनके लिए ये साल बहुत ही अच्छा रहा है लेकिन अब उन्हें Small-town Lover Boy की छवि से बाहर निकलना चाहिए.

हिंदुस्तान टाइम्स ने इसे इंटरटेनिंग फिल्म बताया है और इस फिल्म को 3.5 स्टार देते हुए लिखा है कि इस फिल्म में रोमांस, ड्रामा, बदला और गाने सब कुछ है. फिल्म की छोटी मोटी गलतियों को अगर इग्नोर कर दिया जाए तो ये फिल्म आपको मिस नहीं करनी चाहिए.

यहां देखें फिल्म का ट्रेलर-

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